राठौड़ साहब ज्यादा ‘पराक्रम’ नहीं दिखाएं वरना सारी पोल खुल जाएगी, फिर बात दूर तक जाएगी- रमेश मीणा

सरपंचों के आंदोलन के दौरान राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपोटरा विधानसभा में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए. इसके जवाब में मंत्री रमेश मीणा ने पलटवार करते हुए कहा कि जब राठौड़ पिछली सरकार में पंचायती राज मंत्री थे, तब क्यों तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट की उस रिपोर्ट को दबाया था, जिसमें नागौर में भ्रष्टाचार को लेकर कार्रवाई की कही गई थी बात

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Politalks.News/Rajasthan/RameshMeena. एक दिन पहले पीसीसी में जनसुनवाई करने पहुंचे गहलोत सरकार में पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा ने जहां मीडिया से बातचीत में बीजेपी सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा पर जोरदार निशाना साधते हुए अपनी ही गहलोत सरकार पर सवाल उठाए थे तो वहीं अब रमेश मीणा ने किरोड़ी मीणा को अपना अभिन्न मित्र बताने वाले पूर्व पंचायत राज मंत्री और वर्तमान में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ पर जमकर हमला बोला है. दरअसल, बीते कई महीनों से पंचायत राज विभाग के तहत नागौर और बाड़मेर की पंचायतों से भ्रष्टाचार की शिकायतों और आरोपों को लेकर पूर्व पंचायती राज मंत्री और वर्तमान पंचायती राज मंत्री में ‘जुबानी जंग‘ चल रही है. इसी बीच राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपोटरा विधानसभा में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए. इसके जवाब में रमेश मीणा ने पलटवार करते हुए कहा कि जब राठौड़ पिछली सरकार में पंचायती राज मंत्री थे, तब उन्होंने नागौर में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट को दबाया था. यही नहीं मीणा ने यहां तक कह दिया कि राठौड़ साहब ज्यादा ‘पराक्रम‘ नहीं दिखाएं, नहीं तो सारी पोल खुल जाएगी और फिर बात दूर तक जाएगी.

आपको बता दें, हाल ही में राजधानी में पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा के खिलाफ हुए सरपंचों के आंदोलन और धरना प्रदर्शन के बाद उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और मंत्री रमेश मीणा के बीच ‘जुबानी जंग’ जारी है. जब नागौर और बाड़मेर के कुछ सरपंचों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, तो राजेंद्र राठौड़ ने मीणा से उनकी सपोटरा विधानसभा में हो रहे भ्रष्टाचार की भी जांच करवाने की बात कही. इस पर मीणा ने साल 2018 के पुराने आदेश निकाल कर सामने कर दिए, जिनमें अधिकारियों ने नागौर में भ्रष्टाचार मानते हुए जांच की बात लिखी थी. यहां आपको बता दें कि पिछली बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार में राजेन्द्र राठौड़ पंचायत राज मंत्री थे.

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वर्तमान गहलोत सरकार में पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि पिछली सरकार में पंचायती राज मंत्री रहते हुए राजेन्द्र राठौड़ ने उस समय खुद इस भ्रष्टाचार की रिपोर्ट को दबाया था. जिससे सवाल खड़ा होता है कि जो व्यक्ति खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रहा है, उसे दूसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाने चाहिए. इसके साथ ही रमेश मीणा ने फ़िल्मी डायलॉग बोलते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वह दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते. राठौड़ साहब ज्यादा ‘पराक्रमनहीं दिखाएं, नहीं तो सारी पोल खुल जाएगी और फिर बात बहुत दूर तक जाएगी. यहां आपको यह भी बता दें कि राजेन्द्र राठौड़ के बेटे का नाम भी पराक्रम राठौड़ है जो कि सत्ताकाल के दौरान अपने पिता से ज्यादा एक्टिव रहते हैं, ऐसे में कुछ सुधिजन यहां रमेश मीणा के कटाक्ष को पराक्रम राठौड़ से जोड़कर देख रहे हैं.

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रमेश मीणा ने जुबानी हमला जारी रखते हुए आगे कहा कि हमारे प्रतिपक्ष के उपनेता जो इस विभाग के मंत्री भी रहे और इतने सीनियर होने के बावजूद उनके पास जानकारी नहीं रहती. केवल छपास के रोग के चलते चर्चा में रहने के लिए उन्होंने मेरी विधानसभा में जांच करने के लिए कहा. लेकिन उनको पता होना चाहिए कि मेरी दोनों पंचायत समिति सपोटरा और मंडरायल की जांच हुई और जिस एजेंसी की वह बात कर रहे हैं. उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है. वहां के अधिकारी आज भी सस्पेंड हैं, लेकिन वह इस बात का जवाब दें कि साल 2018 में उन्होंने क्यों तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट की उस रिपोर्ट को दबाया था, जिसमें नागौर में भ्रष्टाचार को लेकर कार्रवाई की बात कही थी.

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इसके साथ ही हाल ही में राजधानी में हुए सरपंचों के आंदोलन को लेकर मंत्री रमेश मीणा ने साफ किया कि सरकार सरपंचों की वाजिब मांगें मान चुकी है. मीणा ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि इलेक्शन जीत कर आने गांव के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सरपंचों की जायज मांगों का निस्तारण किया जाए, सरकार ने ऐसा किया भी है. लेकिन कुछ पूर्व सरपंच या फिर सरपंच पति अनियमितता भी करते हैं और दबंगई के जरिए सरकार को झुकाना भी चाहते हैं. लेकिन सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है. अगर पात्र व्यक्ति के घर तक विकास की योजना पहुंचाने में कोई रोड़ा अटकायेगा तो सरकार पीछे नहीं हटेगी. इसके साथ ही मंत्री रमेश मीणा ने आगे कहा कि कुछ लोग प्रायोजित तरीके से पंचायती राज विभाग पर दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन दबाव से न तो हम डरने वाले हैं ना ही हमारी सरकार.

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