डबल लॉक से प्रश्नपत्र चोरी हुआ और चाबी का डाकू अभी भी भाग रहा है- BJP ने घेरा गहलोत सरकार को

पेपरलीक मामलों को लेकर बीजेपी का हंगामा, गुलाबचंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ ने सदन में सवाल उठाए, तो वहीं विधानसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए शांति धारीवाल ने मामला सीबीआई को सौंपने से साफ इंकार करते हुए कहा कि अगर यह केस सीबीआई को सौंपा गया तो सालों तक तो इन्वेस्टिगेशन ही चलती रहेगी, विद्यार्थियों का भविष्य हो जाएगा खराब

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Rajasthan Assembly Budget Session 2023-24 Paper Leak Case. प्रदेश में साल के अंत मे होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भर्ती परिक्षाओं के पेपर लीक का मामला सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है. विपक्ष की तमाम पार्टियां पेपरलीक के मामलों में CBI जांच की मांग को सड़क से लेकर सदन तक गहलोत सरकार पर हमलावर है. सोमवार को शुरू हुए राजस्थान की 15वीं विधानसभा के आखिरी बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ही विपक्ष ने पेपरलीक मामलों की CBI जांच को लेकर गहलोत सरकार के खिलाफ जो हंगामा मचाया वो दूसरे दिन मंगलवार तक जारी रहा. बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पेपर लीक मामले को लेकर सदन में सवाल उठाए, तो वहीं विधानसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने पेपर लीक मामला सीबीआई को सौंपने से साफ इंकार करते हुए कह दिया कि अगर यह केस सीबीआई को सौंपा गया तो सालों तक तो इन्वेस्टिगेशन ही चलती रहेगी.

आपको बता दें कि विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन भर्ती परिक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर सदन में चर्चा करते हुए सबसे पहले उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कांस्टेबल, वनरक्षक और सेकंड ग्रेड टीचर की परीक्षाओं में हुए पेपर लीक को लेकर सरकार पर सवाल उठाया. राठौड़ ने कहा कि ये परीक्षा उस समय हुई जब एंटी चीटिंग बिल प्रभावी हो चुका था, लेकिन कार्रवाई इस बिल के तहत नहीं की गई. राठौड़ ने सवाल उठाया कि आरोपियों की जमीन पर अटैक क्यों नहीं किया गया? क्यों बिल की धाराओं के तहत जुर्माना नहीं लगाया गया? क्यों एंटी चीटिंग बिल के तहत चालान पेश नहीं किया? यह तमाम सवाल हैं, जिनका जवाब सरकार की तरफ से नहीं दिया जा रहा है. राठौड़ ने कहा कि रीट पेपर लीक में कई बड़े नाम सामने आए, जिन्हें दोषी मानते गिरफ्तार किया गया था. लेकिन बाद में उन्हें बहाल कर दिया और क्लीन चिट भी दे दी गई. राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि दुर्भाग्य की बात का है कि डबल लॉक से प्रश्नपत्र चोरी होता है, इसके बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं होती. ये तो जादूगरी हो गई.

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वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने गहलोत सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा संकुल से जो पेपर आउट हुआ वो डबल लॉक में था. डबल लॉक से पेपर आउट हो गया और डबल लॉक की चाबी वाले को दोषी नहीं बनाया गया. कटारिया ने कहा कि ये व्यवस्था कैसे सुधरेगी? कौन इसको सुधरेगा? कटारिया ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि एक कमेटी बनाएं ताकि बच्चों को न्याय मिल सके. कटारिया ने आगे सवाल उठाते हुए कहा कि पेपर लीक में जितने भी आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उन सभी को जमानत मिल चुकी है. डबल लॉक की चाबी का डाकू अभी भी भाग रहा है, पुलिस अभी तक उसे नहीं पकड़ पाई है.

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विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार की तरफ से जब संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल जवाब देने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष ने उनके जवाब से पहले ही जमकर हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच धारीवाल कोई जवाब नहीं दे पाए. हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने चर्चा को समाप्त करते हुए सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.

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इसके बाद जब सदन की कार्यवाही दुबारा शुरू हुई तो शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए कहा कि अगर पेपरलीक मामलों की जांच CBI को दे देंगे तो सीबीआई पूरे दस्तावेज जब्त कर के ले जाएगी और परीक्षाएं 15 साल तक नहीं हो पाएंगी. अगर यह केस सीबीआई को सौंपा गया तो विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो जाएगा. इस मामले को प्रदेश में प्रतिदिन मॉनिटर किया जा रहा है. सरकार दोषियों को सख्त सजा दिलवाएगी, यह हमारा कमिटमेंट है. इसलिए आपको सीबीआई जांच की मांग की जिद छोड़नी चाहिए, मैं इस मांग को खारिज करता हूं.

मंत्री शांति धारीवाल ने आगे कहा कि हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में यह सवाल लगाया था कि 10 साल में कितने केस राजस्थान से सीबीआई को सौंपे गए तो जवाब यह मिला था कि 12 केस थे, जिनमें से सीबीआई ने 2 केस दर्ज नहीं किए 7 में क्लोजर रिपोर्ट दे दी. एक को दोषमुक्त कर दिया और दो मामले अभी इन्वेस्टिगेशन में चल रहे हैं. धारीवाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने भी एक बार कहा था कि अगर शिवानी जडेजा का मामला हम सीबीआई को नहीं सौपते तो शायद अपराधियों पर हमारी पुलिस बेहतर काम कर सकती थी. ऐसे में सीबीआई को यह केस सौंपना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.

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शांति धारीवाल ने कहा कि राजेंद्र राठौड़ और कालीचरण सराफ ने आरोप लगाए हैं लेकिन कोई भी लिख कर देने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि अपराधियों पर सरकार ने कार्रवाई की है. जब बिल 1 जुलाई को पास हुआ, तो इतनी जल्दी कार्रवाई कैसे हो सकती थी और वैसे भी सजा देने का काम न्यायालय का है पुलिस का काम चालान पेश करने का है, जो किया जा चुका है. धारीवाल ने कहा कि लॉ डिपार्टमेंट की ओर से आदेश हो चुका है कि जिस कोर्ट में यह केस जाएंगे वह अपने आप ही डेजिग्नेटिड कोर्ट बन जाएगा.

नकल रोकने के लिए गहलोत सरकार द्वारा बनाए गए कानून को लेकर शांति धारीवाल ने कहा कि राजस्थान में जितना कठोर कानून बनाया गया है, वैसा देश के दूसरे किसी राज्य में नहीं है. धारीवाल ने कहा कि इस अपराध में लिप्त अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ही, कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया और उनके अवैध प्रतिष्ठानों को धवस्त भी किया गया. धारीवाल ने कहा कि राजस्थान सरकार कृत संकल्प होकर काम कर रही है. जहां पहले कानून में एक थानेदार कल के मामलों की जांच करता था, हमने ऐसे मामलों में मिनिमल एडिशनल एसपी को तफ्तीश का नियम बना दिया है.

मंत्री शांति धारीवाल ने आगे कहा कि आज विधानसभा में आरोप लगाए गए, आरोप लगाना आसान है यह आरोप बाहर लगा कर देखो आपको पता लग जाएगा. अगर किसी के पास किसी मंत्री के खिलाफ, किसी अधिकारी के खिलाफ या किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई सबूत है तो हमें दें, अदालत को दें या फिर पुलिस को दें, यहां विधानसभा में क्योंकि सदस्यों का बोलने का प्रिविलेज है लेकिन उस बोलने से काम नहीं चलता. हाईकोर्ट ने भी 7 जुलाई, 2022 को कहा था कि कोई सबूत है तो हम उसे सुनने को तैयार हैं, लेकिन सबूत कोई नहीं देना चाहता केवल आरोप लगाते हैं.

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शांति धारीवाल ने सदन में कहा कि बिल अप्रैल 2022 में पास हुआ. उसके बाद 7 प्रकरण इस एक्ट में दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 4 में चालान पेश हो चुका है. उन्होंने कहा कि रीट के आरोपी राम कृपाल मीणा आज भी जेल में है और जिन परीक्षाओं को पेपर लीक के चलते रद्द करना पड़ा, उनमें से पुस्तकालय ग्रेड थर्ड, कनिष्ठ अभियंताओं की परीक्षा, वनरक्षक परीक्षा हो चुकी है और अभी जो पेपर लीक हुआ उसकी परीक्षा भी 29 जनवरी 2023 को करवा ली जाएगी

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि पिछली सरकार के समय 10 पेपर लीक हुए थे, जिसमें 15 प्रकरण दर्ज हुए और 281 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. लेकिन पिछली सरकार को जिस गंभीरता से काम करना था उसने उस गंभीरता से काम नहीं किया. हमने नकल रोकने के लिए कदम उठाए और नकल का प्रयत्न करने वालों को भी अपराध की श्रेणी में डाला. संपत्ति की जब्ती का भी कानून रखा. धारीवाल ने कहा कि पहली बार 14 मार्च, 2022 को नकल विरोधी सेल का गठन किया गया और पुराने कानून में जो जमानती ऑफेंस थे, हमने हर उस अपराध को गैर-जमानती बनाया है.

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