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हरियाणा और राजस्थान के बाद महाराष्ट्र में राज्यसभा का रोचक हुआ घमासान, सपा-निर्दलीयों ने दी टेंशन

07 जून 2022
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हरियाणा और राजस्थान के बाद महाराष्ट्र में राज्यसभा का रोचक हुआ घमासान, सपा-निर्दलीयों ने दी टेंशन

Politalks.News/RajysabhaElection/Maharashtra. राजस्थान और हरियाणा के बाद अब महाराष्ट्र में भी राज्यसभा चुनाव के लिए लड़ाई और भी ज्यादा रोचक हो गई है. तीनों राज्यों के विधायक बाड़ेबंदी में कैद हैं. महाराष्ट्र में गठबंधन की नींव पर चल रही महाविकास अघाड़ी सरकार के लिए राज्यसभा चुनाव किसी जंग से कम नहीं है. पहले तो अन्य कई राज्यों की तरह ही महाराष्ट्र में मुकाबला सीधा सीधा दिख रहा था लेकिन अंत समय में पार्टी को समर्थन देने वाली सपा की नाराजगी ने मुश्किलें बड़ा दी हैं तो वहीं सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक भी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. इसी बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को मलाड स्थित एक रिसोर्ट … Read more

Politalks.News/RajysabhaElection/Maharashtra. राजस्थान और हरियाणा के बाद अब महाराष्ट्र में भी राज्यसभा चुनाव के लिए लड़ाई और भी ज्यादा रोचक हो गई है. तीनों राज्यों के विधायक बाड़ेबंदी में कैद हैं. महाराष्ट्र में गठबंधन की नींव पर चल रही महाविकास अघाड़ी सरकार के लिए राज्यसभा चुनाव किसी जंग से कम नहीं है. पहले तो अन्य कई राज्यों की तरह ही महाराष्ट्र में मुकाबला सीधा सीधा दिख रहा था लेकिन अंत समय में पार्टी को समर्थन देने वाली सपा की नाराजगी ने मुश्किलें बड़ा दी हैं तो वहीं सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक भी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. इसी बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को मलाड स्थित एक रिसोर्ट में ठहराया है. वहीं महाविकास अघाड़ी सरकार ने आज शाम एक बैठक बुलाई है. इस बैठक में सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के चुनाव प्रभारी और प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले शामिल होंगे. तो वहीं महाविकास अघाड़ी ने अपने 29 सहयोगियों को भी आमंत्रण भेजा है.

राज्यसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए महाविकास अघाड़ी सरकार मंगलवार को पार्टी विधायकों और सरकार को समर्थन देने वाले सभी सहयोगियों को न्योता दिया है. लेकिन बैठक से पहले ही सरकार के सहयोगी अपनी मांगों को लेकर आंखे दिखने लगे हैं. सरकार में सहयोगी समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को होने वाली बैठक बहिष्कार कर दिया है. सपा के दो विधायकों के वोट प्रदेश सरकार एक लिए काफी अहम् है. चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी ने सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिख उनपर अल्पसंख्यक समुदाय की मांगों को अनदेखा करने का आरोप लगाया था. आजमी ने अपने पत्र में लिखा था कि, ‘MVA के ढाई साल होने के बावजूद राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय की समस्याओं पर कोई कदम नहीं उठाया गया है. MVA सरकार सेक्युलर है, या फिर अघाड़ी का चेहरा नए हिंदुत्व का है, जिसकी बात उद्धव ठाकरे जी आज कल बार-बार कर रहे हैं.’

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वहीं सरकार का साथ दे रहे निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार के सामने परेशानी खड़ी कर राखी है. निर्दलीय विधायक अलग-अलग मंचों पर सरकार के कामों में खामियां निकालते रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा की नजर इन निर्दलियों पर है क्योंकि अगर ये उनके साथ चले जाते हैं तो फिर सरकार की फजीती होने से कोई नहीं रोक सकता. सूत्रों के अनुसार सोमवार को विपक्ष के नेता एवं सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ निर्दलीय विधायकों से मुलाकात भी की थी तो वहीं कुछ विधायक उनके संपर्क में भी है. हालांकि MVA सरकार ने निर्दलीय विधायकों को भी बैठक का निमंत्रण भेजा है लेकिन कौनसा विधायक सरकार के साथ है ये तो बैठक के बाद ही साफ़ हो पायेगा.

महाराष्ट्र राजयसभा चुनाव के रण में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी के चार और बीजेपी के तीन उम्मीदवार मैदान में है. शिवसेना की ओर से संजय राउत और संजय पवार उम्मीदवार हैं जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने प्रफुल्ल पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस ने इमरान प्रतापगढ़ी को टिकट दिया है. बात करें भाजपा की तो केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अनिल बोंडे और धनंजय महाडीक को मैदान में उतरा गया है. महाराष्ट्र से राज्यसभा की छठी सीट के लिए अब शिवसेना और भाजपा के बीच मुकाबला होगा. छठी सीट जितने के लिए जहां शिवसेना को 15 वोट चाहिए तो वहीं बीजेपी को 13.

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विधानसभा सदस्यों की अगर बात की जाए तो 288 सदस्यीय विधानसभा में 287 विधायक हैं. शिवसेना, एनसीपी-कांग्रेस महाविकास अघाड़ी के 152 सदस्य हैं, जबकि विपक्षी बेंच पर बैठी बीजेपी के 106 सदस्य हैं. यहां जीत की चाबी 29 विधायकों के हाथ में हैं, इनमें 13 निर्दलीय हैं और 16 विधायक छोटे दलों से आते हैं. दोनों ही पार्टियां अपने अपने तरीके से इन विधायकों को अपनी ओर लाने का प्रयास कर रहीं हैं. राजनीतिक जानकारों की माने तो कइयों को केंद्रीय जांच एजेंसी का भी डर दिखाया जा रहा है. संख्या बल के आधार पर शिवसेना, कांग्रेस और NCP का एक एक उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा तो वहीं बीजेपी के दो उम्मीदवार आसानी से चुन लिए जाएंगे. ऐसे में बचे छठे प्रत्याशी के लिए घमासान होना तय है. यही कारण है कि सरकार और विपक्ष की नजर निर्दलीय और छोटे विधयकों पर टिकी है.

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