rajasthan election
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Rajasthan Election: राजस्थान की 199 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव अब अंतिम पड़ाव पर है. मतदान 25 नवंबर को है और 3 दिसंबर को मतगणना होनी है. राजधानी जयपुर के अंतर्गत आने वाली 19 विधानसभा सीटें हमेशा से काफी अहम रहती है लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले बदले से दिखाई दे रहे हैं. यहां मुकाबला प्रमुख दल के उम्मीदवारों के साथ साथ कुछ अन्य प्रत्याशियों के बीच भी है जिसके चलते मुकाबला त्रिकोणीय से भी ज्यादा पेचीदा हो गया है. यहां बागी व मजबूत निर्दलीय मैदान में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों का जीत व हार का गणित बिगाड़ सकते हैं. राजधानी की 10 सबसे प्रमुख सीटों में से 3 सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबला बनता दिख रहा है. इसके चलते परिणाम किसी भी तरफ जा सकता है.

झोटवाड़ा विस: जयपुर की सबसे बड़ी विधानसभा

शहर की सबसे चर्चित और हॉट सीट झोटवाड़ा विधानसभा है. यहां बीजेपी की ओर से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और कांग्रेस की ओर से युवा नेता अभिषेक चौधरी मैदान में है. बीजेपी के बागी आशु सिंह सुरपुरा भी निर्दलीय मैदान में है जो निश्चित तौर पर बीजेपी को नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे क्योंकि राजपूत वोटों का बंटवारा होना तय है. इससे राज्यवर्धन का चुनावी गणित बिगड़ना तय है.

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चूंकि ये इलाका जाट एवं यादव बाहुल्य है इसलिए वोट बैंक को टार्गेट करते हुए कांग्रेस ने अभिषेक चौधरी पर दांव खेला है. भारत नव निर्माण पार्टी के संयोजक दीनदयाल जाखड़ भी मैदान में है जिन्होंने एक समाजसेवी बनकर ​इलाके में पैठ बनायी है. जाखड़ कालख बांध आंदोलन को लेकर खासे सुर्खियों में रहे. ऐसे में ये मुकाबला इन चारों में से किसी के भी पक्ष में जा सकता है.

सिविल लाइंस: बीजेपी के बागी बिगाड़ेंगे खेल

सिविल लाइंस इस बार सबसे हॉट सीटों में शामिल है. यहां से संघ परिवार ने बीजेपी की ओर से पत्रकार एवं हिंदू चेहरा गोपाल शर्मा को मैदान में उतारा है. यहां कांग्रेस से मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास है. यहां पर इन दोनों ही नेताओं के लिए जीत आसान नहीं है. वजह है कि सिविल लाइंस से बीजेपी के बागी एवं रावणा राजपूत समाज से रणजीतसिंह सोड़ाला और गोविंद अग्रवाल ने ताल ठोकी है. पूर्व प्रत्याशी अरुण चतुर्वेदी को इस बार कहीं से टिकट नहीं मिला है जिसकी वजह से यह सीट बीजेपी के लिए गले की फांस बन गयी है. ऐसे में बीजेपी के वोटों में सेंधमारी पक्की लग रही है. इधर, मेयर मुनेश गुर्जर व अन्य कई पार्षद अंदरखाने खाचरियावास की खिलाफत कर रहे हैं. वहीं राजपूत करणी सेना से जुड़ी कीर्ति राठौड़ निर्दलीय मैदान में है. ऐसे में राजपूत एवं गुर्जर वोटों का बंटवारा होते दिख रहा है.

बस्सी: निर्दलीयों का किला, कांग्रेस-बीजेपी जीत से दूर

बस्सी विधानसभा सीट का इतिहास मजेदार रहा है. मीणा-सामान्य बाहुल्य इस सीट पर निर्दलीयों का दबदबा है. इस बार भी मुकाबला रोचक रहने वाला है. ऐसा इसलिए भी है कि क्योंकि पिछले तीन चुनावों से यहां कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार हार रहे हैं. 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव अंजू धानका ने निर्दलीय जीता. साल 2018 में लक्ष्मण मीणा ने कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ा और 42 हजार वोटों के अंतर से जीता. इस बार कांग्रेस ने पूर्व आईपीएस लक्ष्मण मीणा और बीजेपी ने पूर्व आईएएस चंद्रमोहन मीणा पर दांव खेला है. इधर, बीजेपी से टिकट का दावा करने वाले बीजेपी एसटी मोर्चे के अध्यक्ष जितेंद्र मीणा ने नाराज होकर निर्दलीय ताल ठोक दी है. वहीं दो बार निर्दलीय जीत दर्ज करने वाली अंजू धानका ने एक बार फिर से चुनावी मैदान में कूदकर मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है.

आदर्श नगर व शाहपुरा में निर्दलीय बिगाडेंगे गणित

आदर्श नगर में चार बार के पार्षद उमरदराज ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है. इससे मौजूदा कांग्रेस विधायक रफीक खान की नींद उड़ गयी है. उमरदराज पिछले 6 माह से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन कांग्रेस ने टिकट रफीक खान को थमाया. इससे नाराज होकर उन्होंने आप पार्टी में शामिल होकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया. बीजेपी ने इस बार अशोक परनामी का टिकट काट रवि नययर को दिया है. हालांकि मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर मुख्य मुकाबला नययर और रफीक खान के बीच ही लग रहा है.

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इधर, बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव को बीजेपी ने शाहपुरा से टिकट दिया है. जाट-यादव बाहुल्य इस सीट पर कांग्रेस के मनीष यादव मैदान में है. उपेन के होने से यादव वोटों में बिखराव तय है. युवाओं का साथ उपेन को मिलेगा. वहीं मौजूदा निर्दलीय विधायक आलोक बेनीवाल एक बार फिर से ताल ठोक रहे हैं. बेनीवाल की स्थानीय तौर पर लोगों में अच्छी पैठ है. पिछली बार भी कांग्रेस से टिकट कटने के बाद बेनीवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी. इस बार वे फिर से कांग्रेस की ओर से टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन टिकट मनीष यादव को मिला. ऐसे में बेनीवाल दोनों पार्टियों का खेल बिगाड़ने के लिए एक बार फिर से तैयार हैं.

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