ERCP पर आमने-सामने, केंद्र बोला काम रोकें, गहलोत बोले- पैसा और पानी हमारा, आप कौन रोकने वाले?

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3 Jul 2022
Politalks.News/Rajasthan/ERCP. अगले साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रही प्रदेश के 13 जिलों में पेयजल और सिंचाई के पानी की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को लेकर मोदी सरकार और गहलोत अब आमने सामने होती नजर आ रही है. केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के सचिव ने मुख्य सचिव को चिट्ठी भेजकर गहलोत सरकार द्वारा शुरू किए गए ईआरसीपी के काम रोकने को कहा है. इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की मोदी सरकार के साथसाथ जोधपुर सांसद और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भी निशाने पर लिया है. सीएम गहलोत ने कहा कि केंद्रीय केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का काम रोकने के लिए कहा है, लेकिन राज्य सरकार इस परियोजना को चालू रखेगी. राजस्थान के 13 जिलों की जनता देख रही है कि उनके हक का पानी रोकने के लिए केंद्र की भाजपा कैसे रोड़े अटका रही है. प्रदेश सरकार ERCP को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. आपको बता दें, सालों से अटके पड़े ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट के लिए गहलोत सरकार ने इसी साल बजट में 9600 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है. इस योजना के लिए एक डैम बनाने का काम भी शुरू हो चुका है. केंद्र सरकार की इस चिट्ठी के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को निशाने पर लिया. सीएम अशोक गहलोत ने कहा- केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ( ERCP) का काम रोकने के लिए कहा है. हमारी सरकार ने ERCP के लिए 9,600 का बजट राज्य कोष (स्टेट फंड) से जारी किया है. सीएम गहलोत ने कहा कि जब इस प्रोजेक्ट में अभी तक राज्य का पैसा लग रहा है और पानी हमारे हिस्से का है तो केद्र सरकार हमें ERCP का काम रोकने के लिए कैसे कह सकती है? यह भी पढ़ें: क्या वाकई राहुल गांधी ने कन्हैया के हत्यारों को ‘बच्चा’ कहा? जयराम ने नड्डा को पत्र लिख की माफी की मांग सीएम गहलोत ने आगे कहा कि संविधान के अनुसार जल राज्य का विषय है, केंद्र द्वारा रोडे़ अटकाना अनैतिक है. इस परियोजना की डीपीआर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय स्टेट कंट्रोल बोर्ड की साल 2005 में हुई बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार तैयार की गई है. जिसके अनुसार ‘राज्य किसी परियोजना के लिए अपने राज्य के कैचमेंट से प्राप्त पानी और दूसरे राज्य के कैचमेंट से प्राप्त पानी का 10 प्रतिशत प्रयोग इस शर्त के साथ कर सकते हैं- ‘यदि परियोजना में आने वाले बांध और बैराज का डूब क्षेत्र दूसरे राज्य की सीमा में नहीं आता हो तो ऐसे मामलों में अन्य राज्य की सहमति आवश्यक नहीं है. यह भी पढ़े: लोकतंत्र का वस्त्रहरण करके महाराष्ट्र में कराए गए इस राजनीतिक ड्रामे के अभी कई भाग हैं बाकी- सामना वहीं मध्यप्रदेश की आपत्ति को निराधार बताते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश ने पार्वती नदी की सहायक नदी नेवज पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध बनाए. जिनसे मध्यप्रदेश में लगभग 2.65 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ है. इनकी अनापत्ति मध्यप्रदेश ने बांधों के निर्माण के बाद साल 2017 में ली गई थी. मध्यप्रदेश की ईआरसीपी पर आपत्ति निराधार है. मध्यप्रदेश ने 2005 की बैठक के फैसले के अनुसार ही अपनी परियोजना बना ली और जब राजस्थान की बारी आई तो रोडे़ अटकाने का काम किया. इसकी डीपीआर अंतरराज्यीय स्टेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक के फैसले और केन्द्रीय जल आयोग की वर्ष 2010 की गाइडलाइन के अनुसार तैयार की गई है.