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दिल्ली से आने के बाद CM गहलोत का आचरण ऐसा है, जैसे चोर है सामान समेटने की फिराक में- भाजपा

03 अक्टूबर 2022
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दिल्ली से आने के बाद CM गहलोत का आचरण ऐसा है, जैसे चोर है सामान समेटने की फिराक में- भाजपा

Politlaks.News/Rajasthan. हाल ही में राजस्थान कांग्रेस में हुए सियासी घमासान ने सभी को चकित कर दिया. लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य करने वाली बात जो है वो है प्रदेश में भारी भरकम सियासी ड्रामे के बाद एकदम से छाई सियासी शांति. राजनीति के कुछ जानकर जहां इसे तूफ़ान से पहले की शांति बता रहे हैं तो वहीं कुछ कह रहे हैं कि आलाकमान ने इस मुद्दे को फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया है. लेकिन अब इस मामले को लेकर बीजेपी पूरी तरह एक्टिव मोड़ में आती नजर आ रही है. प्रदेश में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट के विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को भेजे … Read more

Politlaks.News/Rajasthan. हाल ही में राजस्थान कांग्रेस में हुए सियासी घमासान ने सभी को चकित कर दिया. लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य करने वाली बात जो है वो है प्रदेश में भारी भरकम सियासी ड्रामे के बाद एकदम से छाई सियासी शांति. राजनीति के कुछ जानकर जहां इसे तूफ़ान से पहले की शांति बता रहे हैं तो वहीं कुछ कह रहे हैं कि आलाकमान ने इस मुद्दे को फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया है. लेकिन अब इस मामले को लेकर बीजेपी पूरी तरह एक्टिव मोड़ में आती नजर आ रही है. प्रदेश में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट के विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए इस्तीफों को लेकर जल्द ही बीजेपी नेता राज्यपाल से मुलाकात करने वाले हैं. बीजेपी ने कहा कि, ‘प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में आ चुकी है. ऐसे में हम मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार हैं.’

आपको याद दिला दें, बीती 25 सितंबर रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के करीब 92 विधायकों ने आलाकमान के खिलाफ कथित बगावत का बिगुल फूंकते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. प्रदेश में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलों के चलते विधायकों ने अपना इस्तीफा दिया था लेकिन उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से स्वीकार नहीं किए गए हैं. ऐसी स्थिति में बीजेपी कांग्रेस विधायकों के इस्तीफों को स्वीकार करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी पर दबाव बनाने की तैयारी कर रही है. यही नहीं बीजेपी ने साफ़ किया इन इस्तीफों को लेकर पार्टी नेता जल्द ही महामहिम राज्यपाल से मुलाकात करेंगे. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि, ‘विधायकों ने इस्तीफे दे दिए, इसमें भी बड़ा विरोधाभास है. इस्तीफे दे दिए तो उन्हें स्वीकार करना चाहिए.’

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इस्तीफा देने वाले विधायकों पर निशाना साधते हुए पूनियां ने कहा कि, ‘उन विधायकों की कोई ना कोई मंशा जरूर रही होगी इसी कारण उन्होंने इस्तीफा दिया. अच्छी, भली-बुरी, राजनीतिक या जो भी व्यक्तिगत तौर पर हो, लेकिन मंशा तो थी. ऐसे में सबसे बड़ी ताज्जुब की बात है कि कांग्रेस के मंत्री दफ्तरों को भी एंटरटेन कर रहे हैं, बंगलों में भी काबिज हैं, उन्हें सुरक्षा भी मिली हुई है, सरकारी गाड़ियां भी तोड़ रहे हैं, तबादलों की सूचियां भी जारी कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये कौन सा इस्तीफा है. सरकार या तो बताए कि यह पाखण्ड है, अगर हकीकत है तो स्पीकर से इस बात के लिए अपील करनी चाहिए कि वह उनके इस्तीफे मंजूर करें.’ वहीं मध्यावधि चुनाव का जिक्र करते हुए पूनियां ने कहा कि, ‘साल 2018 में जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार की बनी थी तभी से बीजेपी मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है.’

सतीश पूनियां ने आगे कहा कि, ‘इस सरकार को जल्दी चले जाना चाहिए था, जितनी देरी हुई उतना ही राजस्थान का अहित हुआ है. किसानों से वादाखिलाफी की गई, बेरोजगारों का अहित हुआ, उनके सपने तोड़े. अपराध के आंकड़ों ने खासकर महिलाओं को शर्मसार किया है. करप्शन के हालात ये हैं कि जीरो टोलरेंस की बात करने वाली सरकार इस वक्त भ्रष्टाचार में अपने चरम पर है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दिल्ली से आने के बाद का ये आचरण ऐसा है जैसे चोर सामान समेटने की फिराक में रहता है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खेल भी अभी दिख रहे हैं. समिट भी अभी दिख रहा है और उदारता भी अभी दिख रही है, इसका मतलब है कि वो जा रहे हैं.’

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वहीं विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि, ‘विधायकों के सामूहिक इस्तीफे के बाद विधानसभाध्यक्ष सीपी जोशी को उन्हें मंजूर करना चाहिए. जब 90 फीसदी विधायक और मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है, तो मुख्यमंत्री आपात बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करने की घोषणा करें, क्योंकि इस्तीफा देने के बाद से ही सरकार अल्पमत में मानी जा रही है. ऐसे में अब गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है. कांग्रेस विधायकों ने खुद उनके आवास पर उपस्थित होकर अपने त्यागपत्र सौंपे. विधानसभा के नियम और प्रक्रियाओं में साफ लिखा है कि अगर खुद विधानसभा सदस्य मौजूद रहकर परफॉर्मा में त्याग-पत्र देता है, तो विधानसभाध्यक्ष को उसे स्वीकार करना चाहिए. इस्तीफों के बावजूद मंत्री-विधायक तबादलों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों में लगे हुए हैं, जो उचित नहीं है. हम विधानसभा अध्यक्ष से मांग करेंगे कि इस मामले में निर्णय करें.

दिग्गज बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि, ‘जिस दिन विधानसभाध्यक्ष अपने कर्तव्य के मुताबिक उन इस्तीफों को स्वीकार करेंगे, उसके बाद BJP किसी फैसले के लिए आगे बढ़ेगी. यही नहीं जल्द BJP राज्यपाल से मुलाकात कर कांग्रेस विधायकों पर कार्रवाई की मांग भी करेगी. हम सही समय आने पर अपने पत्ते खोलेंगे. फिलहाल हम कांग्रेस के भीतर चल रहे विरोध और खेल को देख रहे हैं. लेकिन दुर्भाग्य की बात है- राजस्थान की जनता ने यह सोचकर कांग्रेस को शासन नहीं दिया था कि इस तरह की सिर फुटव्वल होगी.’ वहीं पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि, ‘कांग्रेस सरकार इस समय अल्पमत में है. विधानसभाध्यक्ष को संविधानिक रूप से इस्तीफे स्वीकार कर लेने चाहिए क्योंकि इन इस्तीफों को स्वीकार करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं रह गया है.’

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देवनानी ने आगे कहा कि, ‘मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तुरंत त्यागपत्र देकर मध्यावधि चुनाव के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहिए. जिससे जनता की आकांक्षाओं के मुताबिक नई सरकार बन सके. जनता मौजूदा समय में जंगल राज को भुगत रही है. बीजेपी मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है. कांग्रेस का विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होगा और तीन-चौथाई बहुमत से बीजेपी की सरकार बनेगी. जनता बड़ी उम्मीदों से बीजेपी की ओर देख रही है.’

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