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लोकलुभावन और लोक कल्याण में अंतर को समझ देश के समग्र विकास की तरफ ध्यान दे केंद्र- बेनीवाल

14 दिसंबर 2022
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लोकलुभावन और लोक कल्याण में अंतर को समझ देश के समग्र विकास की तरफ ध्यान दे केंद्र- बेनीवाल

Hanuman Beniwal in Parliament. संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में मंगलवार को 2022-23 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगो के प्रथम बैच और 2019-2020 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगो पर हुई चर्चा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कृषि, उर्वरक, महंगाई, बेरोजगारी और अग्निपथ जैसे कई अहम मुद्दो पर अपनी बात रखी और मोदी सरकार को चेताया. सांसद बेनीवाल ने कहा की किसी भी देश की प्रगति को उसके द्वारा समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी जनता के लिए चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सफलता से आंका जाता है, लेकिन केंद्र सरकार इस मामले में बहुत … Read more

Hanuman Beniwal in Parliament. संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में मंगलवार को 2022-23 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगो के प्रथम बैच और 2019-2020 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगो पर हुई चर्चा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कृषि, उर्वरक, महंगाई, बेरोजगारी और अग्निपथ जैसे कई अहम मुद्दो पर अपनी बात रखी और मोदी सरकार को चेताया. सांसद बेनीवाल ने कहा की किसी भी देश की प्रगति को उसके द्वारा समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी जनता के लिए चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सफलता से आंका जाता है, लेकिन केंद्र सरकार इस मामले में बहुत पिछड़ गई है क्योंकी पिछले तीन वर्षों के अंदर मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली जन कल्याणकारी योजनाओं में से 50 प्रतिशत से अधिक को बंद कर दिया गया हैं और कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए साल-दर-साल दी जाने वाली वित्तीय धनराशि में लगातार कमी कर दी गई है. इस दौरान बेनीवाल ने महिला एवम बाल विकास, पशुपालन और डेयरी,कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा बंद कर दी गई कई योजनाओं का उदाहरण भी दिया.

वहीं उर्वरक और मनरेगा को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में उर्वरकों कि कमी से किसानो के सामने उत्पन्न संकट का जिक्र करते हुए आंकड़ों को सदन के पटल पर रखा. सांसद बेनीवाल ने कहा की विगत कुछ वर्षों में उर्वरक सब्सिडी में भी लगातार कमी की जा रही है वहीं सांसद ने कहा की अकेले सरकारी योजनाओं की संख्या ही नहीं घटी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के रोजगार के लिए चलाई गई योजनाओं के लिए आवंटित धनराशि में लगातार कमी की जा रही है. बेनीवाल ने मनरेगा का उदाहरण देते हुए कहा की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिए वित्त वर्ष 2022-23 में आवंटन राशि 73 हज़ार करोड़ थी, यह पिछले साल के आवंटन के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत कम है.

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इसके साथ ही देश में लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा 2014 में जब एनडीए की सरकार बनी उसकी तुलना में आज के क्रूड ऑयल की कीमतों से करे तो क्रूड ऑयल के कीमतों में भारी कमी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की दर बढ़ गई और रसोई गैस की दर बढ़ गई और इस वजह से महंगाई में लगातार बढ़ोतरी हुई बावजूद इसके सरकार ने महंगाई के नियंत्रण के लिए कोई ठोस उपाय नही किए.

किसानो की सम्पूर्ण कर्ज माफी करें सरकार
किसानों की आवाज बन चुके सांसद हनुमान बेनीवाल ने सदन में कहा की भारत की लगभग 69 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और उसकी आमदनी का प्रमुख जरिया खेती है. किसानों की आमदनी को दोगुना करने संबंधी समिति द्वारा 2017 में की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए बेनीवाल ने कहा की ग्रामीण आय या तो स्थिर है या कम हुई है वहीं 2012 और 2017 के बीच औसत किसान परिवार की मासिक आय 8,000 रुपए से भी कम थी और 7.5 प्रतिशत की महंगाई दर के मुकाबले आय की वार्षिक वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत थी, यानी आमदनी में होने वाली लगभग 80 प्रतिशत बढ़ोतरी खेती से जुड़े खर्चों में खप जाती थी, ऐसे में किसानों के लिए सुदृद्ध क्रेडिट व्यवस्था होना बहुत ज़रूरी है. लेकिन विडम्बना है की कृषि ऋण सरकारों के लिए एक चुनावी टूल बन कर रह गया है.

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सांसद हनुमान बेनीवाल ने आगे कहा कि राजस्थान सहित देश के कुल दस राज्यों ने अभी तक कृषि ऋण की कर्जमाफी का ऐलान किया है. बेनीवाल ने सदन आरबीआई द्वारा 13 सितंबर, 2019 को “रिपोर्ट ऑफ द इंटरनल वर्किंग ग्रुप टू रिव्यू एग्रीकल्चरल क्रेडिट ” पर जारी रिपोर्ट को पढ़ा और कहा आज जो नेता भारत जोड़ो यात्रा लेकर निकले हैं उन्होंने दस दिनों में राजस्थान के किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी करने की बात कही थी, वो आज तक अपना वादा पूरा नहीं कर पाए.

आपको बता दें, सोमवार के बाद लगातार मंगलवार को फिर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में अग्निपथ का मुद्दा उठाया और कहा की सेना में संविदा भर्ती के ऐसे निर्णय को सरकार को वापिस लेने की जरूरत है.

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