राजस्थान की राजनीति में नहीं हो सकता कोई परसराम मदेरणा जैसा नेता- दिव्या के निशाने पर दिग्गज

परसराम मदेरणा ने अपने सार्वजनिक मंच से एक स्पीच दी थी, जिसमें कहा था कि ऊपर भगवान और धरती पर यदि किसी को वो मानते हैं तो वो कांग्रेस अध्यक्ष, शांति धारीवाल और महेश जोशी अनुशासनहीनता के उदहारण, जब एक पंक्ति का संकल्प आपके अनुकूल हो तो आलाकमान का निर्णय स्वीकार्य है और जब यह आपके अनुरूप नहीं, तो आप करते हैं विद्रोह- दिव्या मदेरणा

मदेरणा के निशाने पर जोशी और धारीवाल
मदेरणा के निशाने पर जोशी और धारीवाल

Politalks.News/Rajasthan. कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए शुरू होने वाली नामांकन की तैयारियों के बीच राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर भारी सियासी बवाल मच गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन भरने की स्थिति में प्रदेश की कमान सचिन पायलट को सौंपने के आलाकमान के फैसले का गहलोत गुट के विधायकों ने विरोध करते हुए अपने इस्तीफे स्पीकर को सौंप दिए. वहीं इस नाटकीय घटनाक्रम की पूरी जानकारी प्रदेश प्रभारी अजय माकन और राजस्थान के आब्जर्वर के रूप में नियुक्त किए गए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को दे दी है. हाईकमान से मुलाकात के बाद माकन ने विरोध करने वाले विधायकों को अनुशासनहीन बताया तो मंत्री शांति धारीवाल ने उल्टा उन्हें भ्रष्ट और षड्यंत्रकारी बता दिया. अब धारीवाल के बयान पर ओसियां की तेजतर्रार विधायक दिव्या मदेरणा की भारी प्रतिक्रिया सामने आई है. दिव्या मदेरणा ने कहा कि, ‘जब एक पंक्ति का संकल्प आपके अनुकूल हो तो आलाकमान का निर्णय स्वीकार्य है और जब यह आपके अनुरूप नहीं है – आप विद्रोह करते हैं.’ वहीं दिव्या ने अपने दादा परसराम मदेरणा की याद दिलाते हुए कांग्रेस के दिग्गजों को लिया आड़े हाथ.

दरअसल, विधायक दल की बैठक का बायकॉट करने के साथ ही गहलोत समर्थक विधायकों द्वारा हाईकमान की ओर से भेजे गए दोनों ऑब्जर्वर मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन से मिलने से मना करते हुए विधायक दल की बैठक के पेरेलल एक अन्य बैठक बुलाने को अनुशासनहीनता माना जा रहा है. इसको लेकर अजय माकन और मल्लिकार्जुन ने सोमवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात का पुरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है. इस पर आलाकमान ने खड़गे और माकन से लिखित में पुरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है. तो वहीं दोनों नेताओं की सोनिया गांधी से हुई मुलाकात के बाद संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि, ‘2020 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के ऊपर जब संकट आया था तो हमारी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ये निर्देश दिए थे कि हर संभव कांग्रेस की सरकार को बचाना है. हम 34 दिन तक लगातार होटलों में रहे, लेकिन उन लोगों को जो मानेसर में इक्क्ठ्ठा हुए थे और 34 दिन तक सरकार गिराने का षड्यंत्र जिसने रचा था, आज उनको मुख्यमंत्री बनाने और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पद से हटाने का जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज मिशन लेकर आया था.’ मंत्री शांति धारीवाल के इस बयान की कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने निंदा की है.

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ओसियां से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा कहा कि, ‘मैं शांति धारीवाल के बयान की निंदा करती हूं और मैं पुष्टि करती हूं कि ऑब्जर्वर कांग्रेस हाईकमान के नाम पर केवल एक लाइन प्रस्ताव पारित करता है और उसके बाद प्रत्येक विधायक से एक-एक करके उनकी भावनाओं को जानने के बाद हाईकमान को अवगत कराता है. आलाकमान और कांग्रेस संस्कृति के संबंध में पार्टी ने हमेशा एक पंक्ति प्रस्ताव पारित किया है. शांति धारीवाल संसदीय कार्य मंत्री के रूप में स्वयं सीएलपी बैठक का बहिष्कार करना अनुशासनहीन होने का सर्वोच्च उदाहरण है. यदि धारीवाल खुद को कांग्रेस के कट्टर वफादार होने का दावा करते हैं, तो उन्हें शालीनता से स्वीकार करना चाहिए था कि हाई-कमान अगले सीएम के रूप में किसे प्रस्तावित करेगा, भले ही नाम 19 विधायकों का हो या 102 विधायकों का. कांग्रेस का कोई वफादार इस तरह का व्यवहार नहीं करता.’

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यही नहीं विधायक दिव्या मदेरणा ने आगे जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि, ‘1998, 2008, 2018 में जब एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया गया तो यह सब अच्छा था क्योंकि यह आपके व्यक्तिगत हित के अनुकूल था. आज आपकी अपनी राजनीतिक असुरक्षा के कारण हमेशा के लिए स्वीकृत एक पंक्ति का संकल्प इतना अस्वीकार्य है और आप अभी भी खुद को पार्टी के वफादार कहते हैं. 1998 में परसराम मदेरणा और पूरे किसान समुदाय के अनुकूल था, 2008 में यह डॉ सीपी जोशी और पूरे ब्राह्मण समुदाय के अनुरूप था, 2018 में यह सचिन पायलट और पूरे गुर्जर समुदाय के अनुरूप नहीं था, ये सब एक पंक्ति के संकल्प से निकले निर्णय हैं लेकिन हर दशक में सभी ने इसे स्वीकार किया. लेकिन यह पिछले 22 वर्षों के लिए एक निश्चित खंड के अनुकूल है. यह पहली बार था कि एक पंक्ति का संकल्प कुछ विशेष वर्गों के लिए अपने राजनीतिक हित के लिए उपयुक्त था और उन्होंने विद्रोह कर दिया. जब यह आपके अनुकूल हो तो आलाकमान का निर्णय स्वीकार्य है और जब यह आपके अनुरूप नहीं है – आप विद्रोह करते हैं.’

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यही नहीं इससे पहले दिव्या मदेरणा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, परसराम मदेरणा ने अपने सार्वजनिक मंच से एक स्पीच दी थी, जिसमें कहा था कि ऊपर भगवान और धरती पर यदि किसी को वो मानते हैं तो वो कांग्रेस अध्यक्ष हैं. वो खुद उसी परिवार की विरासत को आगे ले जा रही हैं. पहले भी वो जब होटल में विधायकों के साथ जुटी थी, तब भी वहां अधिकृत विधायक दल की बैठक हो रही थी. उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली से तीन ऑब्जर्वर भेजे थे. कांग्रेस विधायक दल की बैठक यदि टिंबक्टू में भी हुई तो भी वो वहां पहुंचेंगी.’ दिव्या मदेरणा ने ट्विट कर साल 1998 की याद भी दिलाई. दिव्या ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘1998 में पीसीसी में एक लाइन का प्रस्ताव माइक पर परसराम मदेरणा ने ही बोलकर पारित कराया था कि “आलाकमान का निर्णय सबको मान्य होगा”. अधिकतम विधायक उनके पक्ष में थे लेकिन उन्होंने सबको बुलाकर सख्ती से कह दिया था विद्रोह का एक शब्द में किसी से नहीं सुनना चाहता हूँ.’ एक अन्य ट्वीट करते हुए मदेरणा ने लिखा कि, ‘परसराम मदेरणा जिस मिट्टी के बने थे वह मिट्टी आज के दौर में नहीं मिलती. उनके रग रग में ,खून में आत्मा में सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस और कांग्रेस आलाकमान के प्रति वफादारी थी ,आख़री साँस तक उफ़ नहीं किया. राजस्थान की राजनीति में कोई भी व्यक्ति परसराम मदेरणा नहीं हो सकता.’

दिव्या मदेरणा यही नहीं रुकी उन्होंने सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी पर भी जमकर निशाना साधा. महेश जोशी के बयान कि, ‘आलाकमान किसी को भी सीएम बना सकता है और नया सीएम भी बना सकता है या सीएम गहलोत को बरकरार रख सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री उन लोगों में से नहीं होना चाहिए जिन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावत की,’ पर पलटवार करते हुए दिव्या मदेरणा ने कहा कि, ‘यह सरासर अनुशासनहीनता है. महेश जोशी सोच रहे हैं कि वह कांग्रेस हाईकमान से ऊपर हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश देना कि क्या करें और क्या न करें. हाईकमान निश्चित रूप से जानता है कि कौन पार्टी को मजबूत या कमजोर करेगा. मुझे नहीं लगता कि दिल्ली के शीर्ष अधिकारियों को उनकी फर्जी सलाह की जरूरत है.’ वहीं, रविवार को शांतिलाल धारीवाल के आवास पर हुई बैठक पर विधायक ने कहा कि, ‘कांग्रेस की अधिकृत बैठक में नहीं आना और अलग मीटिंग करना अनुशासनहीनता को दर्शाता है. मंत्री महेश जोशी ने ही हमें सीएमआर पर बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया था, लेकिन खुद बैठक से नदारद रहे, जो अनुशासनहीनता है.’

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