गहलोत सरकार ने विश्वास मत भले ही हासिल कर लिया, लेकिन 6 महीने पहले भी गिराई जा सकती है सरकार

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15 Aug 2020
Politalks.News/Rajasthan. प्रदेश में पिछले लगभग 34 दिन से चल रहा सियासी घमासान आखिर खत्म गया. राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया है. सदन ने सरकार द्वारा लाए गए विश्वास मत प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया. विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने सदन द्वारा मंत्रिपरिषद में विश्वास व्यक्त करने का प्रस्ताव स्वीकार किए जाने की घोषणा की. इसके तुरन्त बाद ही सदन की कार्रवाई 21 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी दिया गया. इससे पहले भाजपा सदन में शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर नहीं आई. जबकि बीजेपी विधायक दल की गुरुवार को हुई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमति बनी थी और भाजपा ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया था, लेकिन बदली परिस्थितियों में वरिष्ठ नेताओं ने चर्चा के बाद प्लान बदल लिया. बताया जा रहा है कि भाजपा को कांग्रेस में सेंधमारी की पूरी उम्मीद थी, लेकिन सचिन पायलट सहित उनके खेमे के विधायकों के कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उपस्थित होने के बाद भाजपा की उम्मीद पर पानी फिर गया. वहीं गहलोत सरकार ने भीबसदन में विश्वास मत रखने का फैसला किया था, इसके चलते पार्टी ने प्लान बदल दिया. यह भी पढ़ें: ‘बीजेपी ने तय किया है राजस्थान में सरकार को गिरा कर रहेंगे और मैं भी तय कर चुका हूं कि गिरने नहीं दूंगा’- गहलोत शुक्रवार को गहलोत सरकार द्वारा सदन में विश्वास मत हासिल कर लेने के साथ ही एक लिहाज से देखा जाए तो अब कम से कम 6 महीनों के लिए सरकार से संकट टल गया है. दरअसल, अब 6 महीने तक सदन में विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है. चाहे सरकार खुद विश्वास प्रस्ताव लेकर आए या फिर विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए, दोनों ही स्थितियों में सदन में बहस और वोटिंग होती है. विधानसभा की अध्यक्षीय व्यवस्था के मुताबिक दोनों ही स्थितियों में 6 महीने तक वापस अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है. ऐसी स्थिति में कम से कम 6 महीनों के लिए सरकार को सुरक्षित कहा जा सकता है. वहीं गहलोत सरकार ने सदन में विश्वास मत भले ही हासिल कर लिया हो, लेकिन विपक्ष इसे कुछ दिनों की राहत बता रहा है. विपक्ष की ओर से आया यह बयान हालांकि राजनीतिक मायने ज्यादा रखता है, लेकिन एक स्थिति में संवैधानिक तौर पर भी सरकार पर 6 महीने से पहले दोबारा संकट खड़ा हो सकता है. दरअसल, अगर कोई दल या व्यक्ति राज्यपाल के समक्ष जाकर यह दावा करता है उसके पास सदन में बहुमत लायक संख्या है और सरकार अल्पमत में है तो राज्यपाल द्वारा 6 महीने से पहले भी सरकार को फ्लोर टेस्ट के लिए कहा जा सकता है. भाजपा को लगता है कि गहलोत और पायलट खेमे के बीच करवाई गई सुलह ज्यादा दिन नहीं चलेगी. दोनों के बीच मतभेद बहुत जल्द फिर से उभर कर सामने आएंगे. यही वजह है कि भाजपा विश्वास मत को केवल कुछ दिनों की राहत बताते हुए इसे सरकार के लिए चंद दिनों की संजीवनी बता रही है.