सर्बानंद सोनोवाल की जीवनी | Sarbananda Sonowal Biography in Hindi

sarbananda sonowal biography in hindi
25 Feb 2025
Sarbananda Sonowal Latest News – सर्बानंद सोनोवाल असम भाजपा के दिग्गज नेता है. अगर आज असम में भाजपा की सरकार है तो इसके पीछे सोनोवाल की भी महत्पूर्ण भूमिका रही है. एक समय ऐसा भी था जब पूर्वोत्तर में भाजपा का कोई जनाधार नहीं था. राज्य में या तो कांग्रेस या फिर स्थानीय पार्टियों का ही बर्चस्व हुआ करता था. पर स्थिति बदली और राज्य में भाजपा की सरकार बनी. सर्बानंद सोनोवाल असम के पहले एनडीए (भाजपा) के मुख्यमत्री भी है. वह मोदी सरकार के सभी कार्यकाल में मंत्री रह चुके है. सर्बानंद सोनोवाल बीजेपी के ऐसे नेता माने जाते है जिन्हे राज्य और केंद्र दोनों में बड़ी बड़ी जिम्मेदारी दी जाती रही है. अब यही कारण है की मोदी सरकार उन्हें हमेश महत्वपूर्ण पद देने में यकीन करते है. छात्र राजनीति से जीवन आरम्भ करने वाले बीजेपी के यह नेता आज भी कुंवारें ही है. उन्होंने विवाह नहीं किया है. इस लेख में हम आपको बीजपी के इस दिग्गज नेता, सांसद और मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल की जीवनी (Sarbananda Sonowal Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.

सर्बानंद सोनोवाल की जीवनी (Sarbananda Sonowal Biography in Hindi)

पूरा नाम सर्बानंद सोनोवाल
उम्र 62 साल
जन्म तारीख 31 अक्टूबर 1962
जन्म स्थान डिब्रूगढ़, असम
शिक्षा संचार और पत्रकारिता में स्नातक
कॉलेज गुवाहाटी विश्वविद्यालय
वर्तमान पद सांसद और मंत्री
व्यवसाय राजनीतिज्ञ, व्यापार
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
वैवाहिक स्थिति अविवाहित
पिता का नाम जिबेश्वर सोनोवाल
माता का नाम दिनेश्वरी सोनोवाल
पत्नी का नाम
बच्चे -
बेटें का नाम -
बेटी का नाम -
स्थाई पता 1 नंबर लक्खी नगर पथ, औनैती सखा शत्रु के पास, कचारीबारी, पी.ओ.-सीआर बिल्डिंग डिब्रूगढ़, असम
वर्तमान पता बंगला नंबर 23, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली
फोन नंबर (011) 21411844 , 21410656
ईमेल sarbanandasonowal[at]gmail[dot]com

सर्बानंद सोनोवाल का जन्म और परिवार (Sarbananda Sonowal Birth & Family)

सर्बानंद सोनोवाल का जन्म 31 अक्टूबर 1962 को असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित मुलुक गांव में एक असमिया हिंदू सोनोवाल परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम जिबेश्वर सोनोवाल तो उनकी माता का नाम दिनेश्वरी सोनोवाल है. सर्बानंद सोनोवाल ने विवाह नहीं किया है. अर्थात सर्बानंद सोनोवाल अविवाहित है. सर्बानंद सोनोवाल हिन्दू है. उनपर कोई भी आपराधिक मुकदमा कही भी नहीं है.

सर्बानंद सोनोवाल की शिक्षा (Sarbananda Sonowal Education)

सर्बानंद सोनोवाल की स्कूली शिक्षा डॉन बॉस्को हाई स्कूल, डिब्रूगढ़ से हुई है. उन्होंने डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले डिब्रूगढ़ हनुमानबक्स सूरजमल्ल कनोई कॉलेज से अंग्रेजी में बीए, ऑनर्स किया है और फिर बाद में उन्होंने डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से ही एलएलबी किया. इसके बाद उन्होंने 1996 में गौहाटी विश्वविद्यालय से बीसीजे (संचार और पत्रकारिता में स्नातक) की डिग्री भी लिया हैं.

सर्बानंद सोनोवाल का शुरूआती जीवन (Sarbananda Sonowal Early Life)

सर्बानंद सोनोवाल सामान्य परिवार से आते है और वह असम के आम जनता के बीच रहे है, शुरूआती दिनों में उन्होंने छात्र राजनीति में हिस्सा लिया और राज्य में अपनी एक अलग पहचान बना ली. वह वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 1999 तक असम के सबसे पुराने छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के अध्यक्ष भी रह चुके है. उसके बाद, सोनोवाल असम गण परिषद के सदस्य बन गए.

सर्बानंद सोनोवाल का राजनीतिक करियर (Sarbananda Sonowal Political Career)

सर्बानंद सोनोवाल की राजनीतिक यात्रा 2001 में शुरु हुई जब इसी वर्ष वह असम गण परिषद पार्टी के टिकट पर असम के मोरन निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए. इसके बाद उन्होंने केंद्र की राजनीति में कदम रखा और 2004 में सोनोवाल असम गण परिषद पार्टी के टिकट पर असम के डिब्रूगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत गए. सर्बानंद सोनोवाल पहली बार सांसद बने. केंद्र में आते ही उन्हें वर्ष 2005 में गृह मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति का अदस्य नियुक्त किया गया. फिर वर्ष 2006 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति का सदस्य नियुक्त किया गया. इसके बाद वर्ष वर्ष 2007 में वाणिज्य समिति का सदस्य बनाया गया. सर्बानंद सोनोवाल ने एक बार फिर से आगामी लोक सभा चुनाव 2009 में डिब्रूगढ़ से असम गण परिषद पार्टी से लड़ा पर इस बार वह लोकसभा चुनाव हार गए. इसी के बाद वह वर्ष 2011 में असम गणपरिषद छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए और वह तब से लेकर वर्तमान तक में भाजपा में ही है. अब आगे की उनकी राजनीतिक यात्रा भाजपा के साथ शुरू हुई. चूँकि भाजपा को भी पूर्वोत्तर में आगे बढ़ने के लिए वहां के किसी दमदार नेता की जरूरत थी तो सोनोवाल भाजपा की इस जरूरत के अनुसार फिट थे क्योकि सोनोवाल की असम की आम जनता में अच्छी खासी पकड़ थी इसलिए भाजपा में आते ही सोनोवाल को वर्ष 2012 में भाजपा की असम इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इतना ही नहीं 2014 का लोकसभा भाजपा के लिए करो या मरो जैसा ही था क्योकि पार्टी लगातार पिछले दो आम चुनाव में हारे जा रही थी. कांग्रेस देश के अधिकांश राज्यों में विशेषकर पूर्वोत्त्तर में मजबूत स्थिति में थी ऐसे में भाजपा को असम में अपनी पकड़ बढ़ाने व राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाने की जरुरत थी. इसी लिए सोनोवाल को 2014 में असम सहित पूर्वोत्तर में पार्टी का जनाधार बढ़ाने की बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई. इसी कड़ी में उन्हें 2014 के लोकसभा के आम चुनाव में भाजपा द्वारा असम राज्य के लोकसभा चुनावों का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई. वर्ष 2014 भाजपा का स्वर्णिम काल था और पार्टी की उस चुनाव में पार्टी इतिहास का सबसे बड़ी जीत थी तो वही कांग्रेस की हाहाकारी हार हुई थी. देश भर में मोदी लहर थी. उसी चुनाव में सोनोवाल भी लखीमपुर निर्वाचन क्षेत्र से 16वीं लोकसभा के सांसद के रूप में भी जीत गए थे और यह उनकी लोकसभा में दूसरी जीत थी. इसके बाद चूँकि मोदी सरकार आ गई तो सर्बानंद सोनोवाल को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला और उन्हें केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार बना दिया गया. पर पूर्व की ओर मोदी सरकार की विशेष नजर होने के कारण भाजपा सर्बानंद सोनोवाल को राज्य की राजनीति में सक्रिय करना चाहती थी इसी कारण सोनोवाल ने वर्ष 2016 में लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया और असम के विधानसभा में भाग लिया. पार्टी ने उन्हें राज्य के माजुली निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया और वह अपनी सीट से जीत गए. इसके साथ ही राज्य में एनडीए की बहुमत भी आ गई. इसी के बाद 24 मई 2016 को सर्बानंद सोनोवाल असम के मुख्यमंत्री बनाये गए. असम में एनडीए का शासन हो गया और अब राज्य में भाजपा का जनाधार बढ़ गया था. इसके बाद वह 2021 में एक बार फिर से असम के माजुली विधानसभा क्षेत्र से चुने गए पर राजनीतिक घटनाक्रम बदला और सर्बानंद सोनोवाल दोबारा असम के मुख्यमंत्री बनने के बदले मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और राज्य में हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार बन गई. बता दें, हिमंत बिस्वा सरमा सोनोवाल के ही विचारधाते के है और दोनों के बीच अच्छे राजनीतिक सम्बन्ध है. इसके बाद सर्बानंद सोनोवाल केंद्र आ गए और उन्हें दूसरे मोदी सरकार में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री और आयुष मंत्री बना दिया गया. 2024 में हुए 18वीं लोकसभा में भी सर्बानंद सोनोवाल की जीत हुई है और वह एक बार फिर से मोदी के तीसरे कार्यकाल में मंत्री है. वर्तमान में, सर्बानंद सोनोवाल असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद है और मोदी सरकार में केंद्रीय पत्तन, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री है.

सर्बानंद सोनोवाल की संपत्ति (Sarbananda Sonowal Net Worth)

2024 के लोकसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार उनकी कुल सम्पत्ति 4.75 करोड़ रूपये हैं. इसके साथ ही सांसद सर्बानंद सोनोवाल के ऊपर 25 लाख रूपये का कर्ज भी है. इस लेख में हमने आपको सांसद और मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की जीवनी (Sarbananda Sonowal Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.