Mukesh Bhakar's big statement on the incident of 25 September: राजस्थान में कांग्रेस नेताओं की आपसी बयानबाजी का दौर एक बार फिर से चरम पर है. पार्टी आलाकमान के फैसले को चुनौती देनी वाली 25 सितम्बर की घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों की गर्मी बढ़ा दी है. हाल ही में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने एक न्यूज़ चैनल के चुनावी कार्यक्रम में 25 सितम्बर की घटना का जिक्र किया था. इस पर आज पहले मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने तो उसके बाद सचिन पायलट समर्थक लाडनूं विधायक मुकेश भाकर ने खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि 25 सितंबर की घटना कांग्रेस के राज में एक शर्मनाक घटना है.
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आज विधानसभा के बाहर पत्रकारों से रूबरू होते हुए विधायक मुकेश भाकर ने कहा कि जब एक ही पार्टी में दो तरह के व्यवहार होंगे तो जनता के बीच सही मैसेज नहीं जाएगा. भाकर ने सियासी संकट के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय हम लोगों ने बगावत की थी, उसका खामियाजा हमने भुगता, बगावत के बाद हम सभी बगावत करने वाले मंत्री, विधायकों को पद से हटा दिया गया था.
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भाकर ने आपने बयान में आगे कहा कि मुझे यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष का पद उस समय खोना पड़ा. खुद सचिन पायलट ने पीसीसी चीफ ओर उपमुख्यमंत्री का पद खोया, बगावत के समय हम सभी विधायकों ने आलाकमान को कभी चैलेंज नहीं किया, लेकिन 25 सितंबर की घटना कांग्रेस के राज में एक शर्मनाक घटना है.
वही भाकर ने मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी, धर्मेंद्र राठौर पर इशारों-इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों ने बहला-फुसलाकर 25 सितम्बर को विधायकों को एकजुट किया. मुख्यमंत्री के आवास में ना ले जाकर स्पीकर के पास विधायकों को ले जाया गया. स्पीकर ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा और कहा कि दबाव में विधायकों ने इस्तीफे दिए, हर पार्टी में आलाकमान का भरोसा कायम रखना है, तो कोई भी कितना बड़ा क्यों ना हो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.
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आगे भाकर ने कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि जिन लोगों ने अनुशासनहीनता की है उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, दोबारा विधायक दल की बैठक बुलाई जानी चाहिए. जब सबको साथ लेकर चलने की बात कही जा रही है तो कोई प्रिय और कोई अति प्रिय नहीं हो सकता. जिन लोगों को अनुशासनहीनता का नोटिस मिला उन पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई.
वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखविंदर रंधावा को लेकर भाकर ने कहा कि हमारे प्रभारी रंधावा लगातार अलग-अलग बयान दे रहे है. मंत्री महेश जोशी को मुख्य सचेतक के पद से हटाने पर रंधावा पर कहा था की नोटिस मामले को लेकर महेश जोशी को मुख्य सचेतक के पद से हटाया गया है, लेकिन अगले ही दिन प्रभारी कहते हैं कि एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला अपनाया गया है. कोई कितना बड़ा ही क्यों ना हो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. सचिन पायलट पर जब कार्रवाई हुई है तो नोटिस मिलने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, अकेले बजट और नए जिले बनाने से कांग्रेस सरकार सत्ता में आने वाली नहीं है, जिनका पार्टी में जनाधार है, उनको साथ लेकर चलने की जरूरत है.