कांग्रेस ही डुबा रही पार्टी की लुटिया! क्या अनिल विज को मिलेगा वॉकओवर?

अंबाला कैंट से 6 बार के विधायक रह चुके हैं अनिल विज, जीत की हैट्रिक के बाद लगातार चौथी बार मैदान में, ​निर्दलीय चित्रा दे रही ​टक्कर, गुटबाजी में फंसे कांग्रेसी उम्मीदवार परविंदर सिंह परी .

haryana assembly elections 2024 ambala cantt seat
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हरियाणा विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है. 5 अक्टूबर को मतदान और 8 अक्टूबर को चुनावी परिणाम घोषित होने हैं. हरियाणा चुनाव में एक ओर बीजेपी एकजुट होती दिख रही है, वहीं कांग्रेसी नेताओं के गतिरोध ऐन वक्त पर सामने आने लगे हैं. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सैलजा गुट आमने सामने हो रहे हैं. सैलजा ने चुनावी अभियान से दूरी बनाए रखी है जिससे हुड्डा गुट के भी पसीने छूट रहे हैं. वहीं कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां कांग्रेस के नेता पार्टी उम्मीदवारों की ही लुटिया डूबोने में लगे हैं. ऐसी ही एक सीट है हरियाणा की अंबाला कैंट, जहां से प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री अनिल विज लगातार चौथी बार मैदान में हैं. यहां मुकाबला बीजेपी बनाम कांग्रेस नहीं, बल्कि कांग्रेस बनाम कांग्रेस चल रहा है.

अंबाला कैंट विधानसभा सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर अनिल विज पर दांव खेला है. अनिल विज इस सीट से 6 बार विधायक बन चुके हैं. विज जनता के सामने अपने आपको खुलकर प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री चेहरा बता रहे हैं. इस बार यहां एंटीकमबेंसी चल रही है. विकास कार्यों को लेकर जनता में विज को लेकर थोड़ी बहुत नाराजगी भी है. वहीं कांग्रेस पर गुटबाजी हावी हो रही है. कांग्रेस ने यहां से कुमारी सैलजा गुट के परविंदर सिंह परी को उम्मीदवार बनाया है. सैलजा का करीबी होने की वजह से कांग्रेस उम्मीदवार परविंदर परी से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा दूरी बनाए हुए हैं.

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इधर, टिकट न मिलने पर कांग्रेस की बागी चित्रा सरवारा ने निर्दलीय ताल ठोक दी है. इनके अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) से राज कौर गिल, इनेलो-बसपा के ओंकार सिंह, जजपा-असपा के अवतार करधान भी मैदान में हैं. यहां मुख्य मुकाबला चित्रा सरवारा बनाम अनिल विज का ही बताया जा रहा है.

अनिल विज का एकतरफा माहौल नहीं

अनिल विज अंबाला कैंट विधानसभा सीट से 6 बार विधायक बन चुके हैं. सबसे पहले वह साल 1990 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते. इसके बाद भाजपा ने टिकट काटा तो 1996 और 2000 में निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की. 2009, 2014 और 2019 में वह भाजपा के टिकट पर विधायक बने. वह 2014 और 2019 में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा ठोका है.

इसके बावजूद यहां बीजेपी के अनिल विज का एक-तरफा माहौल नहीं है. यहां के मुख्य मुद्दे टूटी सड़कें और जलभराव की समस्या है, जिससे लोग परेशान हैं. किसान एमएसपी को लेकर बीजेपी का विरोध कर रहे हैं. एंटी इनकबेंसी भी है. ये चीजें विज के लिए परेशानी बनेंगी. परविंदरपाल परी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने इस सीट पर अन्य नेताओं को मना लिया, लेकिन चित्रा को मनाने के लिए नहीं गए. उनका इशारा है कि हुड्डा गुट कहीं न कहीं अंदरखाते चित्रा को समर्थन दे रहा है. वहीं चित्रा सरवारा भ्रष्टाचार दूर करने के नाम पर वोट मांग रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में भी चित्रा ने निर्दलीय बनकर अनिल विज को टक्कर दी थी और दूसरे नंबर पर रही. अगर इस बार बीजेपी की ओर से भी वोट कटवा की स्थिति बनी तो अनिल विज मुश्किल में पड़ सकते हैं.

गुटबाजी के चलते चित्रा रहीं बेटिकट

इसमें कोई दो राय नहीं है कि हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी काफी हावी हो रही है. यहां कुल 90 में से हुड्डा गुट को 72 और सैलजा गुट को 10 सीटें दी गयी हैं. दो से तीन सीट रणदीप सिंह सुरजेवाला के समर्थकों को मिली है. इसी उधेड़बुन में अन्य काबिल उम्मीदवारों को साइड लाइन किया गया जिनमें चित्रा सरवारा भी एक हैं. चित्रा  पूर्व मंत्री निर्मल सिंह मोहड़ा की बेटी हैं. निर्मल सिंह अंबाला सिटी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. चित्रा 2013 में पार्षद बनी और मार्च 2015 में कांग्रेस में शामिल हुईं. 2016 में उन्हें हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी का वरिष्ठ उपाध्यक्ष और उसके बाद सचिव बनाया गया. 2019 हरियाणा विस चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर पर रहीं.

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साल 2023 में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गईं, जहां प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई. 5 जनवरी 2024 को वह दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गईं. चित्रा कांग्रेस से टिकट मांग रही थीं, लेकिन उनकी जगह परविंदरपाल परी को उम्मीदवार बनाया गया. ऐसे में चित्रा ने बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया.

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी परविंदर सिंह को सैलजा समर्थन माना जा रहा है. पूर्व पार्षद परविंदपाल ग्राउंड लेवल पर काफी एक्टिव हैं और किसानों का समर्थन उन्हें प्राप्त है. वे एक युवा चेहरा हैं लेकिन हुड्डा गुट से दूरी बनाना उनकी परेशानियां बढ़ा रहा है.

विज बनाम चित्रा में कांटे की टक्कर

गुटबाजी में फंसे परविंदर सिंह परी को अंबाला कैंट की चुनावी टक्कर में कहीं नहीं माना जा रहा है. इस बार भी चित्रा कांग्रेस प्रत्याशी पर भारी पड़ रही हैं. माना यह भी जा रहा है कि हुड्डा गुट का अंदरखाने चित्रा को समर्थन प्राप्त है. अगर ऐसा हुआ तो मुकाबला टफ बन सकता है. वहीं अनिल विज को सीएम फेस बताने के बाद जनता का समर्थन मिल रहा है. इसके बावजूद चित्रा का चुनावी ताल ठोकना विज के लिए परेशानी का सबब है. 15 साल से लगातार विधायक रहने के बाद भी जनता की समस्याएं खत्म नहीं हो रही हैं. अगर यहां हुड्डा समर्थन के बाद बीजेपी का एक चौथाई कोर वोटर भी चित्रा के साथ आ गया तो अनिल विज को हार का मुंह भी देखना पड़ सकता है.

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