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2012 में अपने नहीं बल्कि मुलायम सिंह के दम पर अखिलेश बने थे मुख्यमंत्री- राजभर के निशाने पर यादव

29 जून 2022
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2012 में अपने नहीं बल्कि मुलायम सिंह के दम पर अखिलेश बने थे मुख्यमंत्री- राजभर के निशाने पर यादव

Politalks.News/UttarPradesh. विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. पहले विधानसभा चुनाव, उसके बाद विधान परिषद चुनाव, फिर आजम खान की नाराजगी और अब सपा के गढ़ में लोकसभा के उप चुनाव में बड़ी हार से अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं. एक के बाद एक समाजवादी पार्टी के सहयोगी दल अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अब खुलकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है. सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा … Read more

Politalks.News/UttarPradesh. विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. पहले विधानसभा चुनाव, उसके बाद विधान परिषद चुनाव, फिर आजम खान की नाराजगी और अब सपा के गढ़ में लोकसभा के उप चुनाव में बड़ी हार से अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं. एक के बाद एक समाजवादी पार्टी के सहयोगी दल अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अब खुलकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है. सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि, ‘2012 में अखिलेश यादव अपने दम पर मुख्यमंत्री नहीं बने थे बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की कृपा से मुख्यमंत्री बने थे.’

उत्तरप्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहरा दिया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी सांसद आजम खान के सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद खिली हुई आजमगढ़ और रामपुर सीट पर बीजेपी ने अपना कब्ज़ा कर लिया है. दोनों ही सीटों पर पार्टी को मिली हार के कारण अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी ही पार्टी के नेताओं एवं सहयोगी दलों के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं. उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की पराजय के बाद पार्टी के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं. 2012 में अखिलेश यादव किस तरह से मुख्यमंत्री बने थे, इस बारे में भी विस्तार से बताया.

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सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बुधवार को जिले के रसड़ा में पार्टी के प्रधान कार्यालय पर संवाददाताओं से बातचीत में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘2012 में अखिलेश यादव अपने दम पर नहीं बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की कृपा से मुख्यमंत्री बने थे. 2012 का विधानसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में लड़ा गया था लेकिन ताज अखिलेश के सिर सजा.’ राजभर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि, ‘अखिलेश यादव के नेतृत्व में वर्ष 2014, 2017, 2019 और 2022 में लोकसभा व विधानसभा के जो भी चुनाव हुए, सभी में सपा को हार का सामना करना पड़ा. उपचुनाव व विधान परिषद के चुनाव में भी समाजवादी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा. अब तो खुद अखिलेश यादव स्पष्ट करें कि आखिर अभी तक एक भी चुनाव में उन्हें जीत क्यों नहीं हासिल हुई. ‘

राजभर यहीं नहीं रुके उन्होंने अखिलेश यादव से पुछा कि, ‘अखिलेश यादव बताएं कि उन्होंने अभी तक धरातल पर क्या काम किया है. अभी तक उन्होंने पार्टी की हार एवं अन्य मुद्दों को कितने गांवों में बैठक की है. हाल के लोकसभा उपचुनाव में सपा ने स्वयं अपने पैर में कुल्हाड़ी मार ली. जिस पार्टी का मुखिया चुनाव प्रचार में नहीं जायेगा, वह पार्टी क्या चुनाव लड़ेगी?’ वहीं पत्रकार वार्ता के दौरान जब राजभर से सवाल पुछा गया कि, ‘साल 2024 में भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने की संभावना संबंधी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे कर रहे हैं तो इस पर आप क्या कहेंगे.’ मीडिया के इस सवाल का ओमप्रकाश राजभर ने बड़ी ही सूझबूझ के साथ जवाब दिया.

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पत्रकारों से बात करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि, ‘अगर 2024 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के नेताओं के रवैये में बदलाव नहीं आया तो भाजपा उत्तर प्रदेश में सभी 80 सीट जीत सकती है. उत्तर प्रदेश में संविधान और आरक्षण की रक्षा तथा पिछड़े वर्ग व दलितों के हित में बसपा, सपा तथा अन्य सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए.’ अखिलेश यादव पर निशाना साधने के साथ ही ओमप्रकाश राजभर ने उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सलाह भी दे दी. राजभर ने कहा कि, ‘अगर भाजपा को को लोकसभा चुनाव में रोकना है तो फिर अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में 2024 में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव में 80 सीट में से 60 सीट पर स्वयं व 20 सीट पर सहयोगी दलों को चुनाव लड़ाना चाहिए.’

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