देश की सियासत में इस वक्त महाराष्ट्र की राजनीति में काफी उबाल चल रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बीते साढ़े चार सालों में यहां कई बार हलचल हुई है. आम चुनावों में महाविकास अघाड़ी (MVA) ने पार्टी टूटने के बाद भी जो धूल चटाई है, उससे देश की राजनीति में महाराष्ट्र एक बार फिर सियासी नक्शे पर सबसे ऊपर आ गया है. फिलहाल लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष/डिप्टी स्पीकर पर राजनीति गर्मायी हुई है और पक्ष एवं विपक्ष के बीच गहमा-गहमी चल रही है. इसे लेकर एनसीपी-एससीपी सुप्रीमो शरद पवार ने बड़ा बयान दिया है. शरद पवार ने मोदी 3.0 सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि मोदी सरकार में पिछले 10 सालों में जो नहीं हुआ, वो अब कैसे हो सकता है.
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दरअसल, इन दिनों लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर पद को लेकर खींचतान चल रही है. परंपराओं के विपरीत भर्तृहरि महताब को लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है. सत्ताधारी दल के इस निर्णय का विरोध सभी तरफ से किया जा रहा है. सत्ताधारी पक्ष के इस निर्णय को देखते हुए माना जा रहा है कि अब लोकसभा उपाध्यक्ष का पद भी प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को नहीं मिलने वाला है. हालांकि पिछले 10 सालों से यह पद खाली ही रहा है.
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ऐसे में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए शरद पवार ने कहा है कि 'हमें पता है सत्तारूढ़ दल को अध्यक्ष पद मिलेगा. पहले यह सामान्य प्रथा देखने को मिलती थी कि विपक्ष को उपाध्यक्ष का पद दिया जाता था. मगर, मोदी सरकार के दौरान आखिर के 10 सालों में ऐसा नहीं हुआ. मुझे नहीं लगता है कि इस बार भी कोई सुधार होगा.'
26 जून को होना है स्पीकर का चुनाव
18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून को शुरू होगा. लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 26 जून को होना है. स्पीकर के लिए कोटा से सांसद ओम बिरला का नाम सबसे आगे चल रहा है. बीजेपी नेता डी पुरंदेश्वरी, राधा मोहन सिंह और भर्तृहरि महताब के नाम भी चर्चा में हैं. डिप्टी स्पीकर का पद न मिलने पर विपक्ष भी अपना उम्मीदवार स्पीकर पद के लिए उतार सकता है. हालांकि एनडीए बहुमत के साथ सत्ता में है. बीजेपी (240), तेलुगु देशम पार्टी (16) व जदयू (12) सहित एनडीए के पास 293 सीटें हैं. इंडिया गठबंधन के पास 204 सीटें हैं जबकि ममता बनर्जी वाली तृणमूल कांग्रेस के पास 30 सीटें हैं. कांग्रेस 99 सीटों के साथ सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी है.
स्पीकर का चुनाव आम सहमति से होना बेहतर
स्पीकर एवं डिप्टी स्पीकर पर गहमा गहमी के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव आम सहमति से होना हमेशा बेहतर होता है. रिजिजू ने कहा कि किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा. हम बहुत जल्द कदम उठाएंगे.