PFI पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुई सियासत, लालू बोले- RSS को भी करो बैन, ये है उससे बदतर संगठन

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने PFI पर लगाया 5 साल का प्रतिबंध, PFI पर बैन के साथ ही सियासी बयानबाजी हुई तेज, लालू यादव बोले- ये लोग सांप्रदायिकता फैलाकर देश में दंगा फसाद करके बना रहना चाहते हैं शासन में, तो बोले ओवैसी- पीएफआई पर बैन का मैं नहीं करता समर्थन लेकिन कुछ लोगों के अपराध का यह मतलब नहीं है कि पूरी ऑर्गनाइजेशन को कर दिया जाए बैन

PFI पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुई सियासत
PFI पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुई सियासत

Politalks.News/Delhi. देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में घिरी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर बड़ा एक्शन लेते हुए केंद्र सरकार ने 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया है. PFI ही नहीं 8 सहयोगी संगठनों पर भी केंद्र ने रोक लगा दी है. गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. बता दें, गृहमंत्रालय ने यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है. वहीं PFI पर केंद्र सरकार के प्रतिबंध के बाद अब सियासत गरमा गई है. कुछ नेता जहां केंद्र के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो कुछ PFI के साथ RSS को भी बैन करने की मांग कर रहे हैं. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि, ‘PFI को बैन किया वो तो ठीक है लेकिन सबसे पहले आरएसएस को बैन करिये, ये उससे भी बदतर संगठन है.’ वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साधा.

PFI की बढ़ती देश विरोधी गतिविधियों को संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया. केंद्रीय गृहमंत्रालय की तरफ से बुधवार को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए PFI 5 साल के लिए बैन कर दिया है. केंद्र सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में कहा कि वैश्विक आतंकी संगठनों के साथ संबंध और कई आतंकी मामलों में शामिल होने के लिए PFI पर प्रतिबंध लगाया गया है. पीएफआई के अलावा उसके 8 सहयोगी संगठनों पर भी कार्रवाई की गई है. 22 सितंबर और 27 सितंबर को एनआईए, ईडी और राज्यों की पुलिस ने पीएफआई पर छापेमारी की थी. पहले राउंड की छापेमारी में 106 और दूसरे राउंड की छापेमारी में पीएफआई से जुड़े लोग 247 गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए. पीएफआई को बैन करने की मांग लगातार उठ रही थी. वहीं PFI पर लगे प्रतिबंध को लेकर अब सियासत भी शुरू हो गई है.

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राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर बैन का तो स्वागत किया है लेकिन साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बैन की मांग कर डाली है. लालू ने कहा कि, ‘PFI पर जांच हो रही है लेकिन PFI की तरह जितने भी संगठन हैं सभी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जिसमें RSS भी शामिल है. सभी पर प्रतिबंध लगाया जाए…. सबसे पहले RSS को बैन करिए, ये उससे भी बदतर संगठन है. केंद्र में बैठे कुछ लोग देश में अक्लियत लोगों को हिंदू-मुस्लिम करके ये देश को तोड़ना चाहते हैं. मैंने पहले भी बोला था कि देश रहेगा या टूटेगा. हर बात में हिंदू-मुस्लिम मस्जिदों पर भगवा ध्वज फहराना ये बहुत गंदी बात है. ये लोग हनुमान जी की पाठ कर रहे हैं मस्जिदों के सामने, ये क्या बताता है, ये बताता है कि इनको बिल्कुल सांप्रदायिकता फैलाकर देश में दंगा फसाद करके शासन में बना रहना चाहते हैं. अब इनका दिन लद गया है. आजकल एक ही बाजा बजा रहे हैं रोज और पीएफआई का हौव्वा दिखा रहे हैं लोगों के ऊपर.’

वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘हम तो पहले से ही पीएफआई की विचारधारा के खिलाफ हैं लेकिन बैन का समर्थन नहीं करते.’ ओवैसी ने ट्वीट एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए लिखा, ‘पीएफआई पर प्रतिबंध कैसे लगा जबकि खाजा अजमेरी बम धमाकों के दोषियों से जुड़े संगठन पर नहीं? सरकार ने दक्षिणपंथी संस्थाओं को बैन क्यों नहीं किया. मैंने हमेशा से पीएफआई की विचारधारा का विरोध और लोकतांत्रिक रवैये का समर्थन किया है. लेकिन पीएफआई पर बैन का मैं समर्थन नहीं करता. कुछ लोगों के अपराध का यह मतलब नहीं है कि पूरी ऑर्गनाइजेशन को बैन कर दिया जाए.’ वहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने PFI पर लगे बैन को लेकर बीजेपी से कुछ सवाल पूछे.

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कमलनाथ ने कहा कि, ‘देश की जनता को सुरक्षा चाहिए. अगर इतने दिन से ये हो रहा था तो आप क्या कर रहे थे? ये साल भर में तो पैदा नहीं हुई. क्या सबूत अभी मिले हैं? अगर ये आतंकवादी संस्थाओं से पहले से जुड़ी थी तो आप इतने साल क्या कर रहे थे?’ वहीं राजस्थान की गहलोत सरकार में खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि, ‘आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार कोई कदम उठाएगी तो हम सरकार का विरोध नहीं करेंगे लेकिन उस कदम में सच्चाई और ईमानदारी नजर आनी चाहिए. ये बैन आप पहले कर देते. इसकी डिमांड तो मैं पहले उठा चुका हूं. तो आप इतने दिन क्या कर रहे थे. तो ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया. मौलाना ने कहा कि, ‘सरकार ने कट्टरपंथी संगठन PFI पर प्रतिबंध लगाकर अच्छा कदम उठाया है. भारत की सरज़मीं कट्टरपंथी विचारधारा की सरज़मीं नहीं है और न यहां ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा पनप सकती जिससे मुल्क़ की एकता-अखंडता को खतरा हो.

दरअसल कुछ दिन पहले आतंकी गतिविधियां चलाने के आरोप में एनआईए ने तेलंगाना में PFI के 38 स्थानों और आंध्र प्रदेश में दो स्थानों पर तलाशी ली थी. जिसमें चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया. अधिकारियों ने इस अभियान के दौरान डिजिटल उपकरण, दस्तावेज, दो खंजर और 8.31 लाख रुपये से अधिक नकदी सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी. इस मामले में पीएफआई के खिलाफ 4 जुलाई को तेलंगाना के निजामाबाद में मामला दर्ज कराया गया था. राज्य पुलिस ने जांच के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. बाद में एनआईए ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए 26 अगस्त को फिर केस दर्ज किया. एनआईए के मुताबिक संगठन से जुड़े ये लोग आतंकी कृत्यों को अंजाम देने और धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रहे थे. दक्षिण भारत तक सीमित रहने वाले पीएफआई ने पिछले कुछ वर्षों में उत्तर भारत में तेजी से विस्तार किया है. दिल्ली में मुख्यालय बनाने के बाद से संगठन ने राजधानी सहित इसके आसपास के राज्यों में अपने पैर पसारे हैं.

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