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OBC आरक्षण में संशोधन की मांग को लेकर हुए धरने में पहुंचे दिग्गज, सीएम गहलोत ने दिया आश्वासन

30 सितंबर 2022
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OBC आरक्षण में संशोधन की मांग को लेकर हुए धरने में पहुंचे दिग्गज, सीएम गहलोत ने दिया आश्वासन

Politalks.News/Rajasthan. साल 2018 में OBC आरक्षण में निकले संशोधन के आदेश के विरोध में आज एक बार फिर हजारों की तादाद में OBC वर्ग के लोग सड़कों पर उतर आए. कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी के नेतृत्व में ओबीसी आरक्षण में हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए राजधानी जयपुर के शहीद समारक पर धरना प्रदर्शन किया गया. ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के साथ ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा भी धरने में पहुंची. संघर्ष समिति लगातार प्रदेश सरकार से मांग कर रही है कि सरकार राज्य में भर्तियों के लिए जारी 2018 के परिपत्र में संशोधन करे और सही … Read more

Politalks.News/Rajasthan. साल 2018 में OBC आरक्षण में निकले संशोधन के आदेश के विरोध में आज एक बार फिर हजारों की तादाद में OBC वर्ग के लोग सड़कों पर उतर आए. कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी के नेतृत्व में ओबीसी आरक्षण में हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए राजधानी जयपुर के शहीद समारक पर धरना प्रदर्शन किया गया. ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के साथ ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा भी धरने में पहुंची. संघर्ष समिति लगातार प्रदेश सरकार से मांग कर रही है कि सरकार राज्य में भर्तियों के लिए जारी 2018 के परिपत्र में संशोधन करे और सही रोस्टर बनाए, जिससे ओबीसी के लोगों के साथ न्याय हो. वहीं बहरोड़ से निर्दलीय विधायक बलजीत यादव भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए. हालांकि जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने कुछ देर पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में प्रमुख शासन सचिन कुलदीप रांका को ज्ञापन सौंपा.

प्रदेश में ओबीसी आरक्षण विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर युवा आर-पार की लड़ाई करने के मूड में नजर आ रहे हैं. आज शुक्रवार से युवा जयपुर की सड़कों पर आक्रोश महारैली निकालकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. युवाओं में विसंगतियों को लेकर जबरदस्त गुस्सा है. दरअसल राजस्थान भर से OBC कार्यकर्ता जयपुर में आज जमा हुए हैं. ये लोग साल 2018 में ओबीसी के लिए जारी परिपत्र को रद्द करने की मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि पूर्व सैनिकों को भी ओबीसी के तहत आरक्षण देकर नौकरियां दी जा रही है. जिसके चलते इस वर्ग में पहले से मौजूद लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है. साथ ही आंदोलनकारी अपने लिए अलग से ओबीसी बोर्ड के गठन और जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग के लिए 21 फीसदी आरक्षण तय करने की मांग कर रहे हैं.

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OBC आरक्षण समिति के आह्वान पर शहीद स्मारक पर आज सुबह अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ. खास बात यह है कि संघर्ष समिति के इस धरने में गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरीश चौधरी, ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा और बहरोड़ से निर्दलीय विधायक बलजीत यादव भी इस धरने में शामिल रहे. राजस्थान के कई विधायकों ने ओबीसी अभ्यर्थियों की मांग को जायज बताते हुए सरकार से मांग की है कि आरक्षण की विसंगतियों को शीघ्र दूर किया जाए. इसके लिए दो दर्जन से ज्यादा विधायक मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं. कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि, ‘राजस्थान में ओबीसी वर्ग को 21 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है, लेकिन साल 2018 में सरकार के कार्मिक विभाग ने ओबीसी की भर्तियों में भूतपूर्व सैनिक का कोटा निर्धारित कर दिया, जिससे भूतपूर्व सैनिक इस पूरे कोटे का लाभ उठा रहे हैं. इसके कारण ओबीसी वर्ग के अन्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल पा रहा है.

हरीश चौधरी ने आगे कहा कि, ’21 प्रतिशत आरक्षण होने के बावजूद ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का एक भी पद पर चयन नहीं हुआ. विभाग ने भर्तियों को लेकर जो उपनियम बनाए हैं, उन्हें वापस लिया जाए और भूतपूर्व सैनिकों का कोटा अलग से निर्धारित किया जाए जो ओबीसी वर्ग के 21 फीसदी आरक्षण से अलग हो.’ वहीं जाट नेता राजाराम मील ने कहा कि, ‘ओबीसी में आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर पिछले कई महीनों में हर जिले में आंदोलन हो चुके हैं और जनसभाएं करके ओबीसी वर्ग के युवाओं को साथ आने की अपील भी की गई है. लेकिन सचिवालय में बैठे अफसरों के कानों तक ओबीसी वर्ग की यह मांग नहीं पहुंच रही थी.

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वहीं देर शाम सीएम आवास पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में OBC आरक्षण समिति के प्रतिनिधि दल के साथ आयोजित बैठक में प्रमुख शासन सचिन कुलदीप रांका को ज्ञापन सौंपा. मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘OBC आरक्षण के संबंध में पैदा हुईं विसंगतियों का सकारात्मक हल करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया है. विभागीय एवं कानूनी राय लेकर इस मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा जिससे यह न्यायिक प्रक्रिया में ना अटके.’

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