कई दिग्गज नेताओं को पीछे छोड जेपी नड्डा बने भाजपा के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष, क्या शाह की तरह फ्रीहैण्ड काम करेंगे नड्डा?

जेपी आंदोलन से निकले चेहरे के कंधों पर देश की सबसे बडी पार्टी भाजपा की कमान, एबीवीपी काॅलेज ईकाई अध्यक्ष से भाजपा राष्टीय अध्यक्ष तक के सफर में कई उतार चढाव देखे हैं जय प्रकाश नड्डा ने

पाॅलिटाॅक्स ब्यूरो. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए 1975 में आपातकाल के दौरान देश में चले जयप्रकाश नारायण आंदोलन से निकले जगत प्रकाश नड्डा अब देश की सबसे बडी पार्टी भाजपा की कमान संभालेंगे. अमित शाह और राजनाथ के प्रस्ताव पर जय प्रकाश नड्डा बने भारतीय जनता पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष. सोमवार को भाजपा के संगठनात्मक चुनाव के अंतर्गत पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी राधा मोहन सिंह ने जे पी नड्डा को वर्ष 2019-22 के लिए निर्विरोध भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया. गृहमंत्री अमित शाह सहित सभी बड़े नेता रहे मौजूद.

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा में हमेशा से दो तरह के पार्टी के अध्यक्ष होते रहे हैं. एक वो जिन्होंने अपने निर्णय अपने हिसाब से लिए और दूसरे वो जो केवल रबर स्टाम्प बनकर रह गए. 1980 में बीजेपी के गठन के बाद बने पार्टी अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी तीनों ही अपने हिसाब से काम करने वाले अध्यक्ष रहे, जिन्होंने अपने निर्णय अपने विवेक से लिए. इन तीनों नेताओं के सत्ता में आने के बाद क्रमश: वेंकैया नायडू, जना कृष्णमूर्ति और बंगारू लक्ष्मण को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया लेकिन इन तीनों ने ही मोटे तौर पर वाजपेयी और आडवाणी की रबर स्टाम्प के रूप में काम किया. इनके बाद बने तीन अध्यक्षों- राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और अमित शाह ने फिर अपने हिसाब से काम किया. तीनों ने अपनी अपनी सोच में पार्टी को ढाला और अपनी टीम बना कर राजनीति की.

(तस्वीर बहुत कुछ कहती है)

अब भाजपा के कई जाने माने और दिग्गज चेहरों को पीछे छोड भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जेपी नड्डा किस धारा के अध्यक्ष होंगे? वे अमित शाह की तरह स्वतंत्र रूप से काम करेंगे या उनकी छाया में सीमित स्वतंत्रता के साथ काम करेंगे? ये आने वाले समय में पता चल ही जाएगा. फिलहाल, कई बडे चेहरों की मौजूदगी के बीच जेपी नड्डा भाजपा के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए. केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, प्रकाश जावेडकर सरीखे कई नेताओं से रेस में आगे जाकर इस पद पर बैठने वाले जेपी नड्डा का राजनीतिक सफर जोरदार रहा है. नड्डा इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पहली पसंद बने हुए हैं. भारतीय जनता पार्टी में जगत प्रकाश नड्डा का सितारा चमक रहा है. सांगठनिक क्षमता, टारगेट को पूरा करने का मिशनरी अंदाज और मिलनसारिता के कारण बीजेपी के सामूहिक नेतृत्व ने कई कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर नड्डा को अमित शाह का उत्तराधिकारी चुना.

जय प्रकाश नड्डा का परिवार हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है. उनका जन्म बिहार के पटना में हुआ. पटना विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा पास कर नड्डा ने हिमाचल से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. नड्डा ने अपनी युवा अवस्था में जय प्रकाश नारायण द्वारा चलाए गए कई आंदोलनों में सक्रियता से भाग लिया. इसके बाद नड्डा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडे और यहीं से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर.

भारतीय जनता पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा 1989 में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बने. 1991 में बीजेपी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 1993 में वे हिमाचल प्रदेश से विधायक चुने गए और 1994 से लेकर 1998 तक राज्य विधानसभा में पार्टी के नेता रहे. 1998 में ही उन्हें स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया. 2007 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की. इस बार उन्हें वन पर्यावरण मंत्री बनाया गया. 2010 में जेपी नड्डा को बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया. 2012 में वे राज्यसभा में आ गए. 2014 में नड्डा को बीजेपी संसदीय समिति का सचिव नियुक्त किया गया. 2014 में कैबिनेट पुनर्गठन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने जेपी नड्डा को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया.

बता दें, अपने अब तक के सफर में जय प्रकाश नड्डा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रभारी और चुनाव प्रभारी रहे. बीजेपी में उनका कद लगातार बढ़ता रहा है. उन्हें बीजेपी की निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था बीजेपी संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया गया. यही नहीं वे बीजेपी के केंद्रीय इलेक्शन कमेटी के सदस्य भी बने. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने नड्डा को यूपी का जिम्मा सौंपा यहां पर पार्टी को 50 फीसदी से ज्यादा वोट और 64 सीटें मिली. इसके बाद नड्डा भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने.

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कई सफलताओं को हासिल करने वाले भाजपा के नए अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का कई विवादों से भी नाता रहा है. 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेपी नड्डा को बतौर कैबिनेट मंत्री देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की बागडौर सौंपी थी, नड्डा से पहले इस मंत्रालय को संभालने की जिम्मेदारी डॉ हर्ष वर्धन के पास थी. वहीं नड्डा को सरकार द्वारा दी गई इस नई जिम्मेदारी को लेकर काफी विवाद भी हुआ था. जहां डॉ हर्ष वर्धन को बीजेपी के इस फैसले से काफी धक्का लगा था. वहीं आम आदमी पार्टी ने मोदी के इस फैसले पर कई सवाल उठाए थे. आम आदमी पार्टी का आरोप था कि एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को हटाने के पीछे नड्डा का हाथ था. गौरतलब है कि चतुर्वेदी ने एम्स के शीर्ष अधिकारियों से जुड़े घोटालों में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. जिसके बाद नड्डा ने चतुर्वेदी को हटाने की सिफारिश की थी.

इसके अलावा साल 2016 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा एनईईटी परीक्षा पर लिए गए एक फैसले को लेकर काफी विवाद हुआ था. दरअसल सरकार द्वारा बनाए गए एनईईटी परीक्षा से जुड़े एक अध्यादेश के मुताबिक सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और संस्थान को एनईईटी के दायरे के अंतर्गत लिया गया था, जिसका काफी विरोध हुआ.