उत्तर प्रदेश: पांचवें चरण की 14 सीटों में से किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा
30 Apr 2019
उत्तरप्रदेशमेंलोकसभाचुनावकेपांचवेचरणकेखिलाड़ीतयहोचुकेहैं. नामवापसीकेबादअब वहीमैदानमेंहैंजिन्हेंसियासीजंगलड़नीहै. 5वेंचरणकीयह 14 पॉपुलरसीटेंअवधकीतराईसेलेकरबुंदेलखंडतकफैलीहैं. सोनियागांधी, राहुलगांधी, राजनाथसिंहऔरजितिनप्रसादजैसेराष्ट्रीयचेहरोंकीचमकभीइसीचरणमेंतयहोनीहै. रामनगरीअयोध्याकाप्रतिनिधित्वकररहीफैजाबादअपनाखेवनहारकिसेबनाएगी, यहभीइसीचरणमेंतयहोगा. इससमयकांग्रेसपरिवारकीदोसीटोंकोछोड़करसबपरबीजेपीकाबिजहै. इन 14 सीटोंपरमिलनेवालीबढ़त 2019 मेंसत्ताहासिलकरनेवालोंकीकिस्मततयकरनेमेंभीअहमभूमिकानिभाएंगीआइएजानतेहैंइनकेबारेमें ...
1. हाईप्रोफाइलसीट धौरहरा:मनमोहनसरकारमेंमंत्रीरहेजितिनप्रसादकीउम्मीदवारीकेचलतेयहसीटहाईप्रोफाइलमानीजातीहै. 2009 मेंअस्तित्वमेंआईइससीटसेकांग्रेसकेजितिनप्रसाद 1.85 लाखवोटोंकेअंतरसेजीतेलेकिन 2014 मेंपासाऐसापलटाकिवहनकेवलचौथेनंबरपररहेबल्किउन्हेंउनकीपुरानीजीतकेअंतरसेभीकमवोटमिले. इनचुनावोंमेंबीजेपीनेमौजूदासांसदरेखावर्माकोअपनाउम्मीदवारबनायाहै. बसपासेअरशदसिद्दीकीगठबंधनप्रत्याशीहैं. वहींप्रसपानेकभीचंबलमेंखौफकापर्यायरहेमलखानसिंहकोउतारमुकाबलादिलचस्पबनादियाहै. मुस्लिमऔरब्राह्मणबहुलसीटपरजितिनप्रसादकीउम्मीदेंइनदोनोंजातिकेवोटबैंकपरटिकीहै. पिछलीबारसपा-बसपाकोयहांबराबर-बराबरवोटमिलेथेजोकिबीजेपीउम्मीदवारकोमिलेवोटसे 1.18 लाखअधिकथे. ऐसेमेंदोनोंदलोंनेआपसमेंवोटट्रांसफरकरालिएतोनतीजेउनकेपक्षमेंआसकते हैं.
प्रत्याशी
रेखा वर्मा : बीजेपी
जितिन प्रसाद : कांग्रेस
अरशद सिद्दीकी : बसपा
मलखान सिंह : प्रसपा
कुल वोटर : 16.34 लाख
2. सीतापुर: त्रिकोणीय लड़ाई में कोर वोटर होंगे अहम
आजादी के बाद से लेकर अब के चुनाव में इस सीट पर तीन मौकों को छोड़कर ब्रा्ह्मण या कुर्मी ही सांसद बना है. 2014 में बीजेपी कभी बसपाई रहे राजेश वर्मा के जरिए 51 हजार वोटों की बढ़त के साथ इस सीट पर काबिज हुई थी. इस बार भी पार्टी ने उन्हीं पर दाव खेला है. यहां से कैसरजहां कांग्रेस और नकुल दुबे बसपा की तरफ से मैदान में हैं. इस सीट पर मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण व कुर्मी वोटर्स की संख्या अधिक है. बसपा ने प्रभावी ब्राह्मण चेहरा लेकर ब्राह्मणों के साथ दलित वोटों पर भी निशाना साधा है. लड़ाई त्रिकोणीय है इसलिए कोर वोटर्स का गणित अहम किरदार निभाएगा.
प्रत्याशी
राजेश वर्मा : बीजेपी
नकुल दुबे : बसपा
कैसर जहां : कांग्रेस
कुल वोटर : 16.53 लाख
3. मोहनलालगंज : कौशल दिखेगा या खत्म होगा बसपा का सूखा
मोहनलालगंज, सियासत और विकास दोनों ही पैमाने पर राजधानी से जुदा है. बिल्डरों व जमीन के कारोबार करने वालों का यह पसंदीदा इलाका सियासत में भी अलग-अलग चेहरे चुनता रहा है. बावजूद इसके, अब तक बसपा का खाता यहां नहीं खुल सका है. 1998 के बाद 2014 में कौशल किशोर ने यहां बीजेपी का कमल खिलाया और इस बार भी पार्टी का भरोसा कौशल ही है. बसपा से सीएल वर्मा यहां से प्रत्याशी है. पिछली बार बसपा के चुनावी उम्मीदवार आर.के. चौधरी इस बार कांग्रेस के झंडे के साथ मैदान में है. दलित बहुल इस इस सीट पर पासी सर्वाधिक हैं लेकिन तीनों ही दलों के उम्मीदवार इसी बिरादरी के हैं. ऐसे में दलित व मुस्लिम वोट बैंक यहां की तस्वीर तय करेंगे.
प्रत्याशी
कौशल किशोर : बीजेपी
सीएल वर्मा : बसपा
आरके चौधरी : कांग्रेस
कुल वोटर : 19.56 लाख
4. लखनऊ : महज एमपी नहीं चुनती राजधानी
यूपी की राजधानी लखनऊ तीन दशक से महज एमपी चुनने तक ही सीमित नहीं रही. 1999 से 2004 तक प्रधानमंत्री पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका प्रतिनिधित्व किया तो अब गृहमंत्री राजनाथ सिंह यहां से सांसद हैं. इस बार भी वह मैदान में हैं. उनसे मुकाबले के लिए सपा शत्रुघ्न सिंहा की पत्नी पूनम सिंहा को तलाश लाई है. कांग्रेस की तलाश प्रमोद कृष्णम पर पूरी हुई है. यहां जातीय गणित बीजेपी के लिए उलझन पैदा करती है. यहां करीब पौने पांच लाख मुस्लिम, तीन लाख कायस्थ और दो लाख से अधिक दलित हैं. क्षेत्र के साढ़े चार लाख ब्राह्मण, एक लाख ठाकुर और तीन लाख से अधिक व्यापारी, सिंधी व पंजाबी अगर बीजेपी के साथ जाते हैं तो विपक्ष की दोनों पार्टियों के लिए मुश्किल होगी.
प्रत्याशी
राजनाथ सिंह : बीजेपी
पूनम सिन्हा : सपा
प्रमोद कृष्णम : कांग्रेस
कुल वोटर : 19.58 लाख
5. रायबरेली : सोनिया के सामने उनका ही 'सिपहसालार'इंदिरागांधीकोचौंकानेवालीरायबरेलीकीजनताअबतकउनकीबहूसोनियागांधीकेसाथमजबूतीसेखड़ीरहीहै. यूपीएकीसंयोजकनेपांचवीबारइसीसीटसेअपनानामांकनदाखिलकियाहै. पिछलीबारउन्होंनेबीजेपीकेअजयअग्रवालको 3.52 लाखवोटोंसेहरायाथा. इसबारबीजेपीनेउनकेखिलाफउन्हींकेसिपहसालारकांग्रेससेविधानपरिषदसदस्यदिनेशप्रतापसिंहपरदांवखेलाहै. दिनेशकापरिवाररायबरेलीमेंराजनैतिकरूपसेप्रभावीहै. उनकेभाईराकेशप्रतापसिंहहरचंदपुरसेकांग्रेसकेविधायकहैंजबकिएकभाईजिलापंचायतअध्यक्षहैं. ऐसेमेंदिनेशकीदावेदारीरायबरेलीमेंलड़ाईकोदिलचस्पबनाएगी. सपा-बसपानेइससीटपरकोईउम्मीदवारनहींउताराहै.
प्रत्याशी
सोनिया गांधी : कांग्रेस
दिनेश प्रताप सिंह : बीजेपी
सपा-बसपा : कोई नहीं
कुल वोटर : 16.50 लाख
6. अमेठी : चुनौतियों के चक्रव्यूह में राहुल
गांधी परिवार की इस परंपरागत सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनौतियों के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं. उनका मुकाबला मौजूदा केंद्रीय मंत्री व बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति जुबिन ईरानी से है. 2009 में 71% फीसदी वोट हासिल करने वाले राहुल गांधी 2014 में अमेठी में 46% वोट पर पहुंच गए थे और जीत का अंतर घटकर 1.08 लाख आ गया. इन पांच सालों में हार के बाद भी स्मृति इरानी लगातार अमेठी में बनी रहीं. यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष का कद व गांधी परिवार से अमेठी का जुड़ाव अब भी राहुल के लिए मुफीद स्थिति बनाता है लेकिन जो राहुल गांधी को नहीं चुनना चाहते, उनके लिए स्मृति इरानी का एकमात्र विकल्प होना मुश्किल पैदा करेगा. राहुल के वायनाड़ से लड़ने को भी बीजेपी चुनावी मुद्दा बना वोटर्स को अपने पाले में खींचने में लगी है.
प्रत्याशी
राहुल गांधी : कांग्रेस
स्मृति ईरानी : बीजेपी
कुल वोटर : 17.18 लाख
7. बांदा : अगड़े-दलित वोट तय करेंगे जीतयहसीटइसबारदल-बदलकाअखाड़ाबनीहुईहै. पिछलीबारइलाहाबादसीटसेबीजेपीसांसदश्यामाचरणगुप्तायहांसेसपागठबंधनउम्मीदवारहैं. सपासेचुनावीलड़ाईलड़चुकेबालकुमारपटेलपरकांग्रेसनेअपनीउम्मीदेंलगाईहैं. बीजेपीनेमौजूदासांसदभैरोप्रसादमिश्रकाटिकटकाटबसपासेचुनावलड़करआएआर.के.पटेलकोदियाहै. वैश्यबिरादरीकेवोटरोंकीप्रभावीसंख्याकेसाथदलितों, मुस्लिमोंकीबहुतायतउनकादावामजबूतबनारहीहै. बीजेपीबड़ीसंख्यामेंमौजूदब्राह्मणवोटर्सकेभरोसेहैं. अगड़े-दलितजीत-हारमेंनिर्णायकभूमिकानिभाएंगे.
प्रत्याशी
आरके पटेल : बीजेपी
श्यामाचरण गुप्ता : सपा
बाल कुमार पटेल : कांग्रेस
कुल वोटर : 16.82 लाख
8. फतेहपुर : साध्वी की ‘साध’ में रोड़े अधिक
पिछड़ा वोटर बहुल इस सीट पर राजनीति मंडल और कमंडल के ध्रुवीकरण पर टिकी है. मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू कर देश की राजनीति बदलने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फतेहपुर की नुमाइंदगी कर चुके हैं. बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति पर फिर भरोसा जताया है तो बसपा ने बिंदकी के पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा को टिकट दिया है. टिकट की आस टूटने के बाद पूर्व सांसद राकेश सचान सपा छोड़ कांग्रेस की उम्मीदवारी कर रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में साध्वी को सपा-बसपा के कुल वोटों से भी अधिक वोट मिले थे लेकिन इस बार विपक्ष के दोनों उम्मीदवार कुर्मी होने के चलते उनमें बंटवारा होता दिख रहा है. साध्वी की अपनी बिरादरी के वोट भी यहां प्रभावी है लेकिन मुस्लिम-दलित वोटों का रुख भी बहुत कुछ तय करेगा. हालांकि ढाई लाख से अधिक सवर्ण बिरादरी के वेाट बीजेपी के समीकरण को मुफीद बना रहे हैं.
प्रत्याशी
साध्वी निरंजन ज्योति : बीजेपी
सुखदेव प्रसाद वर्मा : बसपा
राकेश सचान : कांग्रेस
कुल वोटर : 18.20 लाख
9. कौशांबी : राजा की एंट्री ने दिलचस्प बनाया मुकाबला
सुरक्षित सीट पर सपा-बसपा के प्रभाव का आकलन इससे किया जा सकता है कि त्रिकोणीय लड़ाई में भी बीजेपी 42 हजार वोटों से जीत पाई थी. हालांकि, इस बार निर्दलीय विधायक व क्षेत्र की राजनीति में प्रभावी रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया की जनसत्ता पार्टी की एंट्री ने चुनावी लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है. बीजेपी ने सांसद विनोद सोनकर पर फिर से दांव लगाया है. पिछली बार उन्हें सपा से कड़ी टक्कर देने वाले पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार जनसत्ता दल से उम्मीदवार हैं. बसपा छोड़कर पार्टी में आए इंद्रजीत सरोज पर सपा ने दांव लगाया है तो बसपा से आए गिरीश चंद्र पासी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. दलित बहुल इस सीट की दो विधानसभाएं कुंडा व बाबूगंज प्रतापगढ़ जिले में आती हैं. इन दोनों ही सीटों पर राजा भईया का सिक्का चलता है. ऐसे में उनकी पार्टी वोटकटवा बनेगी या निर्णायक लड़ाई लड़ेगी, इसी पर दूसरे दलों का भविष्य निर्भर करेगा.
प्रत्याशी
विनोद कुमार : बीजेपी
इंद्रजीत सरोज: सपा
गिरीश चंद्र पासी : कांग्रेस
शैलेंद्र कुमार : जनसत्ता दल
कुल वोटर : 17.65 लाख
10. बाराबंकी : त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी कांग्रेस की उम्मीद
प्रदेश की राजधानी से सटी इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता पीएल पूनिया अपने बेटे तनुज पूनिया के सियासी भविष्य बनाने का ख्वाब पाले हैं. बीजेपी ने मौजूदा सांसद प्रियंका रावत का टिकट काट जैदपुर से विधायक उपेंद्र रावत को चुना है. चार बार के सांसद राम सागर रावत सपा के उम्मीदवार है. यहां लड़ाई त्रिकोणीय है और दिग्गजों की भूमिका अहम. मसलन सपा उम्मीदवार की पहचान जमीनी चेहरे के तौर पर है और क्षेत्र की राजनीति में प्रभावी हस्तक्षेप रखने वाले कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा का पूरा समर्थन. कुर्मी वोटरों की यहां अच्छी खासी संख्या है. मुस्लिमों में पैठ और बसपा का साथ समीकरण को दुरुस्त करता है. वहीं सर्वण वोटों की प्रभावी संख्या व मोदी प्रभाव उन्हें लड़ाई में मजबूत बनाता है. कांग्रेस दलितों के साथ मुस्लिम वोटों में सेंधमारी के भरोसे है.
प्रत्याशी
उपेंद्र रावत : बीजेपी
राम सागर रावत : सपा
तनुज पुनिया : कांग्रेस
कुल वोटर : 18.04 लाख
11. फैजाबाद : राम नगरी में किसका होगा बेड़ा पार
देश की सियासत बदलने वाली राम नगरी समय-समय पर सांसद बदलती रहती है. हर दल को मौका दे चुके फैजाबाद में बीजेपी का वनवास 1999 के बाद 2014 में लल्लू सिंह की जीत के बाद खत्म हुआ था. लल्लू इस बार भी पार्टी के उम्मीदवार हैं. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं दो बार यहीं से सांसद रहे निर्मल खत्री भी मैदान में है. सपा ने पूर्व सांसद मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन यादव पर भरोसा जताया है. देशभर में रामलहर की बुनियाद तय करने वाली इस सीट से मोदी लहर में बीजेपी को सपा, बसपा व कांग्रेस तीनों से ही अधिक वोट मिले थे लेकिन इस बार लड़ाई त्रिकोणीय है. कभी यहां के डीएम रहे रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट विजय शंकर पांडेय भी यहीं से सियासी पारी शुरू कर रहे हैं. बीजेपी राम-राष्ट्रवाद के साथ मोदी के भरोसे मैदान में है जबकि गठबंधन जातीय समीकरणों को साध रहे हैं. वहीं कांग्रेस शहरी व मुस्लिम वोटर्स के समर्थन की संभावनाओं पर नींव तैयार कर रही है.
प्रत्याशी
लल्लू सिंह : बीजेपी
आनंद सेन यादव : सपा
निर्मल खत्री : कांग्रेस
कुल वोटर : 18.04 लाख
12. बहराइच : सुरक्षित सीट पर 'असुरक्षित' बीजेपी
मान्यता है कि यहां के वोटर भी हर पार्टी की दुआ कबूल करते हैं. फिलहाल बीजेपी से यहां सांसद बनी सावित्री बाई फुले इस बार कांग्रेस की उम्मीदवार हैं. बीजेपी ने अक्षयवार लाल गौंड को उतारा है और सपा ने पार्टी के पुराने चेहरे शब्बीर अहमद वाल्मीकि पर फिर दांव लगाया है. एक बार फिर बीजेपी दलितों के साथ ही सवर्ण मतदाताओं के भरोसे है. कांग्रेस 2009 में यह सीट जीत चुकी है और मौजूदा सांसद को टिकट देकर उनकी क्षेत्र में पैठ व मुस्लिम वोटों में हिस्सेदारी के जरिए अपनी राह बना रही है. इस सीट पर मुस्लिम वोटर्स की संख्या 25 प्रतिशत से अधिक है इसलिए उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है.
प्रत्याशी
अक्षयवार लाल गौड़ : बीजेपी
शब्बीर अहमद वाल्मीकि : सपा
सावित्री बाई फुले : कांग्रेस
कुल वोटर : 17.13 लाख
13. कैसरगंज : अखाड़े में तीसरी पारी के लिए 'पहलवान'
गोंडा जिले की इस सीट से कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह अपनी तीसरी पारी खेलने के लिए मैदान में है. बसपा से चंद्रदेव राम यादव गठबंधन के उम्मीदवार है. कांग्रेस ने पूर्व सांसद विनय कुमार पांडेय को उम्मीदवार बनाया है. ब्राह्मण-ठाकुर बहुल इस सीट पर पिछली बार ब्रजभूषण 78 हजार वोट से जीते थे. मजबूत ब्राह्मण प्रत्याशी न होना भी ब्रजभूषण के पक्ष में है. बसपा उम्मीदवार का बाहरी होना यहां एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में कोर वोटर्स की एकजुटता पर ही गठबंधन की आस टिकी है.
प्रत्याशी
ब्रजभूषण सिंह : बीजेपी
चंद्रदेव राम यादव : बसपा
विनय कुमार पांडेय : कांग्रेस
कुल वोटर : 17.91 लाख
14. गोंडा : राजा बनाम 'पंडित' की लड़ाईअवधकीइस ‘रियासत’ मेंइसबारसियासीलड़ाई 'राजाबनामपंडित' कीहै. बीजेपीसेमौजूदासांसदवगोंडाइस्टेटकेउत्तराधिकारीकीर्तिवर्धनसिंहपार्टीकाफिरसेकमलखिलानेकेलिएमैदानमेंहैं. उनकेसामनेगठबंधनकेउम्मीदवारकेतौरपरविनोदकुमारसिंहउर्फपंडितसिंहहैं. कांग्रेसनेकेंद्रीयमंत्रीअनुप्रियापटेलकीमांकृष्णापटेलकोइससीटपरउताराहै. इससीटपरकुर्मीवोटर्सकीअच्छीखासीसंख्याहै, जिनकेसाथब्राह्मणवमुस्लिमवोटोंकीजुगलबंदीकरकांग्रेसकेबेनीप्रसादवर्मा 2009 मेंयहांसेसांसदबनेथे. फिलहालदोठाकुरोंकीलड़ाईमेंसबसेबड़ाअंतरछविकाहै. यहांब्राह्मणऔरमुस्लिमवोटबैंकदोनोंउम्मीदवारोंकीकिस्मततयकरेंगे. वहींकुर्मीवोटर्समेंकृष्णापटेलकीसेंधमारीबीजेपीकोपरेशानकरसकतीहै.
प्रत्याशी
कीर्तिवधन सिंह : बीजेपी
विनोद सिंह उर्फ पंडित : सपा
कृष्णा पटेल : कांग्रेस
कुल वोटर : 17.54 लाख