CM गहलोत-सोनिया की मुलाकात का निकला मुहूर्त, पायलट को मिलेगी मरुधरा-गुर्जर प्रदेश की कमान!

'सियासी सुलह' का निकला मुहूर्त जल्द होंगी मुरादें पूरी !
22 Sep 2021
Politalks.News/Rajasthan. राजस्थान कांग्रेस में सीएम गहलोत और सचिन पायलट कैंप में चल रही खींचतान मिटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान एक्शन में है. लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक नियुक्तियों पर अब जल्द काम आगे बढ़ने के आसार हैं. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन कह ही चुके हैं कि सारा रोड मैप तैयार है बस सीएम गहलोत के स्वस्थ होने का इंतजार है. तो अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी बीते सोमवार से एक्टिव हो गए हैं, आज बुधवार को भी सीएम गहलोत ने एक वीसी से डूंगरपुर कृषि कॉलेज का उद्घाटन किया साथ ही मंत्रिमंडल की बैठक भी ली. ऐसे में माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सोनिया गांधी और सीएम गहलोत की मुलाकात का मुहूर्त निकल चुका है. https://www.youtube.com/watch?v=enl4dNX2qek बताया जा रहा है कि जल्द ही सीएम गहलोत अब दिल्ली दरबार में जा सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि इस हफ्ते के अंत तक गहलोत का चार्टर दिल्ली में लैंड करने की पूरी संभावना है. इधर पंजाब में आलाकमान के एक्शन में आने से पायलट खेमे के आशाओं को पंख लगे हुए है. माना जा रहा है कि कनागत खत्म होते ही प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार, सचिन पायलट की भूमिका और अन्य बड़े फैसले अमल में लिए जा सकते हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अब इसको लेकर ज्यादा देरी की संभावना नहीं बची है. आपको बता दें, पंजाब कांग्रेस का मसला लगभग सुलझ चुका है. दलित मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने पंजाब में मास्टर स्ट्रोक चला है, तो अब बारी आती है राजस्थान की. कांग्रेस आलाकमान का फोकस अब राजस्थान पर है. 17 सितंबर को राहुल गांधी और सचिन पायलट के बीच मैराथन मीटिंग भी हुई है. माना जा रहा है कि राजस्थान में झगड़ा सुलझाने के लिए सचिन पायलट और उनके खेमे के नेताओं की मांगों पर एक्शन लेने की तैयारी है. पायलट कैंप के नेताओं को सम्मान के साथ सरकार और संगठन में एडजस्ट करने को लेकर लगभग सब तय हो चुका है. कांग्रेस हाईकमान राजस्थान को लेकर फाइनल फैसले लेने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ठीक होने का इंतजार कर रहा है. बताया जा रहा है कि इस हफ्ते के अंत तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली बुलाकर चर्चा कर सकती हैं, इसके बाद बदलाव का रास्ता तैयार हो जाएगा. यह भी पढ़ें- पंजाब के बाद हरियाणा कांग्रेस में बवाल? हुड्डा ने अपने ‘अड्डे’ पर अचानक बुलाई विधायकों की बैठक पंजाब में कांग्रेस के सख्त एक्शन के बाद ये तो माना जा रहा है कि राजस्थान में अब बदलाव में ज्यादा समय नहीं लगेगा. सीएम गहलोत भी हाईकमान के रुख को देखते हुए जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार के लिए हाथ खोल सकते हैं. ये भी तय है कि सत्ता और संगठन में पायलट कैंप के नेताओं को पॉजीशन भी मिल जाएगी. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती हाईकमान के सामने सचिन पायलट को एडजस्ट करने की है. कांग्रेस सूत्रों की माने तो इसको लेकर भी मंथन और निर्णय लगभग हो चुका है केवल सीएम गहलोत से एक बार बात करके आगे बढ़ाने की देरी है. आपको बता दें, पिछले साल हुई सियासी बगावत के बाद से सचिन पायलट कांग्रेस में किसी पद पर नहीं हैं. टोंक विधायक सचिन पायलट के समर्थकों का तो मानना है कि सीएम गहलोत को गद्दी से उतार कर तुरंत पायलट को सीएम बना दिया जाना चाहिए ताकि 2023 में राजस्थान की सत्ता कांग्रेस के हाथ से नहीं निकले. लेकिन हाल फिलहाल में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा हैं. क्योंकि विधायकों की सिर की गिनती अगर होती है तो पायलट इसमें मात खा जाएंगे, ये बात पायलट को भी पता है. तो अब पायलट की भूमिका राजस्थान और केन्द्रीय संगठन में उनके सम्मान के हिसाब दिए जाने की है. कांग्रेस सूत्रों की माने तो पायलट को फिर से पीसीसी की कमान सौंपी जा सकती है. लेकिन साथ ही पायलट 'गुर्जर प्रदेश' गुजरात की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है. यह भी पढ़ें- करणी सेना के विरोध के बीच मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण, अराजक तत्वों ने हटाया गुर्जर शब्द सूत्रों की माने तो आलाकमान चाहता है कि पायलट गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनाए और फिर राजस्थान में सीएम बनें. अब सवाल उठता है कि अगर पायलट को गुजरात का प्रभार दिया गया तो राजस्थान में पीसीसी में कामकाज कैसे चलेगा. इसका रास्ता भी आलाकमान और सीएम गहलोत ने निकाल लिया है. पायलट के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जा सकते हैं ताकि पायलट के निर्देशों पर ये चारों राजस्थान के दौरों पर रहें और कार्यकर्ताओं के बीच में जाएं. प्रदेश प्रभारी अजय माकन भी कह चुके हैं कि सचिन पायलट को जिम्मेदारी पर फैसला करना हाईकमान के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा है, इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के स्तर से फैसला होना है. हालांकि पंजाब में जिस तरह से आलाकमान ने चौंकाते हुए सिद्धू को सीएम ना बनाकर दलित चन्नी पर दांव खेला है उससे कहा जा रहा है कि आलाकमान के अगले कदम का अंदाजा लगाना मुश्किल है.