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मोदी सरकार के कृषि विधेयक ने बढ़ाई शिवराज की टेंशन, मुख्यमंत्री जुटे किसानों की आवभगत में

23 सितंबर 2020
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मोदी सरकार के कृषि विधेयक ने बढ़ाई शिवराज की टेंशन, मुख्यमंत्री जुटे किसानों की आवभगत में

Politalks.News/Madhyapradesh. केंद्र की भाजपा सरकार ने कृषि विधेयक संसद से पारित कराकर किसानों के साथ मध्य प्रदेश ‘शिवराज सिंह चौहान सरकार की भी टेंशन बढ़ा दी है‘. अब आप कहेंगे एमपी में तो भाजपा की सरकार है वहां सीएम की टेंशन क्यों बढ़ गई? बात को आगे बढ़ाने से पहले कुछ वर्ष आपको पीछे लिए चलते हैं. साल 2013 से 18 तक तत्कालीन शिवराज सिंह सरकार के कार्यकाल में मध्य प्रदेश के किसान नाखुश थे. यही नहीं ‘वर्ष 2018 में राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में किसानों की नाराजगी शिवराज सिंह चौहान को सत्ता से बाहर करने की एक बड़ी वजह बनी थी‘. इसी साल मार्च में शिवराज सिंह काग्रेस … Read more

Politalks.News/Madhyapradesh. केंद्र की भाजपा सरकार ने कृषि विधेयक संसद से पारित कराकर किसानों के साथ मध्य प्रदेश ‘शिवराज सिंह चौहान सरकार की भी टेंशन बढ़ा दी है‘. अब आप कहेंगे एमपी में तो भाजपा की सरकार है वहां सीएम की टेंशन क्यों बढ़ गई? बात को आगे बढ़ाने से पहले कुछ वर्ष आपको पीछे लिए चलते हैं. साल 2013 से 18 तक तत्कालीन शिवराज सिंह सरकार के कार्यकाल में मध्य प्रदेश के किसान नाखुश थे. यही नहीं ‘वर्ष 2018 में राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में किसानों की नाराजगी शिवराज सिंह चौहान को सत्ता से बाहर करने की एक बड़ी वजह बनी थी‘.

इसी साल मार्च में शिवराज सिंह काग्रेस के बगावती नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ की सत्ता छीन कर खुद मुख्यमंत्री बन गए. शिवराज सिंह के चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के एक महीने बाद ही मध्य प्रदेश के जिले मंदसौर और श्योपुर में पुलिस ने किसानों पर लाठियां भांजी और गोली तक चला दी थी, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे. इस गोलीकांड के बाद शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर प्रदेश के किसानों के निशाने पर आ गए. इसके बाद राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ ने शिवराज सिंह पर जमकर हमला बोला था.

यह थी पुरानी बात, अब आइए चर्चा को आगे बढ़ाते हैं. ‘पिछले दिनों जब केंद्र की भाजपा सरकार किसान विधेयक संसद में पारित कराने की तैयारी कर रही थी तब मध्यप्रदेश में बैठे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का दिल अंदर ही अंदर रो रहा था लेकिन बात एक ही विचारधारा और पार्टी की थी इसलिए शिवराज सिंह चौहान इसका विरोध नहीं कर पाए‘. पिछले कुछ माह से मुख्यमंत्री चौहान का पूरा फोकस राज्य में होने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर टिका हुुआ है. 28 में से सबसे अधिक 17 सीटों पर ग्वालियर संभाग में चुनाव होने जा रहे हैं. यह क्षेत्र ऐसा है जहां के किसान शिवराज सिंह से पहले से ही अधिक नाराज हैं. किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए बताते हैं शिवराज ने क्या नया सियासी दांव खेला है.

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उपचुनाव को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान किसानों की सभी डिमांड कर रहे हैं पूरी-

राज्य में विधानसभा के उपचुनाव को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान पूरा ध्यान किसानों को खुश करने में लगा रहे हैं. मुख्यमंत्री जानते हैं अगर इस बार किसानों ने साथ नहीं दिया तो हो सकता है कि उनको एमपी की सत्ता चलाना मुश्किल हो जाए. केंद्र सरकार ने कृषि विधेयक लाकर देश के साथ मध्य प्रदेश के किसानों को भी नाराज कर दिया है. ऐसे में प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में को देखते हुए शिवराज सिंह की मुश्किल बढ़ा दी है. कृषि विधेयक पर एमपी के किसानों का आक्रोश सड़क पर आ जाए उससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने किसानों पर सौगात बरसानी शुरू कर दी है.

हाल ही में मुख्यमंत्री चौहान ने सहकारी बैंकों को 800 करोड़ रुपये दिए हैं, ताकि वे राज्य में किसानों को जीरो फीसदी ब्याज पर ऋण मुहैया करा सकें. इससे पहले मुख्यमंत्री चौहान ने एलान किया कि अब किसानों को हर साल 10 हजार रुपये की मदद दी जाएगी. चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कल्याण योजना के तहत किसानों को दो किस्तों में चार हजार दिए जाएंगे. इसके अलावा सीएम शिवराज सिंह ने कहा प्रधानमंत्री कल्याण स्कीम के तहत छह हजार रुपये भी किसानों को सौंपे जाएंगे. बता दें कि एमपी में भाजपा को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए कम से कम नौ सीटों पर कब्जा जमाना होगा. कुछ दिनों पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि राज्य में होने वाले उपचुनाव प्रदेश के भविष्य को तय करने वाला चुनाव है, तभी से सीएम शिवराज सिंह चौहान किसानों की आवभगत में लगे हुए हैं.

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उपचुनाव में जीत नहीं मिली तो टेंपरेरी मुख्यमंत्री रह ही जाऊंगा शिवराज सिंह

28 सीटों पर होने वाले इन उपचुनाव को सूबे की सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के परमानेंट मुख्यमंत्री बनना चाहते है. उनके सियासी भविष्य का फैसला राज्य में होने वाले उपचुनाव पर निर्भर है. दो दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंदसौर जिले में होने वाले एक विधानसभा के उपचुनाव क्षेत्र में पहुंचे थे, वहां उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जो सियासी गलियारों में खूब चर्चित बना हुआ है. ‘यहां जनता के बीच शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी मैं मध्य प्रदेश का टेंपरेरी मुख्यमंत्री हूं, उपचुनाव में जीत नहीं मिली तो टेंपरेरी मुख्यमंत्री ही रह जाऊंगा, अगर जीत मिल गई तभी परमानेंट सीएम हो पाऊंगा‘.

नालायक शिवराज सिंह ने चलवाईं गोलियां, हमने किया किसानों का ऋण माफ – कमलनाथ

दूसरी ओर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ उपचुनाव को लेकर शिवराज सिंह चौहान को घेरने में जुटे हुए हैं. कमलनाथ ने कहा कि शिवराज आरोप लगा रहे हैं कि किसानों का कर्ज दस दिन में माफ नहीं किया है, ‘शिवराज आप इतने नालायक तो नहीं हैं‘ कि ये भी न जानते हों कि 53 लाख का कर्जा माफ करने की कार्रवाई कैसे होगी. कमलनाथ ने 26 लाख किसानों का कर्जा माफ करने का दावा करते हुए कहा कि हमने फसल ऋण माफ किए थे. कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सिंह ने किसानों पर सिर्फ गोलियां ही चलाई हैं. कमलनाथ के नालायक वाले बयान पर सीएम शिवराज ने रामचरित मानस की चौपाई ‘जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी‘ का उल्लेख किया और कहा कि हमने कभी उनको नालायक नहीं कहा. चौहान ने कहा कि वे पहले भी मुझे नालायक कह चुके हैं. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कौन कैसा है, इसका जवाब जनता देगी.

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