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कैबिनेट गठन से पहले तकरार, CBI को राज्यपाल ने दी TMC नेताओं के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी

10 मई 2021
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कैबिनेट गठन से पहले तकरार, CBI को राज्यपाल ने दी TMC नेताओं के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी

Politalks.News/WestBengalPolitics. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच ठन गई है. राज्यपाल धनखड़ ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मौजूदा तीन विधायकों के खिलाफ सीबीआई को मामला चलाने की इजाजत दे दी है. बड़ी बात यह है कि इनमें से दो विधायक आज ही मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. इनमें फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं. इसके अलावा राज्यपाल ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी के खिलाफ भी मामला चलाने की हरी झंडी दे दी है. वहीं दूसरी और टीएमसी कार्यकर्ता की शिकायत के बाद कोलकाता पुलिस ने बीजेपी नेता और … Read more

Politalks.News/WestBengalPolitics. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच ठन गई है. राज्यपाल धनखड़ ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मौजूदा तीन विधायकों के खिलाफ सीबीआई को मामला चलाने की इजाजत दे दी है. बड़ी बात यह है कि इनमें से दो विधायक आज ही मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. इनमें फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं. इसके अलावा राज्यपाल ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी के खिलाफ भी मामला चलाने की हरी झंडी दे दी है. वहीं दूसरी और टीएमसी कार्यकर्ता की शिकायत के बाद कोलकाता पुलिस ने बीजेपी नेता और विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारक रहे मिथुन चक्रवर्ती और राज्य बीजेपी चीफ दिलीप घोष के खिलाफ केस दर्ज किया है. टीएमसी कार्यकर्ता ने दो दिन पहले दर्ज कराई अपनी शिकायत में कहा था मिथुन चक्रवर्ती और दिलीप घोष को बंगाल में हिंसा और शांति भंग करने के लिए उकसाया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती और दिलीप घोष ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण दिए थे. टीएमसी कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 (ए), 504 और 505 के तहत दोनों नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है. रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में दिलीप घोष की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है. जबकि, मिथुन चक्रवर्ती के वकील ने कहा कि एफआईआर की कॉपी मिलने के बाद हम हाई कोर्ट जाएंगे. वहीं, हरोड़ा पुलिस ने पिछले महीने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दर्ज एक केस को लेकर केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो को समन भेजा है और पूछताछ के लिए बुलाया है.

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दूसरी ओर रविवार को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक अनुरोध पर फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी दे दी है. ये सभी उस समय मंत्री थे जब कथित नारद स्टिंग टेप सामने आया था. यह जानकारी राजभवन के एक अधिकारी ने रविवार को दी. राजभवन की ओर से बताया गया कि राज्यपाल कानून के संदर्भ में मंजूरी प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 164 के संदर्भ में ऐसे मंत्रियों की नियुक्ति प्राधिकारी हैं.

ममता मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके हैं चारों
बता दें, फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी, ये चारों 2014 में तब ममता बनर्जी कैबिनेट में मंत्री थे जब टेप कथित तौर पर बनाए गए थे. हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में हकीम, मुखर्जी और मित्रा तृणमूल कांग्रेस के फिर से विधायक चुने गए हैं, जबकि भाजपा में शामिल होने के लिए टीएमसी छोड़ चुके चटर्जी ने दोनों पार्टियों के साथ संबंध तोड़ लिए हैं. गौरतलब है कि, पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों में शारदा स्कैम और नारदा स्कैम लगातार चल रहे हैं, जिनकी सीबीआई जांच भी कर रही है. इन मामलों में अलग-अलग नेताओं के नाम सामने आए हैं. इन नेताओं के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाया जाए इसको लेकर राज्यपाल से अनुमति ली गई है.

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क्या था नारद स्टिंग?
नारद स्टिंग टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले सार्वजनिक किए गए थे. दावा किया गया था कि इन्हें 2014 में बनाया गया था और इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले व्यक्तियों को कथित रूप से वादा किए गए अनुग्रहों के बदले में एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से धन प्राप्त करते दिखाया गया था. स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारद न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल द्वारा किया गया था. कलकत्ता हाई कोर्ट ने मार्च, 2017 में स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच का आदेश दिया था.

बंगाल में ममता मंत्रिमंडल का गठन आज
बता दें, पश्चिम बंगाल में आज होने वाले ममता मंत्रिमंडल के गठन में कुल 43 मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे. इसमें 24 कैबिनेट मंत्री, 10 स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) और 9 राज्य मंत्री होंगे. सूत्रों के अनुसार इस लिस्ट में पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का नाम भी शामिल है.

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कौन-कौन नेता हो सकते हैं कैबिनेट मंत्री?
टीएमसी नेता अमित मित्रा,पार्थ चटर्जी,सुब्रत मुखर्जी,साधन पाण्डे,ज्योतिप्रिय मल्लिक,ब्रात्य बसु,बंकिम चंद्र हाजरा,अरूप विश्वास,मलय घटक,डॉ मानस भुइयां,सोमेन महापात्र,उज्ज्वल विश्वास, अरूप राय, फिरहाद हकीम, रथीन घोष, डॉ शशि पांजा, चंद्रनाथ सिंह, शोभनदेव चटोपाध्याय, पुलक राय, गुलाम रब्बानी, विप्लव मित्र, जावेद खान, सपन देबनाथ और सिद्दिकुल्ला चौधरी कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं.

इन नेताओं को बनाया जा सकता है स्वतंत्र प्रभार, राज्य मंत्री
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों में बेचाराम मन्ना, सुब्रत साहा, हुमायूं कबीर, अखिल गिरि, चंद्रिमा भट्टाचार्य, रत्ना दे नाग, संध्यारानी टुडू 32, बुलु चिक बराई, सुजीत बोस और इंद्रनील सेन को स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) की जिम्मेदारी मिल सकती है.

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इन नेताओं को मिल सकती है राज्य मंत्री की जिम्मेदारी
वहीं दिलीप मंडल, अखरूज्जमां, शिउली साहा, श्रीकान्त महतो, जसमीन शबीना, वीरवाहा हांसदा, ज्योत्सना मंडी, मनोज तिवारी और परेश चन्द्र अधिकारी राज्य मंत्री बनेंगे.

आपको बता दें कि सीएम ममता बनर्जी ने नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद दोपहर तीन बजे कैबिनेट की पहली बैठक भी बुलाई है. बैठक में कई बड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई गई है.

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