कल बनेगी या बचेगी ‘कमल’नाथ सरकार, सियासी संकट पर आया ‘सुप्रीम’ फैसला, कल होगा ‘फ्लोर टेस्ट’

अंतिम पड़ाव पर आ पहुंचा है एमपी का सियासी ड्रामा, सुप्रीम कोर्ट ने बदला स्पीकर का फैसला, कर्नाटक सरकार को बागी विधायकों को सुरक्षा के साथ मप्र भेजने की दी नसीहत

Shivraj Vs Kamalnath
Shivraj Vs Kamalnath

पॉलिटॉक्स न्यूज/एमपी. पिछले करीब 10 दिनों से मध्य प्रदेश में चल रहा सियासी ड्राम अब अपने अंतिम पड़ाव पर आ पहुंचा है. सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया है. साथ ही कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी करते हुए सभी 22 बागियों को सुरक्षा देने और सुरक्षित मध्य प्रदेश पहुंचाने को कहा. पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने अदालत के फैसले को सत्य एवं न्याय की जीत बताया, साथ ही बहुमत परीक्षण में कमलनाथ सरकार के हारने का दावा किया. कोर्ट के इस सुप्रीम फैसले के बाद कमलनाथ के माथे पर बल आना स्वभाविक है.

शिवराज सिंह सहित अन्य 9 विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मप्र विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति के फैसले को पलटते हुए शुक्रवार को विशेष सत्र बुलवाने का आदेश दिया. इससे पहले स्पीकर ने सदन को 26 मार्च तक स्थगित कर दिया था. विशेष सत्र में शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का भी निर्देश दिया गया है. सवोच्य अदालत ने ये भी कहा कि बाग़ी विधायकों को दबाव में विधानसभा नहीं बुलाया जा सकता और न ही किसी अन्य विधायक को सदन में आने के लिए विवश किया जा सकता है.

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बहुमत न होने के चलते कमलनाथ के हाथों से मध्य प्रदेश का फिसलना करीब करीब तय है. बात करें मप्र के सियासी गणित की तो प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. इसमें से दो सीट खाली है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा भेजा है. अगर ये विधायक सदन में नहीं पहुंचते जैसे कि उम्मीद भी है, ऐसे में मौजूदा विधायकों की संख्या 206 हो जाएगी. अब सदन में बहुमत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी. बीजेपी के पास 107 विधायकों का संख्या बल है जबकि कांग्रेस के पास निर्दलीय और सपा, बसपा को मिलाकर 99 विधायक. ऐसे में मप्र में कमल का खिलना तय है.

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सत्य और न्याय की जीत बताया. शिवराज ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बीजेपी का किला मजबूत है. जनता की आहें कमलनाथ सरकार को ले डूबी. हमारा पूरा विश्वास है जनता के साथ धोखा करने वाली, पीठ पर छुरा घोंपने वाली और माफिया सरकार कल फ्लोर टेस्ट में पराजित होगी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्पीकर प्रजापति के वकील मनु सिं​घवी और दुष्यंत दवे ने पूरजोर से बागियों के बंधन बनाए जाने और इस्तीफों को गलत ठहराने की कोशिश करते हुए जांच के लिए दो सप्ताह का समय मांगा. साथ ही सिंघवी ने स्पीकर के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया. इस पर राज्यपाल के वकील तुषार मेहता ने स्पीकर पर आदेश न मानने का आरोप लगाया. वहीं बीजेपी के वकील मुकुल रोहितगी ने कर्नाटक फॉर्मूले की दलील देते हुए तुरंत प्रभाव से फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की. वहीं बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने विधायकों के वीडियो और लिखित कागज पेश करते हुए सहमति और बिना दवाब के इस्तीफे देने की बात कही.

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इस पर जवाब देते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने हॉर्स ट्रेंडिंग न होने की बात की. इसके बाद चंद्रचूड और जस्टिस हेमंत गुप्ता की दो सदस्यीय बैंच ने फैसला शिवराज पक्ष में सुनाते हुए शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलवाने और बहुमत परीक्षण कराने का निर्देश दिया. बहुमत परीक्षण हाथ उठाकर किया जाएगा और पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी होगी.

अब मध्य प्रदेश की सियासी उठा पटक में ज्यादा हेरफेर होने की संभावना न के बराबर दिख रही है. साथ ही बागी विधायकों के मत परीक्षण में भाग लेने की संभावना भी क्षणिक भर है. कमलनाथ मैजिक के भी होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में फिर एक बार बीजेपी का कमल खिलने के लिए तैयार है और कमलनाथ को सिंधिया की नाराजगी के चलते विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहना होगा.

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