अब कैलाश विजयवर्गीय पर लगे एमपी में BJP को हराने और सरकार गिराने के लिए साजिश रचने के आरोप

सिंधिया समर्थकों की बीजेपी में एंट्री से नाराजगी अब खुलकर आ रही सामने, भंवर सिंह शेखावत से हुई शुरुआत, विजयवर्गीय अति-महत्वकांक्षी हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं - शेखावत

0
कैलाश विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय

पॉलिटॉक्स न्यूज/एमपी. पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ बीजेपी की शरण में आने और उनके साथ साथ 22 अन्य कांग्रेसी विधायकों के पार्टी में शामिल होने से कई सीनियर नेता नाराज हैं. अभी तक ये नाराजगी सामने नहीं आ रही थी लेकिन मंत्रिमंडल के विस्तार की खबरों और 24 सीटों के लिए होने वाले उप चुनाव के करीब आने के बाद बीजेपी नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. ये नाराजगी खासतौर पर उन नेताओं में ज्यादा हैं जो पिछले चुनावों में हारे हुए हैं और उप चुनावों में भी उन्हें टिकट से महरूम रखा जा रहा है. इस नाराजगी की शुरुआत बीजेपी नेता और पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत से हो चुकी है जिन्होंने जाने अनजाने कैलाश विजयवर्गीय से पंगा ले लिया है.

बदनावर से पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत बीजेपी के दिग्गज़ एवं वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय पर 2018 के एमपी विधानसभा में बीजेपी को हराने की साजिश रचने और बागियों को फंड मुहैया कराने का गंभीर आरोप जड़ा है. शेखावत ने ये भी कहा कि विजयवर्गीय अति-महत्वकांक्षी हैं और सीएम बनना चाहते हैं. शेखावत 2018 में बीजेपी के टिकट पर बदनावर से चुनाव हार गए थे.

यह भी पढ़ें: शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार 30 जून को! सिंधिया के 9 और बीजेपी के 19 मंत्री होंगे नई केबिनेट में

अपने आरोपों के प्रहार को शेखावत ने यहीं खत्म नहीं किया. पूर्व बीजेपी विधायक ने ये भी कहा कि बीजेपी महासचिव कैलाश अभी भी शिवराज सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. शेखावत ने ये भी कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कैलाश ने मालवा क्षेत्र में बीजेपी के 10-12 बागियों को मैदान में उतारा था. उन लोगों ने बीजेपी के आधिकारिक वोटों में कटौती की थी. वरिष्ठ नेता ने बागियों को वित्तीय संरक्षण भी दिया था.

आरोप काफी गंभीर है लेकिन सत्ता और संगठन में कद को देखते हुए कैलाश विजयवर्गीय पर ये मौखिक बयान कोई खास असर नहीं डाल पाएंगे, ये निश्चित है. हालांकि शेखावत के आरोप लगाने और उसके पीछे छिपी उनकी नाराजगी के पीछे वजह जरूर है. दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव में एमपी राज्य सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत बदनावर सीट से चुनाव हार गए थे. कांग्रेस के राज्यवर्धन सिंह दतिगांव ने उन्हें हराया था. राज्यवर्धन दतिगांव अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

उपचुनाव में पार्टी ने घोषणा कर दिया है कि बदनावर से दतिगांव ही बीजेपी के उम्मीदवार होंगे जबकि इस सीट पर शेखावत की नजर थी. इसके बाद से शेखावत नाराज हो गए हैं. दतिगांव के लिए मौखिक घोषणा के बाद शेखावत के बारे में ये अफवाह भी उड़ी कि शेखावत के कहने पर ही 500 से अधिक बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

यह भी पढ़ें: एमपी: 24 सीटों का उपचुनाव 230 सीटों के विधानसभा चुनाव से कम नहीं, सरकार का भविष्य होगा तय

इसके बाद पार्टी ने सख्त होते हुए उपचुनाव के दौरान किसी भी नेता को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे दी. इस बात को ज्यादा समय भी नहीं हुआ और शेखावत ने खुले आम जंग का ऐलान कर दिया, वो भी ऐसे कद्दावर नेता के खिलाफ जो खुद पश्चिम बंगाल में पार्टी की नैया को पार कराने में जी जान एक कर रहा है. विजयवर्गीय की मेहनत का ये कमाल है कि पार्टी को लोकसभा में 18 सीटें जीतने में कामयाबी मिल पायी. ऐसे में न ही स्थानीय स्तर पर और न ही पार्टी आलाकमान को विजयवर्गीय की मेहनत, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पर किसी को कोई संदेह नहीं है.

अब पार्टी इस सियासी बयानबाजी पर सख्ती दिखा सकती है जिसके तहत शेखावत पर कार्रवाई भी हो सकती है. उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है. इस मामले में बीजेपी के एमपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा है कि पार्टी इस संबंध में भंवर सिंह शेखावत के साथ चर्चा करेगी और जरूरी हुई तो कार्रवाई भी करेगी.

मीडिया से बात करते हुए वीडी शर्मा ने कहा है कि हम पार्टी के भीतर मतभेदों से अवगत हैं. हमने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए शेखावत को भोपाल पहुंचने के लिए कहा है. हम आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे. यदि आवश्यक हुआ तो अंसतुष्टों के खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय को उपचुनाव के लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. वे मालवा इलाके के 5 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और हम पांचों सीटें जीतेंगे.

यह भी पढ़ें: ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर शिवराज सरकार ने खेला मास्टर स्ट्रोक

हालांकि बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने अपना बयान देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की लेकिन बातों ही बातों में ये जरूर बता दिया कि पार्टी में आंतरिक मतभेद तो चल रहे हैं. उन्होंने ये भी इशारे से बता दिया कि सिंधिया और उनके समर्थित 22 विधायकों के सत्ता में भागीदारी या उप चुनाव में फिर से टिकट दिए जाने के चलते पार्टी के कई नेता नाराज चल रहे हैं. ऐसे में उन्हें संभालना मुश्किल होता जा रहा है. बीजेपी को ये भी पता है कि कांग्रेस भी चाहती है कि जल्दी से जल्दी मंत्रिमंडल विस्तार हो ताकि असंतुष्ठ बड़े नेताओं को अपने पाले में किया जा सके.

खैर… क्या हिगा क्या नहीं, ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन जिस तरह बीजेपी की अंर्तकलह खुलकर बाहर आ रही है, उप चुनावों से पहले ही एमपी बीजेपी और शिवराज सिंह की चेहरे की हवाईयां उड़ते दिख रही है.

Leave a Reply