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सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की पहली बैठक के बाद फिर जगी राजनीतिक नियुक्तियों की आस

17 फ़रवरी 2020
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सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की पहली बैठक के बाद फिर जगी राजनीतिक नियुक्तियों की आस

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के निर्देश पर राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के लिए बनाई गई समन्वय समिति की पहली बैठक रविवार को सुबह 10.30 मुख्यमंत्री आवास आयोजित हुई. प्रदेश प्रभारी एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष अविनाश पांडे के नेतृत्व में करीब 2 घण्टे चली इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई जिनमें प्रदेश में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियां और अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों को लेकर की गई चर्चा प्रमुख हैं. सूत्रों की मानें तो ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों के लिए 15 मार्च तक नाम फाइनल कर दिए जाएंगे. सभी प्रभारी … Read more

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के निर्देश पर राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के लिए बनाई गई समन्वय समिति की पहली बैठक रविवार को सुबह 10.30 मुख्यमंत्री आवास आयोजित हुई. प्रदेश प्रभारी एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष अविनाश पांडे के नेतृत्व में करीब 2 घण्टे चली इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई जिनमें प्रदेश में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियां और अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों को लेकर की गई चर्चा प्रमुख हैं. सूत्रों की मानें तो ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों के लिए 15 मार्च तक नाम फाइनल कर दिए जाएंगे. सभी प्रभारी मंत्रियों को इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं, 16 मार्च तक सभी प्रभारी मंत्रियों को राजनीतिक नियुक्तियों पर अपने प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए कहा है.

पहली ही बैठक में नहीं बना कोरम

समन्वय समिति की पहली बैठक में अविनाश पांडे के अलावा बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल ही मौजूद रहे. वहीं शॉर्ट नोटिस पर बुलाई गई इस पहली बैठक में निजी कारणों के चलते दीपेंद्र सिंह शेखावत, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, हरीश चौधरी और हेमाराम चौधरी नहीं पहुंच सके. इस कारण यह बैठक अब अगले सप्ताह पूरे कोरम के साथ फिर की जाएगी.

बयानबाजी पर लगे लगाम, संगठन करे सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का काम

समन्वय समिति की पहली बैठक का मुख्य मुद्दा सत्ता और संगठन के बीच होने वाली बयानबाजी पर लगाम लगाना रहा. बेवजह होने वाली बयानबाजी का नुकसान सत्ता और संगठन दोनों को उठाना पड़ता है और साथ ही विपक्ष को भी सरकार पर सवाल खड़े करने का मौका मिल जाता है. ऐसे में बैठक में यह तय किया गया कि अगर किसी को कोई शिकायत है तो वो पार्टी स्तर पर शिकायत करे. मीडिया में और सार्वजनिक रूप से अब कोई बयानबाजी करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. बैठक में इस पर बात पर ज्यादा फोकस किया गया कि संगठन और सत्ता मिलकर काम करे, संगठन के लोग सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएं.

अन्य मुद्दों पर भी हुई चर्चा

करीब 2 घण्टे चली इस बैठक में आगामी पंचायतीराज चुनावों के साथ शेष रहे निगम चुनावों में कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई. इसके साथ ही बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों को भविष्य में सौपी जाने वाली जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा की गई. बैठक में SC-ST हितों के लिये पुरजोर आवाज बुलंद करने का भी निर्णय लिया गया एवं प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई गई.

बैठक के बाद बोले अविनाश पांडे

वहीं बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी और समन्वय समिति के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने कहा कि बैठक में कुछ सदस्य शामिल नहीं हो सके इसलिए समन्वय समिति की एक और बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी. पांडे ने बताया कि 15 मार्च तक सभी ब्लॉक और जिला स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां फाइनल कर दी जाएंगी, प्रभारी मंत्रियों को इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं. वहीं पांडे ने बताया कि जनता के ज्यादा से ज्यादा काम हों इसके लिए प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में लगातार जनसुनवाई की जा रही है.

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इससे पहले समनवय समिति की बैठक में शिरकत करने और एससी-एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए फैसले पर केंद्र सरकार के लचड़ रवैये के खिलाफ धरने में शामिल होने आए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने जयपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से रूबरू होते कहा कि कॉर्डिनेशन कमेटी का उद्देश्य बेहतर समन्वय बनाना है. सरकार के कार्यों और उपलब्धियों को समन्वय के माध्यम से जनता तक पहुंचाएंगे.

बता दें, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के पहले और बाद से सत्ता और संगठन के बीच लम्बी अदावत चली आ रही है. ऐसे में पिछले 13 महीने में ऐसे कई मौके आए है जब सत्ता और संगठन के नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर शब्दबाण चलाए. सीएम अशोक गहलोत व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच की बयानबाजी और उस पर विपक्ष द्वारा किये गए प्रहार भी किसी से छिपे नहीं है. इस तरह की शिकायतें दिल्ली आलाकमान तक भी कई बार पहुँची जिसके बाद आलाकमान के निर्देश पर सत्ता व संगठन के बीच बेहतर तालमेल बैठाने के लिए समन्वय समिति का गठन किया गया.

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गौरतलब है कि 20 जनवरी को पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे की अध्यक्षता में समन्वय समिति का गठन किया था. इस आठ सदस्यीय समन्वय समिति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के अलावा विधायक हेमाराम चौधरी, पूर्व स्पीकर और विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत और महेंद्रजीत सिंह मालवीय को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था.

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