पायलट के कोटा दौरे के बाद 2 और बच्चों की हुई मौत, न कोई जिम्मेदारी तय हुई ना लिया गया कोई एक्शन तो क्या ये था सिर्फ जुबानी मलहम

आप सरकार में उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं, खाली बयानबाजी का जुबानी मलहम लगाने की जगह सरकार में अपने होने का अहसास करवाएं

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. रविवार-सोमवार में हुई 2 और बच्चों की मौत के बाद यहां बच्चों की मौत का आंकड़ा पहुंचकर 112 हो गया है. कमोबेश ऐसे ही हालात प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों के भी सामने आने लगे हैं, जिनमें जोधपुर, बीकानेर के बाद अब अजमेर में भी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. उस पर प्रदेश के राजनेता सिर्फ अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं. विपक्ष जहां इस पर अपनी राजनीति चमकाने में लगा है वहीं वर्तमान सरकार के मंत्री और जिम्मेदार भी सिर्फ बयानबाजी करते नजर आ रहे हैं. प्रदेश के मंत्री, नेता और विधायक जिन्हें जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा वे लोग भी सिर्फ एक दूसरे पर बयानबाजी करके इस विषय पर जवाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं.

लेकिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से प्रदेश की जनता को ऐसी उम्मीद नहीं है कि वे भी सिर्फ बयानबाजी करके चार डायलॉग देकर जनता को भगवान भरोसे छोड़ जाएं. हाल ही में उपमुख्यमंत्री और सचिन पायलट यानी “छोटे सरकार” ने शनिवार को कोटा अस्पताल का दौरा किया और बच्चों की मौत पर गहरा दुःख व्यक्त किया. यही नहीं पायलट ने नैतिक साहस दिखाते हुए अपनी ही सरकार के काम को असन्तोषजनक बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री को अच्छी खासी नसीहत देते हुए जवाबदेही तय करने की बात भी कही. पायलट के इस कदम की जहां विपक्ष ने भी तारीफ की वहीं पूरे नेशनल मीडिया में पायलट का यह बयान सुर्खियों में छाया रहा.

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लेकिन उसके बाद क्या.. क्या यह सब मीडिया में छा जाने के लिए ही था, क्यों कि एक्शन तो कुछ लिया ही नही गया. आपने सधी हुई बयानबाजी की और वहां से निकल कर अपने विधायक मित्र के फार्म हाउस पर चले गए. दूसरे दिन आपने रणथंभौर में बाघिन की अठखेलियों का लुफ्त उठाया और वापस जयपुर लौट आए. आपके कोटा अस्पताल के दौरे को 48 घण्टे से ऊपर हो गए और उसके बाद भी वहां 2 और बच्चों की मौत हो गई लेकिन जिम्मेदारी तो किसी की भी तय नहीं हुई. बच्चों की मौत के जिम्मेदारों को सजा दिलवाया जाना या जो हो रहा है उसे रोकने का काम जो होना चाहिए था वो तो हुआ ही नहीं.

छोटे सरकार आप अभी विपक्ष में नहीं हैं बल्कि सरकार में हैं और सरकार में भी कोई छोटा पद नहीं बल्कि उपमुख्यमंत्री पद की शोभा बढ़ा रहे हैं, ऐसे में आपकी जिम्मेदारी भी बनती है कि आप खुद व्यवस्थाओं को ना सिर्फ देखें बल्कि उपमुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें दुरुस्त करने के लिए उचित कदम भी उठाएं. बच्चों की मौतों के जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर उचित दंड दिलवाएं ताक़ि बच्चों की मौतों का सिलसिला रुक सके, साथ ही ऐसे कदम उठाए जाएं जिनसे न सिर्फ कोटा बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में हो रही बच्चों की मौतों को रोकने का स्थायी समाधान हो सके.

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आप सरकार में उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं. कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रदेश की जनता को आपसे बहुत उम्मीदें हैं. खाली बयानबाजी का जुबानी मलहम लगाने की जगह सरकार में अपने होने का अहसास करवाएं. क्योंकि ये जो पब्लिक है ये सब जानती है…

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