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जश्न के पोस्टर्स में पंडितजी की फ़ोटो नहीं होने पर बिफरे सीएम गहलोत के बयान पर राठौड़ का पलटवार

31 अगस्त 2021
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जश्न के पोस्टर्स में पंडितजी की फ़ोटो नहीं होने पर बिफरे सीएम गहलोत के बयान पर राठौड़ का पलटवार

Polktalks.News/Rajasthan. भारत की स्वतंत्रता के 75वें साल में मनाए जा रहे ‘अमृत महोत्सव के जश्न के लिए जारी पोस्टर्स में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर को कथित तौर पर शामिल नहीं करने को लेकर देश भर में सियासत गरमाई हुई है. कांग्रेस के दिग्गजों ने इस पर बीजेपी और केन्द्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि, ‘पंडित नेहरू के योगदान को कमतर दिखाने के कुप्रयास का खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना पड़ेगा और समय आने पर देश मोदी सरकार को सबक सिखाएगा‘. वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक … Read more

Polktalks.News/Rajasthan. भारत की स्वतंत्रता के 75वें साल में मनाए जा रहे ‘अमृत महोत्सव के जश्न के लिए जारी पोस्टर्स में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर को कथित तौर पर शामिल नहीं करने को लेकर देश भर में सियासत गरमाई हुई है. कांग्रेस के दिग्गजों ने इस पर बीजेपी और केन्द्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि, ‘पंडित नेहरू के योगदान को कमतर दिखाने के कुप्रयास का खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना पड़ेगा और समय आने पर देश मोदी सरकार को सबक सिखाएगा‘. वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आजादी के अमृत महोत्सव पोस्टर में पं. जवाहर लाल नेहरू की फोटो नहीं होने और देश की आजादी में वीर सावरकर के योगदान को नकारने के बयान को अमर्यादित, निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

बीजेपी2के दिग्गज नेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि देश की आजादी में किसी के योगदान को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. आजादी में अकेले नेहरू का नहीं बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, वीर सावरकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे असंख्य राष्ट्रनायकों का योगदान रहा है. राठौड़ ने कहा कि एक ओर चंद दिन पहले ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने देश की आजादी में वीर सावरकर के गौरवमयी इतिहास को स्वीकार किया था और अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनके योगदान को नकार रहे हैं. राठौड़ ने कहा कि अंतर्कलह से घिरी कांग्रेस सरकार में वीर सावरकर के विषय पर विचारों में कलह से मुख्यमंत्री व प्रदेशाध्यक्ष के बीच की लड़ाई सार्वजनिक हो गई है.

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उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने आगे कहा कि देश की आजादी में वीर सावरकर के योगदान पर सवालिया निशान लगाने से पहले गहलोत को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इतिहास को पढ़ना चाहिए. इंदिरा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में वीर सावरकर के योगदान को स्वीकारा था और उन पर डाक टिकट भी जारी किया था. राठौड़ ने कहा कि लगता है अब कांग्रेस सरकार का एक ही एजेंडा है, एक परिवार विशेष का बखान कर देश की आजादी में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कमतर दिखाना.

‘नेहरू की तस्वीर नहीं लगाना निंदनीय, केन्द्र सरकार ने किया छोटी सोच का प्रदर्शन’- गहलोत
इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान जारी कर कहा है कि, ‘भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) द्वारा जारी किए गए आजादी के अमृत महोत्सव के पोस्टर में पंडित जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर ना लगाना ना सिर्फ निंदनीय है बल्कि केन्द्र सरकार की छोटी सोच का प्रदर्शन भी है. पंडित नेहरू के आजादी के आंदोलन में योगदान और उनके जेल जाने को याद करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि, ‘आजादी की लड़ाई के दौरान 9 बार जेल गए. पंडित जी ने अपने जीवन के 3259 दिन (करीब 9 साल) जेल में गुजारे. अंग्रेजों का विरोध करते हुए कई बार उन्होंने अंग्रेजों द्वारा किए गए बल प्रयोग का सीना तान कर सामना किया‘.

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गद्दारी करने वाले ऐसे लोगों को स्वतंत्रता सेनानी बताना सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, ‘विनायक दामोदर सावरकर ने आजाद हिन्द फौज के खिलाफ ब्रिटिश सरकार की तरफ से लड़ने के लिए युवाओं को ब्रिटिश फौज में भर्ती करवाया. देश के साथ गद्दारी करने वाले ऐसे लोगों को स्वतंत्रता सेनानी बताना सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है. अपना तन, मन, धन एवं जीवन देश की आजादी की लड़ाई लड़ने एवं आधुनिक भारत की नींव रखने के लिए लगा देने वाले पंडित नेहरू के योगदान को कमतर दिखाने के कुप्रयास का खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना पड़ेगा और समय आने पर देश मोदी सरकार को सबक सिखाएगा’.

‘सावरकर ने मांगी माफी जबकि नेहरू फौलाद की तरह अंग्रेजों के सामने खड़े रहे’
RSS और सावरकर पर निशाना साधते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि, ‘जहां विनायक दामोदर सावरकर ने जेल जाने के एक साल बाद में ही अंग्रेजों से माफी मांगना शुरू कर दिया था और कुल छह बार माफी मांगी और जेल से रिहा होने के बाद ब्रिटिश एजेंट बनकर काम किया वहीं पंडित नेहरू फौलाद की तरह अंग्रेजों के सामने खड़े रहे और भारत को आजादी दिलाकर अपना संकल्प पूरा किया’.

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