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शर्म की बात! मुंबई के अस्पतालों की बदहाली पर हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार का नेगेटिव उदाहरण देकर उद्धव सरकार को लगाई फटकार

18 जनवरी 2020
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शर्म की बात! मुंबई के अस्पतालों की बदहाली पर हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार का नेगेटिव उदाहरण देकर उद्धव सरकार को लगाई फटकार

पाॅलिटाॅक्स ब्यूरो. राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के मामले में पिछले दिनों जो कुछ भी घटनाक्रम रहा वो प्रदेश की छवि पर एक धब्बा लगा गया. मुंबई हाईकोर्ट की दो जजों की बैंच ने मुंबई के बदहाली से जूझ रहे दो अस्पतालों की बदहाली पर राजस्थान सरकार का उदाहरण नेगेटिव रूप में देते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को दोनों अस्पतालों को अगले 24 घण्टे में 24 करोड़ की राशि जारी करने के आदेश दिए है. मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस एससी धर्माधिकारी और आरआई चागला ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार पर बड़ी तल्ख टिप्पणी करते … Read more

पाॅलिटाॅक्स ब्यूरो. राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के मामले में पिछले दिनों जो कुछ भी घटनाक्रम रहा वो प्रदेश की छवि पर एक धब्बा लगा गया. मुंबई हाईकोर्ट की दो जजों की बैंच ने मुंबई के बदहाली से जूझ रहे दो अस्पतालों की बदहाली पर राजस्थान सरकार का उदाहरण नेगेटिव रूप में देते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को दोनों अस्पतालों को अगले 24 घण्टे में 24 करोड़ की राशि जारी करने के आदेश दिए है.

मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस एससी धर्माधिकारी और आरआई चागला ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार पर बड़ी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, “मुंबई जैसे महानगर में गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा, महिलाओं और बच्चों को भर्ती करने से मना किया जा रहा है. बच्चे मर रहे हैं और राज्य का तंत्र राजस्थान की तरह कुछ नहीं कर रहा. क्या हम महाराष्ट्र को भी वैसा ही बनाना चाहते हैं.” मुंबई हाईकोर्ट के दो जजों की बैंच की यह टिप्पणी प्रदेश की गहलोत सरकार के लिए बड़ी शर्म की बात है.

दरअसल, मुंबई की हाईकोर्ट में बदहाली से जूझ रहे मुंबई के दो अस्पतालों के मामले में एक रिट पिटीशन दायर हुई थी. याचिकाकर्ता ने अपनी पीटिशन में इन अस्पतालों की बदहाली को दूर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से अस्पतालों को बजट आंवटित करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी. मामले में हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया. इस फैसले में कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की ओर लम्बे समय से दिए जा रहे टालम टोल वाले जवाब के प्रति गहरी नाराजगी जताई. जस्टिस धर्माधिकारी ने बहुत ही सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए लोगों को इलाज की जरूरत है या मूर्तियों की? सरकार के पास मूर्तियों के लिए पैसे हैं अस्पतालों के लिए नहीं. मुंबई जैसे महानगर में गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा, महिलाओं और बच्चों को भर्ती करने से मना किया जा रहा है. बच्चे मर रहे हैं और राज्य का तंत्र राजस्थान की तरह कुछ नहीं कर रहा. क्या हम महाराष्ट्र को भी वैसा ही बनाना चाह रहे हैं?

राजस्थान पर की गई इस टिप्पणी में मुंबई हाईकोर्ट का आशय राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सफल ईलाज के अभाव में हो रही बच्चों की मौतों व अन्य मौतों से था. इसके साथ ही हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार चाहे किसी भी प्रदेश की हो अपने राजनीतिक लाभ के लिए मूलभूत चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं को छोड़कर गैरजरूरी कामों को ज्यादा महत्व देती है. महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने सत्ता में आते ही समुंदर किनारे स्थित अम्बेडकर की मूर्ति को गुजरात की सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति से ऊंची करने की योजना बनाई है, जिसके लिए करोड़ो रुपए का बजट खर्च किया जाएगा. साथ ही महाराजा शिवाजी की प्रतिमा पर भी करोड़ो रुपए खर्च करने की महाराष्ट्र सरकार की योजना है.

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मुंबई हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में उद्वव सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि, ‘महाराष्ट्र सरकार अंबेडकर की प्रतिमा सरदार पटेल की प्रतिमा से उंचा बनवाना चाहती है, प्रतिमा के लिए पैसा है. लेकिन अंबेडकर जिन दलितों और गरीबों का प्रतिनिधित्व जीवन भर करते रहे, वे मरें तो मरें.’

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