महबूबा के पाक प्रेम ने बढ़ाई मोदी के मिशन कश्मीर की ‘टेंशन’, फारूक बोले हमारा एजेंडा तो सबको मालूम ही है

हम अपनी आवाम की बात को उनके सामने रखेंगे, हम सितारे नहीं मागेंगे बल्कि वही मांगेंगे जो हमारा है, किसी कागज पर दस्तखत नहीं करेंगे, न ही 370 को लेकर कोई समझौता करेंगे- गुपकार संगठन

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महबूबा के पाक प्रेम ने बढ़ाई मोदी के मिशन कश्मीर की 'टेंशन'
महबूबा के पाक प्रेम ने बढ़ाई मोदी के मिशन कश्मीर की 'टेंशन'
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Politalks.News/Jammu-Kashmir. आज पूरे देश के अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों के नेताओं की अहम बैठकों का दौर चला. राजधानी दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की बैठक हुई. वहीं एनसीपी प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की अगुवाई में दिल्ली में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष के नेताओं को एकजुट करने के लिए विपक्ष और राष्ट्र मंच से जुड़े नेताओं का ‘मंथन‘ हुआ. तो उत्तरप्रदेश में 2022 की तैयारी को लेकर बीजेपी के दिग्गजों ने महामंथन किया, जिसमें सीएम योगी के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री ने भी शिरकत की. दूसरी ओर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस करके कोरोना की तीसरी लहर को लेकर मोदी को चेतावनी जारी की. इन सबके बीच एक और अहम बैठक कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित हुई. यह बैठक जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारुक अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित निवास पर ‘गुपकार गठबंधन‘ नेताओं के साथ आयोजित की गई.

कांग्रेस, एनसीपी और गुपकार नेताओं की हुई मीटिंग में पीएम नरेंद्र मोदी ‘फोकस‘ में रहे. बैठक में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीएफ की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘चिंताओं‘ को बढ़ा दिया. बात को आगे बढ़ाने से पहले हम आपको बता दें कि पीएम मोदी 24 जून को कश्मीर के मसले पर होने वाली बैठक को लेकर कुछ ‘बड़ा‘ करने वाले हैं. इसी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने घाटी के नेताओं से बात करने के लिए न्योता भेजा है. मोदी के साथ गुरुवार को होने वाली इस अहम बैठक से पहले आज फारुक अब्दुल्ला ने श्रीनगर में अपने निवास पर गुपकार नेताओं की एक बैठक बुलाई.

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बैठक खत्म होने के बाद महबूबा मुफ्ती जब बाहर निकलीं तब उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीधे तौर पर ‘तनाव‘ बढ़ा दिया. मुफ्ती ने कहा कि हमसे जो छीन लिया गया है, हम उसके बारे में बात करेंगे. महबूबा का इशारा अनुच्छेद-370 की तरफ था. यही नहीं मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मामले पर पाकिस्तान से बात होनी चाहिए, प्रदेश में अगर शांति लानी है तो उसके लिए पाकिस्तान से बातचीत होनी चाहिए, शांति बहाली के लिए संवाद ही एक रास्ता है‘. बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब महबूबा ने कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का राग अलापा हो, वह कई बार पाकिस्तान से बात करने की वकालत कर चुकी हैं. महबूबा के इस बयान के बाद पाकिस्तान को जरूर ‘ठंडक‘ मिल गई होगी. दूसरी ओर गुपकार नेताओं की मीटिंग के बाद फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि हम प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे, फारुक ने कहा कि हमारा एजेंडा सभी को मालूम है और वही रहेगा.

कश्मीर मसले पर पाक के साथ बात करने में मोदी सरकार शुरू से है खिलाफ
साल 2014 केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद मोदी सरकार का जम्मू-कश्मीर का मसला ‘मुख्य एजेंडे‘ में रहा है. पाकिस्तान कई बार कश्मीर मामले में दखलअंदाजी और बात करने का प्रस्ताव भारत को देता आया है. लेकिन हर बार केंद्र सरकार की ओर से पाक का यह प्रस्ताव ‘ठुकरा‘ दिया. ‘करीब दो साल बाद केंद्र सरकार ने घाटी के नेताओं को विश्वास में लेकर एक नया एजेंडा तैयार किया है‘. लेकिन मोदी सरकार नहीं चाहती कि इसमें पाक की कोई भूमिका हो. वहीं घाटी के कई पार्टियों के नेता और अलगाववादी संगठन पाकिस्तान से बातचीत करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालते रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 24 जून को जम्मू-कश्मीर को लेकर बैठक होनी है, जिसमें घाटी के नेताओं को बुलाया गया है. लेकिन ‘इन नेताओं के बयान इशारा कर रहे हैं कि दिल्ली में होने वाली बैठक में प्रधानमंत्री के जम्मू-कश्मीर पर बनाए गए प्रस्ताव पर सहमत हो पाएंगे‘? गुपकार ग्रुप के अन्य नेताओं ने आज बैठक के बाद कहा कि हमें प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सामने बात रखने का मौका मिला है. हम अपनी आवाम की बात को उनके सामने रखेंगे, हम सितारे नहीं मागेंगे बल्कि वही मांगेंगे जो हमारा है. नेताओं का कहना है कि वो किसी कागज पर दस्तखत नहीं करेंगे, न ही 370 को लेकर कोई समझौता करेंगे.

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गौरतलब है कि गुपकार संगठन के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर की कुल सात राजनीतिक पार्टियां आती हैं, इनमें सबसे अहम और बड़ी पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी है.‌ आपको बता दें कि 5 अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद फारुक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत तमाम घाटी के नेताओं को लंबे समय तक ‘नजरबंद‘ कर दिया गया था. भले ही इन नेताओं की नजरबंद से रिहाई हो गई है लेकिन मोदी सरकार के प्रति ‘टीस‘ बरकरार है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर के मसले पर केंद्र सरकार का हमेशा रुख रहा है कि पाकिस्तान और पाकिस्तान समर्थित हुर्रियत नेताओं से कोई बातचीत नहीं होगी. ऐसे में अब जब पीएम मोदी की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी मसले पर बुलाई गई मीटिंग से पहले, महबूबा के इस बयान ने फिर नए विवाद को जन्म दे दिया है.

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