उत्तरप्रदेश में ‘हाथ’ को चाहिए किसी का ‘साथ’!, ‘भूतकाल’ के अनुभव से ‘धर्मसंकट’ में बहनजी!

यूपी में कांग्रेस की 'खैवनहार' प्रियंका गांधी ने छोड़ा शिगूफा !, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को चाहिए सहयोगी !, पार्टी कर सकती है गठबंधन, लेकिन किससे होगा गठबंधन, लगभग सभी पार्टियां खोल चुकी है पत्ते, बस 'हाथ' को मिल सकता है 'हाथी' का साथ, लेकिन बहनजी का 'धर्मसंकट' भी है बड़ा, अपना जनाधार खिसकने का लगता है डर

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'हाथ' और 'हाथी' के साथ आने का 'धर्मसंकट'!
'हाथ' और 'हाथी' के साथ आने का 'धर्मसंकट'!
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Politalks.News/Uttarpradesh. कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने संकेत दिया है कि अगले चुनाव में उनकी पार्टी गठबंधन कर सकती है. लेकिन अब सवाल यह है कि कांग्रेस पार्टी से गठबंधन करेगा कौन या उन्होंने किसके साथ गठबंधन के बारे में सोचा है? उत्तर प्रदेश की लगभग सभी पार्टियों ने अपना स्टैंड स्पष्ट कर दिया है. समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की छोटी-छोटी पार्टियों के साथ तालमेल करना शुरू कर दिया है तो भाजपा ने सहयोगी पार्टी अपना दल की अनुप्रिया पटेल को केंद्र में मंत्री बना कर अपना गठबंधन लगभग घोषित कर दिया है. आम आदमी पार्टी के संजय सिंह की भी सपा के अखिलेश सिंह से बातचीत हुई है. संजय सिंह ने अखिलेश के जन्मदिन पर उनसे मुलाकात की. लेकिन इस दौरान बात क्या हुई किसी को नहीं पता.

‘हाथ’ और ‘हाथी’ के साथ आने में परेशानी!
उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ एक पार्टी बची है, जिसके साथ कांग्रेस का तालमेल हो सकता है और वो पार्टी है बहुजन समाज पार्टी!, परंतु मुश्किल यह है कि बसपा ने पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन कर लिया है, जिसका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के साथ ही है. दूसरी ओर पिछले लोकसभा चुनाव में जब समाजवादी पार्टी ने बसपा से तालमेल किया था तब कांग्रेस को भी उस गठबंधन का हिस्सा बनाने के प्रस्ताव को बसपा प्रमुख मायावती ने ही खारिज किया था. मायावती की जिद के चलते ही कांग्रेस को अकेले लोकसभा चुनाव में उतरना पड़ा था. राजनीतिक जानकारों की माने तो अगर कांग्रेस उस गठबंधन का हिस्सा होती तो उत्तर प्रदेश की तस्वीर शायद अलग ही होती.

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‘हाथ’ के साथ को लेकर बहनजी का ‘धर्मसंकट’!
कांग्रेस से मायावती की दूरी का कारण यह धारणा भी है कि अगर एक बार कांग्रेस ओर बसपा साथ आए और बसपा का दलित वोट कांग्रेस को ट्रांसफर हुआ तो वह वोट हमेशा के लिए कांग्रेस का हो जाएगा. मायावती की दूसरी चिढ़ राजस्थान से भी बनी है, जहां उनकी पार्टी से जीते छह विधायक पाला बदल कर कांग्रेस में शामिल हो गए. इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में बसपा ही एक पार्टी है, जिसके साथ कांग्रेस का तालमेल हो सकता है. पार्टी के कई नेता मान रहे हैं कि बसपा प्रमुख मायावती एक बार फिर ब्राह्मण वोट अपनी और करने की राजनीति कर रही है और इसमें कांग्रेस मददगार हो सकती है. ध्यान रहे बसपा ने अयोध्या से शुरू करके कई प्रदेश के सभी मंडलों में ब्राह्मण सम्मेलन कराने का ऐलान किया है. बसपा के महासचिव सतीश मिश्र इसकी अगुवाई कर रहे हैं.

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‘भूत’ और ‘वर्तमान’ के अनुभव रहे हैं खट्टे !
मायावती ने जोर देकर कहा है कि अब ब्राह्मण कभी भी भाजपा को वोट नहीं देगा. आपको बता दें कि ब्राह्मणों ने 2007 के चुनाव में खुल कर बसपा का समर्थन किया था, जिससे वसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी. तभी ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोट एकजुट करने का एक दांव कांग्रेस और बसपा के तालमेल हो सकता है. कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि जिस तरह कांग्रेस पश्चिम बंगाल में सीपीएम से मिल कर और केरल में सीपीएम के खिलाफ लड़ती है वैसे ही उत्तर प्रदेश में बसपा से मिल कर और पंजाब में बसपा के खिलाफ लड़ सकती है. लेकिन कहीं नतीजा केरल और पश्चिम बंगाल जैसा ही हुआ तो क्या होगा? जो हो प्रियंका के बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज होगी और कुछ दिलचस्य घटनाक्रम हो सकता है.

 

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