विशेष: कांग्रेस के लिए खांडे की धार पर होंगे 5 राज्यों के चुनाव, हार के इंतजार में बैठे हैं सियासी दिग्गज

पांच राज्यों के चुनाव और कांग्रेस, पार्टी के लिए अहम हैं आने वाले विधानसभा चुनाव, बेहतर प्रदर्शन नहीं हुआ तो होगा वो जो हुआ था 1969 में, ममता, पवार और प्रशांत किशोर बैठे हैं तैयार, हालांकि पांच में 4 राज्यों में हालात बन सकते हैं बेहतर, लेकिन उसकी वजह पार्टी नहीं, बल्कि वहां की सरकारों की है नाकामी, पंजाब में मजबूत है पार्टी!

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Politalks.News/ChunavForCongress. पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Election 2022) के लिए चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है. सियासत के जानकर इन विधानसभा चुनावों को 2024 के आम चुनाव का सेमीफाइनल बता रहे हैं, जिसको देखते हुए सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस रखी है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस (Congress) के सियासी भविष्य को लेकर हो रही है. कांग्रेस को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है कि, इन पांच राज्यों के चुनाव कांग्रेस के लिए खांडे की धार की तरह होंगे. इन चुनावों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो आगे के लिए वो इसका क्वालिफायर होगा. अगर इन चुनावों में कुछ झोलझाल होता है तो पार्टी में बड़ी टूट होने की आशंका जताई जा रही है और ये टूट 1969 के जैसी हो सकती है. इसके पीछे कई कारण होंगे जो कांग्रेस को कमजोर करेंगे. G-23 के नेता हमलावर होंगे, ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) और शरद पवार (sharad panwar) ताक में बैठे हैं, पीएम मोदी (PM Narendra Modi) का कांग्रेस मुक्त भारत जैसा अभियान तो है ही इसलिए चाहे जैसे भी हो कांग्रेस को इस बार पांच राज्यों के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना ही होगा.

राजनीति के जानकारों की मानें तो कांग्रेस के लिए इन 5 राज्यों के चुनाव ‘खांडे की धार‘ इसलिए हैं क्योंकि अगर पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो देश की सबसे पुरानी सियासी पार्टी अपने मौजूदा स्वरूप में भी नहीं रह पाएगी. अभी तक तो कांग्रेस पार्टी के नेता छोड़ कर जा रहे हैं या पूर्वोत्तर के मेघालय में पार्टी टूटी है. लेकिन इन पांच राज्यों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद इसका बहुत बड़ा विभाजन होने की संभावना जताई जा रही है. इसका कारण बनेंगे G-23 के नेता जो अब तक कांग्रेस अध्यक्ष को चिट्ठी लिख रहे थे (जिसके बाद से सब हाशिए पर बैठ कर तमाशा देख रहे हैं), माना जा रहा है जैसे ही कांग्रेस हारेगी सब पार्टी नेतृत्व के ऊपर टूट पड़ेंगे. इस पर कोई हैरानी नहीं होगी, ऐसा भी माना जा रहा है कि कोई बड़ी बात नहीं है अगर 1969 टाइप का विभाजन हो जाए. लेकिन उस समय तो इंदिरा गांधी थीं, उनका करिश्मा था, जो उन्होंने उस विभाजन के बाद अपनी कांग्रेस खड़ी कर ली. लेकिन इस बार वैसा विभाजन हुआ तो जो अलग होंगे, उनकी कांग्रेस असली कांग्रेस बन जाएगी.

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सियासी जानकारों का कहना है कि ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कांग्रेस छोड़ कर जा चुके बड़े नेता इसकी प्लानिंग कर रहे हैं और इसमें सफल चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनका साथ दे रहे हैं. दूसरी तरफ ममता बनर्जी और शरद पवार जैसे क्षत्रप कांग्रेस की हार का इंतजार कर रहे हैं. उनके साथ के जो पुराने नेता अभी कांग्रेस में बचे हैं वे उनके संपर्क में हैं. गुलाम नबी आजाद से लेकर आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसा अनेक नेता तैयार बैठे हैं. प्रशांत किशोर ने यह सिद्धांत दे ही दिया है कि बाकी क्षेत्रीय पार्टियों की तरह कांग्रेस किसी एक नेता की नहीं है, बल्कि गांधी परिवार इस पार्टी का कस्टोडियन है. उधर केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी का अलग कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य है. जो कि कांग्रेस की परेशानी बढ़ाने वाला है.

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वहीं, इस सब झोलझाल के बीच इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी चार राज्यों में वह चुनाव जीत सकती है. ऐसा कांग्रेस की अपनी राजनीति के कारण नहीं होगा, बल्कि इन राज्यों के हालात और भाजपा की अंदरूनी कलह की वजह से इन चार राज्यों में कांग्रेस के अनुकूल हालात दिख रहे हैं. ये भी जब है कि कांग्रेस इसे क्वालीफायर मान कर करो या मरो के अंदाज में लड़ती है तभी इस बात की संभावना बनेगी कि वह आगे के राउंड का मुकाबला खेल पाएगी या नहीं?

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