देशभर के उपचुनावों में कांग्रेस ने दिखाया दम, ‘जीत’ का अंतर बहुत बड़ा जबकि ‘हार’ का अंतर बहुत कम

तीन लोकसभा और 29 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों में कांग्रेस को मिली संजीवनी! उपचुनाव के परिणामों से कांग्रेसी दिग्गज खुद चकित! जीत के अंतर से आलाकमान गदगद, जहां जीते वहां सफल रही एकला चालो रे की नीति तो जहां हारे वहां बदली जाएगी रणनीति, अब मोदी सरकार पर ज्यादा हमलावर होगा गांधी परिवार

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एकला चालो रे
एकला चालो रे
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Politalks.News/Delhi. एकला चालो रे… की नीति पर आगे बढ़ रही राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए हाल ही में राज्यों में हुए उपचुनावों के परिणाम संजीवन बनकर आए हैं, हालांकि ये परिणाम कुछ राज्यों में पुनर्विचार करने की नसीहत देने वाले भी रहे हैं. 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तीन लोकसभा और 29 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों में कांग्रेस ने दम दिखाया है. 2014 के बाद भाजपा को कई राज्यों में हार मिली है और कांग्रेस को जीत मिली है. लेकिन इस बार की जीत को कांग्रेस खास मान रही है, जिसमें भाजपा के साथ आमने-सामने की लड़ाई का दम दिखाया है. असल में इससे पहले आमने-सामने की लड़ाई में अकसर भाजपा जीतती रही है लेकिन इस बार कांग्रेस जीती तो है ही वह भी बहुत बड़े अंतर के साथ. एक असम को छोड़ दें तो कांग्रेस जहां भी जीती है वहां बड़े अंतर से जीती है और जहां हारी है वहां कड़ा मुकाबला रहा है. इस बढ़े हुए वोट शेयर को लेकर जहां कांग्रेस उत्साह में हैं वहीं इन परिणामों ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है.

जीत से बड़ा है जीत का अंतर!
दिवाली से पहले उपचुनाव के नतीजों ने खुद कांग्रेस को चौंका दिया है. जैसे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस एक लोकसभा और तीनों विधानसभा सीटों पर जीती. इन चार सीटों पर कांग्रेस को 48.90 फीसदी वोट मिले, जबकि भाजपा को सिर्फ और सिर्फ 28.05 फीसदी. यानी हिमाचल में 20 फीसदी वोट का अंतर रहा. ऐसे ही महाराष्ट्र की इकलौती विधानसभा सीट पर कांग्रेस जीती तो उसे 57.03 फीसदी वोट मिले, जबकि भाजपा को मात्र 35.06 फीसदी. यानी वहां अंतर 22 फीसदी वोटों का रहा है. राजस्थान की दोनों सीटों पर तो गजब ही हो गया. जहां कांग्रेस को 37.51 फीसदी वोट मिले और भाजपा को केवल 18.80 फीसदी. इस तरह भाजपा का वोट कांग्रेस से आधा रहा. मध्य प्रदेश में एक लोकसभा और दो विधानसभा सीट भाजपा जीती और कांग्रेस एक विधानसभा सीट जीती. वहां भाजपा को कुल 47.58 फीसदी वोट मिले तो कांग्रेस को 45.55 फीसदी. कर्नाटक में भाजपा को 51.86 और भाजपा को 44.76 फीसदी वोट मिले हैं, यानी कि जहां भाजपा जीती भी है तो वहां दोनों का वोट शेयर बहुत कम रहा है.

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आमने-सामने की लड़ाई में इस बार जीती कांग्रेस
आपको बता दें कि, इससे पहले आमने-सामने की लड़ाई में कांग्रेस हारती थी. भाजपा इसे अपनी ताकत मानती थी कि उसको कांग्रेस से लड़ना है. लेकिन इस बार उपचुनाव में कांग्रेस ने आमने-सामने की लड़ाई में भाजपा को बड़े अंतर से हराया या बहुत कम अंतर से हारी है. तभी बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान में इसे लेकर बहुत उत्साह है. कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान के सामने यह रिपोर्ट पेश की है, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ने भाजपा के खिलाफ तेवर और सख्त कर दिए हैं. जानकार सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की आगे की रणनीति भाजपा के खिलाफ हमलावर रहने और खुद को भाजपा के बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करने की है. साथ ही एकला चालो रे की नीति को आगे बढ़ाया जाएगा. आलाकमान की ओर से कहा गया है कि जहां हो सके पार्टी को अकेले ही आमने-सामने का मुकाबला करने दिया जाएगा और किसी सहयोगी के भरोसे उस मुकाबले को नहीं छोड़ा जाएगा.

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कुछ राज्यों में गियर बदलेगी कांग्रेस!

और अब बात करते हैं जहां कांग्रेस अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने में जुटी है. कांग्रेस से जुड़े कुछ सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव के बाद कई राज्यों में पार्टी को रणनीति बदलने की तैयारी करनी है. जैसे पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, बिहार, तेलंगाना आदि राज्यों के उपचुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को चिंता में डाला है, जिसके बाद इन राज्यों में सहयोगी पार्टियों से तालमेल बेहतर करने या नया सहयोगी खोजने का प्रयास करने की दिशा में कांग्रेस कदम बढ़ाएगी.

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