स्वीकार है हार, खींवसर में RLP ने अपने दम पर की जीत दर्ज, मंडावा में हुआ विश्वासघात: पूनिया

मंडावा में भाजपा की हार पर बोले राठौड़ ने कांग्रेस पर लगाया सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का आरोप

Satish Poonia
Satish Poonia

राजस्थान की मंडावा और खींवसर सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव के गुरुवार को नतीजे आ गए. मंडावा में कांग्रेस की रीटा चौधरी ने पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार खिले ‘कमल’ को हटाते हुए जबरदस्त जीत हासिल की. वहीं खींवसर में भाजपा समर्थित राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नारायण बेनीवाल ने अपने पहले ही चुनाव में हरेंद्र मिर्धा के सियासी वर्चस्व को परास्त कर जीत दर्ज की.

उपचुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कहा कि 2 सीटों पर उपचुनाव में से भाजपा ने एक सीट गठबंधन के तहत RLP को दी थी. खींवसर में RLP पार्टी का अपना एक आधार था और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने वहां भी प्रयास किया जिससे खींवसर में जीत हासिल हुई. खींवसर कांग्रेस की प्रतिष्ठा की सीट भी थी. वहीं मंडावा 1952 से लेकर 2018 से पहले तक कांग्रेस के पास रही. मंडावा के सियासी समीकरण कभी भाजपा के हक में नहीं रहे. इसके बावजूद पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में पहली बार भाजपा यहां 2300 वोटों से जीत दर्ज करते हुए मरूस्थलीय सीट पर कमल खिलाया. रीटा चौधरी के पिता रामनारायण चौधरी मंडावा के कद्दावर नेता थे जो मंडावा से कई बार विधायक रहे. उनकी पुत्री रीटा पिछले चुनावों में बहुत कम मतों से हारी थी. उनके प्रति लोगों की सहानुभूति भी थी इसलिए रीटा की जीत हुई.

सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने इन चुनाव परिणामों के लिए कहा कि ये परिणाम न तो सरकार के पक्ष में है और न ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के. यह चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर था और उसी आधार पर फैसला हुआ. सरकार यह गलतफहमी न रखे कि यह जनादेश सरकार को है. प्रदेश में मुद्दे अभी भी वही है, जो हैं बेरोजगारी, किसान और बिगड़ी कानून व्यवस्था.

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झुंझुनू से नागौर सांसद नरेंद्र कुमार खींचड के बेटे अतुल खींचड को टिकट न दिये जाने के सवाल पर पूनिया (Satish Poonia) ने माना कि व्यक्तित्व और प्रबंधन से चुनाव के नतीजे प्रभावित होते हैं. भाजपा के कार्यकर्ताओं और जनता में ये धारणा बनी थी कि सांसद के बेटे को टिकट मिलेगा लेकिन आलाकमान दो टूक निर्णय लेते हुए और परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देते हुए ये फैसला किया.

मंडावा में भाजपा कार्यकर्ताओं ने शून्य से शुरुआत की क्योंकि वहां पहले से आंकलन था कि कांग्रेस को बढ़त मिलेगी पार्टी कार्यकर्ताओं ने मेहनत की. इस चुनाव में परिणाम बराबर रहे इसलिए कांग्रेस को खुश होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि एक चुनाव किसी के भाग्य के फैसला नहीं कर सकते.

मंडावा में पूनिया (Satish Poonia) ने मतदान में गड़बड़ी का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि इस सीट पर 28 बूथ ऐसे थे जहां के लोग बडी संख्या में विदेशों में रहते है. यहां 70 से 80 फीसदी मतदान हुआ. समय रहते हुए इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की गई लेकिन चुनाव आयोग और राज्य सरकार उसको रोकने में नाकामयाब रही. इन उपचुनावों के परिणामों से किसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

वहीं उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड ने कांग्रेस पर सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक समाज विशेष के मतों का ध्रुवीकरण व सरकारी मशीनरी का जमकर दुरुपयोग मंडावा विधानसभा क्षेत्र में हुआ. मंडावा में सर्वाधिक राज्य कर्मचारी हैं. जिस प्रकार का दबाव सरकार ने उन पर बनाया, उसी का परिणाम है मंडावा में भाजपा को हार मिली. मंडावा प्रभारी होने के नाते नैतिकता से हार राठौड ने स्वीकार की.

दूसरी ओर, प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंडावा जीत के लिए रीटा चौधरी को बधाई दी. साथ ही खींवसर में हरेंद्र मिर्धा को 4630 मतों से मिली हार को भी जीत के समान बताया. एआईसीसी के महासचिव व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मंडावा में कांग्रेस की जीत पर प्रदेश सरकार व संगठन को बधाई देते हुए इसे क्षेत्र की जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं की जीत बताया.

पीसीसी अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मंडावा व खींवसर के चुनावी परिणाम पर अपने विचार रखते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए जो कार्य किया है, वे कांग्रेस संगठन की मजबूती व प्रतिबद्धता का परिचायक है. मंडावा से रीटा चौधरी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की. खींवसर प्रत्याशी हरेंद्र मिर्धा ने भी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा है जिसके परिणाम स्वरूप पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार का अंतर कम हुआ. इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस की विचारधारा व उसकी नीतियों में जनता का विश्वास निरंतर बढ़ रहा है.

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