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मेयर सौम्या गुर्जर पर निलंबन की कार्रवाई के बाद बीजेपी के दिग्गजों के निशाने पर आई गहलोत सरकार

07 जून 2021
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मेयर सौम्या गुर्जर पर निलंबन की कार्रवाई के बाद बीजेपी के दिग्गजों के निशाने पर आई गहलोत सरकार

Politalks.News/Rajasthan. जयुपर ग्रेटर नगर निगम मेयर सौम्या गुर्जर के निलंबन के बाद प्रदेश में सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है. एक ओर जहां आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव से हाथापाई मामले में राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को तत्काल सस्पेंड कर दिया है. तो गहलोत सरकार अब भाजपा के दिग्गज नेताओं के निशाने पर आ गई है. सौम्या गुर्जर के निलंबन को लेकर बीजेपी ने आज शाम 5 बजे जयपुर के सभी 250 वार्डों में कारोना गाइडलाइन का पालन करते हुए धरना-प्रदर्शन किया. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जहां सौम्या गुर्जर के निलंबन को निंदनीय बताया तो वहीं … Read more

Politalks.News/Rajasthan. जयुपर ग्रेटर नगर निगम मेयर सौम्या गुर्जर के निलंबन के बाद प्रदेश में सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है. एक ओर जहां आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव से हाथापाई मामले में राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को तत्काल सस्पेंड कर दिया है. तो गहलोत सरकार अब भाजपा के दिग्गज नेताओं के निशाने पर आ गई है. सौम्या गुर्जर के निलंबन को लेकर बीजेपी ने आज शाम 5 बजे जयपुर के सभी 250 वार्डों में कारोना गाइडलाइन का पालन करते हुए धरना-प्रदर्शन किया. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जहां सौम्या गुर्जर के निलंबन को निंदनीय बताया तो वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने निलंबन की कार्यवाही को तानाशाही बताया.

स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को सस्पेंड किये जाने पर सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सवाल उठाया और इस कार्रवाई को निंदनीय करार दिया. वसुंधरा राजे ने ट्वीट करते हुए लिखा कि लोकतांत्रिक तरीक़े से चुन कर आयी जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर का निलंबन निंदनीय है.

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वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने मेयर सौम्या गुर्जर के निलंबन को तानाशाही करार दिया. सतीश पूनियां ने कहा कि जयपुर ग्रेटर में कांग्रेस को हार का इतना मलाल था कि वह शुरू से ही षड़यंत्र रच रही थी. पूनियां ने कहा कि सरकार कभी बजट के मामले में तो कभी कमेटियों के मामले में भेदभाव कर रही थी. निलंबन की कार्यवाही तानाशाहीपूर्ण है और अब गहलोत सरकार हिटलरशाही पर उतर आई है. गैंगरेप की घटनाओं में अपराधी पकड़े नहीं जा रहे, लेकिन यहां सामान्य वाद-विवाद को आपराधिक मुकदमे में बदल दिया. इस तरह की घटना में बिना सुनवाई निलंबन करना सरकार की बड़ी भूल है. सरकार राजनीतिक चश्मे से स्थानीय निकायों में दुर्भावना से कार्यवाही कर रही है.

वहीं सौम्या गुर्जर के निलंबन को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गहलोत सरकार पर निशाना साधा. केंद्रीय मंत्री ने पिछले वर्ष हुए राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए ट्वीट किया कि पिछले साल गहलोत साहब लोकतंत्र को बचाने की दुहाई दे रहे थे, और आज उसी लोकतंत्र की हत्या भी कर दी. जयपुर ग्रेटर महापौर और पार्षदों का निलंबन कांग्रेस का फासीवाद है. राजस्थान इस फासीवाद को पनपने नही देगा.

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वहीं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि गहलोत सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग कर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. कांग्रेस पार्टी पूर्ण रूप से सत्ता के नशे में दिख रही है, चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसा बर्ताव जनादेश का अपमान है और भाजपा कभी भी ये बर्दाश्त नहीं करेगी. इसका जोर शोर से विरोध किया जाएगा एक पक्ष को सुनकर कार्यवाही करना गलत है.

वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार लोकतंत्र की परिभाषा बदलने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही का भाजपा की ओर से मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा. राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (6) में प्रदत्त शक्तियों का दुरुपयोग कर आरोप पत्र जारी करने से पहले ही निलंबन का यह पहला मामला है. कांग्रेस सरकार लोकतंत्र की धुरी ‘स्थानीय निकायों’ को समाप्त करने के लिए अबोध शस्त्र हाथ में ले रही है जो इन्हीं के लिए मारक सिद्ध होगा.

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आपको बता दें, शुक्रवार को मेयर सौम्या गुर्जर और आयुक्त यज्ञमित्र देव सिंह के बीच शुरू हुई तीखी बहस के बाद तीन पार्षदों पर बैठक छोड़कर जा रहे आयुक्त का हाथ पकड़कर धक्का-मुक्की और पिटाई करने का आरोप लगा. आयुक्त की शिकायत पर 3 पार्षदाें पर एफआईआर दर्ज हुई. इस घटना की सरकार ने शुरुआती जांच करवाई जिसमें मेयर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को घटना के लिए जिम्मेदार माना और विस्तार से जांच की सिफारिश की. लेकिन महापौर सहित किसी भी पार्षद ने डीएलबी की जांच अधिकारी के समक्ष बयान नहीं दिए थे. बयान के लिए सभी ने अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन जांच अधिकारी ने समय नहीं दिया और डीएलबी निदेशक दीपक नंदी को रिपोर्ट सौंपी दी थी. इसके कुछ घंटे बाद ही सरकार ने चारों के निलंबन के आदेश जारी कर दिए.

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