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MSP सहित विभिन्न मांगों पर अड़े किसानों नें संसद मार्च किया स्थगित तो तोमर ने की घर लौटने की अपील

27 नवंबर 2021
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MSP सहित विभिन्न मांगों पर अड़े किसानों नें संसद मार्च किया स्थगित तो तोमर ने की घर लौटने की अपील

Politalks.News/FarmersProtest.  किसान आंदोलन (Farmers Protest) को एक साल पूरा हो चुका है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी है. साथ ही आगामी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में इस कानून को वापस लिए जाने को लेकर सरकार एक बिल भी लेकर आएगी. लेकिनअपनी मांगों को मनवाने के लिए किसान अब आंदोलनरत है. अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों ने शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद कूच करने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन अब किसान अपने फैसले से कुछ पीछे हट गए हैं लेकिन MSP सहित अन्य मांगों को लेकर अड़ भी गए हैं. तो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह … Read more

Politalks.News/FarmersProtest.  किसान आंदोलन (Farmers Protest) को एक साल पूरा हो चुका है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी है. साथ ही आगामी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में इस कानून को वापस लिए जाने को लेकर सरकार एक बिल भी लेकर आएगी. लेकिनअपनी मांगों को मनवाने के लिए किसान अब आंदोलनरत है. अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों ने शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद कूच करने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन अब किसान अपने फैसले से कुछ पीछे हट गए हैं लेकिन MSP सहित अन्य मांगों को लेकर अड़ भी गए हैं. तो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा कि, ‘सरकार संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कृषि कानूनों की वापसी के लिए विधेयक पेश करेगी. साथ ही पराली पर भी किसानों की बात मान ली गई है तो उन्हें अब अपने अपने घर जाना चाहिए.’

केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के फैसले का भले किसानों ने स्वागत किया है. लेकिन उन्होंने आंदोलन ख़त्म करने के लिए सरकार के सामने कुछ मांगे रखी है. किसान संगठन सरकार एमएसपी पर कानून बनाने सहित कुछ अन्य मांगों पर सरकार से भरोसा चाहते हैं. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पीएम को पत्र लिखा है.

किसानों की 6 मांगे
1.एमएसपी पर कानूनी गारंटी
2.बिजली संशोधन विधेयक की वापसी
3.पराली जलाने पर किसानों पर दर्ज मामलों की समाप्ति
4.विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन के दौरान किसानों पर दर्ज मामलों की वापसी
5.गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा की गिरफ्तारी एवं मंत्रिमंडल से बाहर करने की मांग
6.आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले करीब 700 किसानों के परिजनों को मिले मुआवजा

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किसान संयुक्त मोर्चा की आज सिंघु बोर्डर पर बैठक हुई. संगठनों की आज हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया कि ’29 नवंबर को प्रस्तावित ट्रेक्टर रैली को स्थगित किया जाता है. अब 4 दिसंबर को एक बार फिर संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक बुलाई जायेगी जिसमें आगे की रणनीति बनाई जायेगी. साथ किसान नेताओं ने ये भी साफ़ किया कि ‘जब तक सरकार किसानों की मांगों का पूर्ण हल नहीं निकालती तब तक ये किसान आंदोलन यूं ही जारी रहेगा. इस देश का किसान पीछे हटने वालों में से नहीं है.’

किसानों के इस एलान से पहले उनकी मांगों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री ने सरकार की स्थित स्पष्ट की और किसानों से आंदोलन ख़त्म कर वापस घर लौटने की अपील की है. नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, ‘अब तो किसानों को अपने-अपने घर लौट जाना चाहिए. सरकार संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कृषि कानूनों की वापसी के लिए विधेयक पेश करेगी.’ तोमर ने आगे कहा कि, ‘पीएम मोदी ने फसल विविधता, शून्य-बजट खेती और एमएसपी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कमिटी बनाने का ऐलान किया है. इस कमिटी में किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. इस कमिटी के गठन के साथ एमसएसपी पर किसानों की मांग भी पूरी हो जाएगी.’

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वहीं आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज केस वापसी की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा, कि ‘जहां तक केस वापस लेने का सवाल है, यह राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है और वे ही इस पर फैसला लेंगे. मुआवजे पर भी फैसला राज्य सरकारें लेंगी.’ तोमर ने कहा कि ‘तीनों कृषि कानूनों की वापसी के लिए विधेयक शीत सत्र के पहले ही दिन संसद की पटल पर रखा जाएगा. ऐसे में मैंने एक बार फिर सभी किसानों से अपील करना चाहता हूँ कि वे अपने अपने घर लौट जाएं’.

आपको बता दें कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के विधेयक को बुधवार को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद इन विधेयकों को 29 नवंबर से शुरू हो रहे है संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि, ‘वे संसद द्वारा कानून निरस्त किए जाने तक प्रदर्शन स्थल पर डटे रहेंगे’ .

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