Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव और फालना सीट पर आए चुनावी परिणामों के बाद लगने लगा है कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सियासी जमीन दरकने लगी है. चुनावी जंग में हार चुकी टीएमसी से अब अन्य नेताओं का मोहभंग होते नजर आ रहा है. अब इसे चुनावी परिणामों का असर कहें या फिर सत्ता में आने की लालसा, लेकिन धीरे धीरे ममता के सिपेसालार एक एक करके मैदान छोड़ते दिखाई दे रहे हैं. ताजा उदाहरण सांसद काकोली घोष का है, जिन्होंने टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भेजा है.
हालांकि पार्टी की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष ने बारासात लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की असफलता पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की बात कही है लेकिन अंदरखाने चर्चा कुछ ओर ही चल रही है. उनके बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि घोष सांसदी से भी इस्तीफा दे सकती हैं और पार्टी भी छोड़ सकती हैं.
इधर, सांसद के बेटे बैद्यनाथ घोष ने तो पार्टी पर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप तक लड़ दिए. घोष ने ही पार्टी सांसद द्वारा सांसदी छोड़ने के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि काकोली टीएमसी महिला विंग के पद से भी इस्तीफा दे चुकी हैं और वह सांसद पद छोड़ने पर भी विचार कर सकती हैं. घोष ने ये भी कहा कि पूर्ववर्ती ममता सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार और घोटालों का असर उनके परिवार की छवि पर भी पड़ा है. नौकरी घोटाला, राशन घोटाला और आरजी कर अस्पताल जैसी घटनाओं ने लोगों का भरोसा तोड़ा है.
वहीं सांसद काकोली ने हार का पूरा ठीकरा I-PAC पर डालते हुए कहा कि अगर पार्टी के पतन की जड़ में कोई है, तो वह I-PAC है. इसने सब कुछ खत्म कर दिया. उन्होंने ये भी कहा कि मैं 40-45 साल से राजनीति में हूं और 22-23 साल के लड़के-लड़कियां हमें निर्देश देते थे कि क्या करना है. इन सलाहकारों ने कार्यकर्ताओं को परेशान किया है. उन्होंनेर्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील की कि पार्टी को बाहरी सलाहकारों के बजाय पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं पर भरोसा करना चाहिए.
इन तीष्ण विषैले बयानों के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि काकोली घोष जल्द ही टीएमसी का साथ छोड़कर 'कमल' की ओट में दुबकने वाली हैं. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी छह हार गई थी. हाल में टीएमसी के गढ़ 'फालना' का सियासी किला भी गढ़ गया जो 2011 से अजेय था. इन सभी झटकों के बाद तृणमूल कांग्रेस की जर्जर हुई दीवार अब गिरने लगी है. अब देखना ये है कि सांसद काकोली घोष के बाद कुछ अन्य नेता भी बीजेपी की क्षरण लेते हैं या ये महज एक नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया जा रहा है.













