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पीएम पर खडगे का 'कंप्रोमाइज्ड' वार: ईंधन कीमतों पर पूछा- पैसा आखिर जा कहां रहा?

23 मई 2026
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पीएम पर खडगे का 'कंप्रोमाइज्ड' वार: ईंधन कीमतों पर पूछा- पैसा आखिर जा कहां रहा?

पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, खड़गे ने पूछा- तेल की बढ़ी कीमतों की ‘किश्त’आखिर किसे जा रही है?

देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों ने एक बार फिर महंगाई और आम आदमी की जेब पर असर को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे के तीखे हमलों ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है. कांग्रेस जहां इसे जनता पर आर्थिक बोझ और केंद्र की नीतियों की विफलता बता रही है, वहीं सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दे रही है.


बीते 10 दिनों में तीसरी बार पेट्रोल-डीज़ल कीमतों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने फिर केंद्र की मोदी सरकार को घेरा. उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'कंप्रोमाइज्ड' पीएम कहते हुए चर्चा को हवा दे दी. उन्होंने पीएम मोदी से सवाल पूछा - इस लूट की किश्त किस-किस को जा रही है? आप इतने 'कंप्रोमाइज्ड' क्यों हैं?' साथ ही दावा किया कि इस सरकार में नेतृत्व का संकट असली है, 140 करोड़ भारतीय अब ये समझ गए हैं.


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है. खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा कि पेट्रोल अब हुआ 100 रुपये पार, अबकी बार… जनता की कमाई पर किश्तों में लूटमार. पेट्रोल-डीजल पर रोजाना 1000 रुपये करोड़ का केंद्रीय कर लगाकर भाजपा का पेट नहीं भरा. अंतरराष्ट्रीय दाम जब कम थे तब जनता को फायदा नहीं पहुंचाया, उन्हें जमकर लूटा.'


कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'जब संकट आया तो, चुनाव में जुट गए और चुनाव बाद त्याग का उपदेश दिया, फिर 8 दिनों में 3 बार पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाए. हमें बताया गया कि विदेशों के मुकाबले भारत में दाम सबसे कम हैं. पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद जब मोदी जी हम भारतीयों को सब ठीक है की घुट्टी पिला रहे थे तब बाकि देश अपनी-अपनी जनता को राहत पहुंचा रहे थे.'


मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि इटली ने ईंधन पर एक्साइज कटौती की, जिससे उनकी जनता को राहत मिली. ऑस्ट्रेलिया ने उत्पाद शुल्क में कटौती की, जिससे नागरिकों के लिए पेट्रोल की कीमतें लगभग 17 रुपए प्रति लीटर कम हो गईं. जर्मनी ने तेल पर कर कम किया, जिससे ईंधन की कीमतें 17–19 रुपए प्रति लीटर कम हो गईं.' 


दरअसल शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है जबकि डीज़ल के रेट 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं. इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने  तेल की कीमतों में तीन रुपए और 81 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की थी. इसके चलते पेट्रोल की कीमत 104 रुपए प्रति लीटर से 110 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच गयी है. 


बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है. परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं तक महंगाई का दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है. अब देखना होगा कि केंद्र सरकार जनता को राहत देने के लिए कोई बड़ा कदम उठाती है या फिर विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर हमले और तेज करेगा.

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