तेजस्वी-लालू की जोड़ी पर भारी पड़े नीतीश, कांग्रेस-AIMIM ने बिगाड़े समीकरण तो बची JDU की लाज!

बिहार में राजद के लिए उपचुनाव है 'अलर्ट अलार्म', राजद-JDU ने झोंकी थी प्रचार में पूरी ताकत, लेकिन सियासी गणित और वोट की गणित में जदयू ने मारी बाजी, तेजस्वी की 40 रैलियों पर नीतीश की 5 रैलियां पड़ी भारी, राजद की ओर से लालू यादव भी उतरे थे प्रचार में, लेकिन असर नहीं डाल सके, कांग्रेस से अलग होकर लड़ना राजद को पड़ा भारी, कांग्रेस की जमानत ही हो गई जब्त, सियासी गलियारों में चर्चा- राजद को कांग्रेस से मिलाना ही पड़ेगा हाथ, वरना...

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तेजस्वी-लालू की जोड़ी पर भारी पड़े अकेले नीतीश
तेजस्वी-लालू की जोड़ी पर भारी पड़े अकेले नीतीश
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Politalks.News/Bihar. बिहार विधानसभा की दोनों सीटों कुशेश्वरस्थान और तारापुर में हुए उपचुनाव में जदयू ने कब्जा जमा लिया है. हालांकि सभी दलों ने यहां प्रचार में पूरी ताकत झोंकी है. राजद, जदयू और कांग्रेस ने प्रचार में तो कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन जीत का सेहरा जदयू के सिर पर बंधा है. बिहार के इस चुनाव में तेजस्वी की 40 चुनावी रैलियों और लालू की रैलियों पर नीतीश बाबू की 5 रैलियां भारी पड़ गई है. नीतीश कुमार दोनों सीटें बचाकर साख बचाने में कामयाब रहे. जबकि, राजद और कांग्रेस का अलग लड़ना साथ ही AIMIM द्वारा वोट काटने के चलते नीतीश की लाज तो बच गई है लेकिन आने वाले समय में राजद और कांग्रेस को हाथ मिलाना ही पड़ेगा वरना अगले चुनाव में भी यही नजारा देखने को मिल सकता है. सारे समीकरणों के चलते दोनों सीटों पर मुकाबला अंत तक काफी दिलचस्प रहा. खासकर मतों की गिनती के दौरान तारापुर में जदयू और राजद उम्मीदवारों के बीच जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिखा. उधर, राजद से अलग होकर दोनों सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस मजबूती से लड़ने के बाद भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई.

नीतीश ने दोनों सीटों पर की केवल पांच चुनावी रैलियां
जदयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद प्रचार की कमान संभाली. नीतिश खुद दो दिन चुनाव प्रचार में गये. दोनों सीटें – तारापुर और कुशेश्वरस्थान में नीतिश ने कुल पांच सभाएं कीं. 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक सभा को संबोधित किया. वहीं, 26 अक्टूबर को तारापुर में दो और कुशेश्वरस्थान में एक सभा की. हालांकि जदयू के अन्य बड़े नेताओं की टीम दोनों विधानसभा में डटी रही. उधर, राज्य सरकार में जल संसाधन मंत्री संजय झा कुशेश्वरस्थान में निरंतर मोर्चा संभाले रहे. वहां चुनाव प्रचार की पूरी रणनीति की कमान झा के पास थी. जदयू को डर था कि कांग्रेस के अलग लड़ने से यह खतरा हो गया था कि सवर्ण वोट बंट सकता है. इस वोट को एनडीए खेमे में एकजुट करने में संजय झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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जदयू नेताओं ने एकजुटता के साथ संभाली कमान
दूसरी ओर तारापुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, जदयू के वरिष्ठ नेता और शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कन्हैया सिंह प्रचार ने रथ की कमान थामी. ये सभी दिग्गज 15 अक्टूबर से ही तारापुर में कैंप किये हुए थे. जदयू एमएलसी संजय सिंह भी प्रचार में जमे रहे. वहीं, केंद्रीय इस्पात मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह भी दोनों क्षेत्रों में लगातार चुनाव प्रचार और जनसंपर्क अभियान में पूरी तरह जुटे रहे साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावी रणनीति व मंथन पर भी जोर दिया.

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तेजस्वी ने लालू संग झोंकी ताकत, 45 रैलियां, लेकिन…
उपचुनाव के दौरान राजद ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी. राजद ने लालू प्रसाद यादव तक को उपचुनाव के प्रचार में झोंक दिया. राजद प्रमुख और बिहार के ‘लाल’ लालू प्रसाद ने दो जनसभाएं कीं, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 40 से अधिक नुक्कड़ सभाएं की. यही नहीं, तेजस्वी यादव चुनाव प्रचार के चलते पटना में विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए. राजद प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के अनुसार पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद ने एक दिन कुशेश्वरस्थान व तारापुर में जनसभाएं की. वहीं, तेजस्वी प्रसाद यादव ने तीन-तीन दिन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में अकेले और एक दिन लालू प्रसाद के साथ चुनाव क्षेत्रों में गए और जनसभाओं में शामिल हुए. श्री गगन के अनुसार तेजस्वी यादव तीन-तीन दिनों में दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 20 -20 स्थानों पर नुक्कड़ सभाओं में शामिल हुए और रोड शो किए. मतगणना के पूर्व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कुशेश्वरस्थान निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना को लेकर दरभंगा में कैंप किया और एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी. जबकि तारापुर निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के लिए मुंगेर में प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ जमे रहे.

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