बसपा की बैठक में जमकर चले लात-घूंसे, प्रदेश महासचिव का सिर फोड़ा

बहुजन समाज पार्टी के छः विधायकों के अपनी पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की रविवार को जयपुर में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में जमकर हंगामा हुआ. हंगामा इतना जोरदार हुआ कि कार्यकर्ताओं के दो गुटों में आपस में गाली-गलौच के साथ जमकर लात-घूंसे चले. यहां तक कि कुछ कार्यकर्ताओं ने सरिये से बसपा प्रदेश महासचिव प्रेम बारूपाल का सिर फाड़ दिया. इस संदर्भ में सिंधी कैम्प थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है.

बसपा के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर राम जी गौतम की अध्यक्षता में पार्टी ने रविवार को जयपुर कार्यालय में एक अहम बैठक बुलाई थी. इसमें हाल ही में पार्टी के छः विधायकों के कांग्रेस में जाने के बाद कार्यकर्ताओं को बूस्टअप करने के साथ ही आगामी सियासी समीकरण पर चर्चा होनी थी. बैठक में बसपा के तय एजेंडे को छोड़कर जो हुआ वो अकल्पनीय रहा. बैठक की शुरुआत में ही कार्यकर्ताओं के आक्रोश के चलते हंगामा होने लगा. अधिकांश कार्यकर्ताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप जड़ दिया. कार्यकर्ताओं का कहना था कि पार्टी प्रेशर के चलते विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

सूत्रों की मानें तो बैठक शुरू होते ही कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों के समर्थक रहे कई कार्यकर्ताओं ने बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक रामजी गौतम, प्रदेश प्रभारी भगवान सिंह बाबा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. बैठक में पूरण परनामी सहित अन्य कार्यकर्ताअाें ने पार्टी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. उनका कहना था कि बसपा के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताअाें की सुनवाई नहीं हाे रही है. पार्टी द्वारा टिकट देते समय कार्यकर्ता या लाेकल पदाधिकारी से बात तक नहीं की जाती है. बसपा, पार्टी काे गालियां देने वालाें काे रुपए लेकर टिकट देती है, इससे कार्यकर्ता की उपेक्षा हाेती है. पार्टी सुप्रीमाे मायावती तक कार्यकर्ताओं का सही संदेश नहीं पहुंचाया जाता है.

इसके बाद दूसरे पक्ष के कार्यकर्ता पूरण परनामी और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं का विरोध करने लगे जिससे मामला बढ़ गया और दोनों ओर से कुर्सियां फेंकनी शुरू हो गई. देखते ही देखते दोनों गुटों में गाली-गलौच के साथ लात-घूंसे चलने लगे. इसी बीच कुछ लोग सरिये लेकर आए और प्रदेश महासचिव बारूपाल पर वार कर दिया. बसपा के नेशनल काेर्डिनेटर रामजी गौतम, हरि सिंह, विजय प्रताप अाैर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा से भी हाथापाई की गई. सिर में चाेट लगने से प्रेम बारूपाल घायल हाे गए. इससे बैठक में अफरा-तफरी मच गई.

बसपा नेताओं की सूचना पर सिंधी कैम्प थाना पुलिस मौके पर पहुंची. बाद में पुलिस की मौजूदगी में बैठक हुई. वहीं घायल प्रदेश महासचिव बारूपाल का प्राथमिक उपचार करवाया गया. बारूपाल ने प्रदेश अध्यक्ष सीतराम मेघवाल के साथ जाकर सिंधी केंप पुलिस थाने में पूरण परनामी, विजेंद्र बंटी, राजेंद्र बुनकर सहित करीब एक दर्जन पूर्व पदाधिकारी व कार्यकर्ताअाें पर हंगामा व मारपीट के केस दर्ज कराए.

इस संदर्भ में बहुजन समाज पार्टी के नेशनल काेर्डिनेटर रामजी गौतम ने कहा कि पार्टी से निष्कासित कुछ नेताओं ने विवाद खड़ा किया. इनमें से कुछ लाेग दूसराें के इशारे पर विवाद खड़ा करने अाए थे. उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करवाई जा रही है. वहीं पू्र्व प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने कहा कि कुछ लाेगाें ने माहाैल खराब करने की काेशिश की, जिन्हें बसपा कार्यकर्ताअाें ने कार्यालय से बाहर खदेड़ दिया. गौरतलब है कि बसपा में भ्रष्टाचार और पैसे लेकर सेवा करने के आरोप पहले से लगते आ रहे हैं. हाल ही में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक राजेन्द्र गुढ़ा ने विधानसभा के बजट सत्र में कहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती के राज में बगैर पैसा दिए कोई पद और टिकट नहीं मिलता है.

वीडियो खबर: ‘हार के डर से जोशी ने किया हंगामा’, डूडी ने साधा गहलोत सरकार पर निशाना

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) और RCA अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi ) में ठन गई है. RCA कार्यालय में चुनाव पर्यवेक्षक टी. कृष्णमूर्ति और सह पर्यवेक्षक के.जे. राव के समक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) ने जोशी पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया. साथ ही गहलोत सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पुलिस के दम पर आरसीए चुनाव टालना चाहती है. बढ़ते हंगामे के बची कृष्णमूर्ति और राव ये कहकर वहां से चले गए कि यहां चुनाव कराने का कोई माहौल नहीं है. गहलोत और जोशी वैभव गहलोत को आरसीए अध्यक्ष बनाना चाहते हैं.

RCA विवाद: डूडी ने सीपी जोशी पर लगाए सरकारी संरक्षण में गुंडागर्दी के गम्भीर आरोप

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के होने वाले चुनाव को लेकर अब कांग्रेस (Congress) के अपनी ही पार्टी के नेताओं के बीच बड़ी वाली ठन गई है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) ने RCA अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi) और उनके लोगों पर शुक्रवार को RCA कार्यालय में चुनाव पर्यवेक्षक टी कृष्णमूर्ति और सह पर्यवेक्षक के.जे. राव के समक्ष गुंडागर्दी करने और हंगामा करने का गम्भीर आरोप लगाया. जिसके कारण दोनों चुनाव अधिकारी RCA से चले गए. वहीं डूडी ने अपनी ही गहलोत सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार पुलिस के दम पर RCA के चुनाव टालना चाहती है, क्योंकि उन्हें हारने के डर है.

हाल ही में BCCI ने पिछले चार वर्षों से RCA पर चला आ रहा प्रतिबंध हटाया है. जिसके बाद BCCI ने देश के सभी राज्य क्रिकेट एसोसिएशन को अपने राज्य में चुनाव कराने के निर्देश दिये हैं. जिसके तहत राजस्थान में चुनाव आयोग के पूर्व अध्यक्ष टी कृष्णमूर्ति को चुनाव पर्यवेक्षक और के.जे .राव सह पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. चुनाव पर्यवेक्षक कृष्णमूर्ति चुनावी प्रकिया के तहत गुरूवार को आरसीए कार्यालय पहुंचे जहां सभी जिला एसोसिएशन के वकीलों ने अपने-अपने जिले का उनके सामने पक्ष रखा एवं आपत्तियां दर्ज करवाई. इसी बीच आरसीए सचिव आर एस नांदू गुट ने वैभव गहलोत के राजसमंद जिला क्रिकेट संघ से कोषाध्यक्ष चुने जाने को लेकर पर्यवेक्षक कृष्णमूर्ति के समक्ष अपनी आपत्ति जताई.

यह भी पढ़ें: – गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार टला, राजनीतिक नियुक्तियां अगले एक माह में

शुक्रवार को चुनाव अधिकारी टी एस कृष्णमूर्ति चुनाव प्रक्रिया के तहत दर्ज हुई आपत्तियों पर सुनवाई और फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने के लिए RCA कार्यालय पहुंचे. जहां ये फैसला होना था कि राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन में कोषाध्यक्ष पद पर वैभव गहलोत की नियुक्ति वैध है या अवैध है. इस पर रामेश्वर डूडी ने आरोप लगाया कि जब चुनाव पर्यवेक्षक टी कृष्णमूर्ति और सह पर्यवेक्षक के.जे .राव लोगों से आपत्तियां सुन रहे थे तब बड़ी संख्या में सीपी जोशी के समर्थकों ने उन्हें घेर लिया और जोरदार हंगामा मचाया. जिसके बाद कृष्णमूर्ति और जे.जे. राव दोनों यह कहते हुए जयपुर छोड़कर चले गए कि यहां पर चुनाव कराने का माहौल नहीं है.

RCA में हुए इस हंगामे के बाद कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी अपने जयपुर आवास पर एक प्रेस कांफ्रेस बुलवाई जहां डूडी ने सीपी जोशी पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज का हंगामा सुनियोजित था, सरकारी तंत्र का दुरूपयोग किया जा रहा है आज जो हुआ वो राजस्थान क्रिकेट के लिए काला धब्बा है. डूडी ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी सरकार के साथ मिलकर राजस्थान में क्रिकेट का गला घोंटना चाहते हैं, इसीलिए इस तरह की गुंडागर्दी की जा रही है.

सीपी जोशी पर आरोप लगाते हुए डूडी ने कहा कि प्रदेश में हजारों खिलाडी बेकार बैठे हुए हैं लेकिन ये हठधर्मिता से बैठे हुए है, इन्हे खिलाडियों के भविष्य कि चिंता नहीं है. राजस्थान के खिलाडी खुद को असहाय महसूस कर रहें है. ऐसे में सीपी जोशी की जिम्मेदारी बनती है आरसीए के निष्पक्ष चुनाव करवाने की, हम भी चाहते हैं कि आरसीए के निष्पक्ष चुनाव हों और बीसीसीआई के आदेशों की पालना हो.

गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए हुए रामेश्वर डूडी ने कहा कि सरकार को चुनाव अधिकारियों को प्रोटेक्शन देनी चाहिए थी, साथ ही बीसीसीआई के दिशा निर्देशों को मानना चाहिए. राजस्थान की क्रिकेट को उचाइयों पर पहुंचाना हमारा दायित्व है.

RCA अध्यक्ष का चुनाव लडने के पत्रकारों के सवाल पर रामेश्वर डूडी ने कहा कि अगर जिला क्रिकेट संघ निर्णय लेंगे तो मैं चुनाव लडूंगा. वैभव गहलोत के सामने चुनाव लडने के सवाल पर उन्होंने फिर दोहराया कि जिला क्रिकेट संघ चाहेंगे तो मैं चुनाव जरूर लडूंगा फिर सामनें चाहे काई भी हो.

हमेशा विवादों में रहने वाला राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है. राजस्थान में आरसीए के चुनाव को लेकर इन दिनों कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बीच जंग छिडी हुई है. एक तरफ लोकसभा में मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने बेटे का खोया हुआ ‘वैभव’ वापस लाना चाहते हैं तो वहीं राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी येन-केन प्रकारेण मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को निर्विरोध RCA के अध्यक्ष पद पर पदासीन करवाने पर आमादा हैं. मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को RCA अध्यक्ष बनाने की मुहिम के बाद से ही सीपी जोशी और रामेश्वर डूडी के बीच झगड़ा चल रहा है जो अब अपने चरम पर है.

गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार टला, राजनीतिक नियुक्तियां अगले एक माह में

राजस्थान में बसपा के सभी छः विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से गहलोत मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल की अटकलों पर विराम लग गया है. शुक्रवार को प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने साफ किया है कि फिलहाल निकाय चुनाव से पहले कोई विस्तार नहीं होगा. निकाय चुनाव में मंत्रियों और विधायकों की परफॉर्मेंस के आधार पर ही उन्हें पदोन्नत या पदमुक्त किया जाएगा. वहीं निकाय चुनाव से पहले अगले एक माह में राजनीतिक नियुक्तियां कर दी जाएंगी. पाण्डे ने बताया कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक एक लाख से ज्यादा पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्ति देकर सत्ता में भागीदार बनाया जाएगा.

बसपा छोड़ कांग्रेस में आये विधायकों को राजनीतिक नियुक्ति में शामिल करने या उन्हें मंत्री बनाए जाने पर अविनाश पांडे ने कहा कि वे बिना शर्त पार्टी में शामिल हुए हैं. अगर सरकार को जरूरत होगी, तो उन्हें भूमिका दी जा सकती है. यह मुख्यमंत्रीजी का विशेषाधिकार है. पांडे ने यह भी साफ कहा कि बसपा विधायकों को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के बाद ही शामिल किया गया है.

यह भी पढ़ें: – RCA विवाद: डूडी ने सीपी जोशी पर लगाए सरकारी संरक्षण में गुंडागर्दी के गम्भीर आरोप

जानकारों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले निर्देश के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट द्वारा सत्ता और संगठन में तालमेल बिठाने की कोशिश की जा रही है. इसी के चलते अब सत्ता और संगठन प्रदेश में बड़े स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां देने की तैयारी में जुट गए हैं. जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों से प्रभारी मंत्री और संगठन प्रभारी द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और पदाधिकारियों से चर्चा कर नाम लिए जाएंगे. यह प्रक्रिया आगामी 15 अक्टूबर तक पूरी की जा सकेगी. इसके बाद इन नामों की सूचियों को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे अंतिम रूप देंगे और उसके बाद दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की फाइनल मुहर के बाद राजनीतिक नियुक्तियां कर दी जाएंगी.

सूत्रों की मानें तो यह फैसला गुरुवार को पीसीसी में निकाय चुनावों को लेकर हुई बैठक के बाद उसी दिन रात को मुख्यमंत्री आवास पर हुई सीएम अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की बैठक में लिया गया है. यह भी बताया जा रहा है कि आलाकमान के निर्देश के बाद अब इन तीनों की समन्वय समिति सत्ता और संगठन के बड़े फैसलों में शामिल होगी.

वीडियो खबर: रामेश्वर डूडी ने दी वैभव गहलोत को चुनौती

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में अध्यक्ष पद के लिए मचे बवाल के बीच अब रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) खुलकर सामने आ गये हैं. डूडी ने कहा है कि अगर जिला संघ चाहेंगे तो लड़ूंगा अध्यक्ष का चुनाव, फिर चाहे सामने कोई भी हो. अपने इस बयान से रामेश्वर डूडी ने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) को चुनौती दी है. RCA में अध्यक्ष पद के लिए अभी तक वैभव गहलोत के अलावा किसी ओर का नाम सामने नहीं आया है.

मायावती की बौखलाहट स्वाभाविक, लेकिन बसपा के हालत बिगड़ने के पीछे वह खुद जिम्मेदार

राजस्थान (Rajasthan) में चुनाव जीते सभी छह बसपा विधायकों के कांग्रेस में जाने के बाद मायावती (Mayawati) की बौखलाहट स्वभाविक है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस पैसे खर्च करके उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ रही है. यह आरोप लगाने से पहले उन्हें आत्मविश्लेषण की जरूरत है कि जो बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ दलित आंदोलन के रूप में उभरकर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन गई थी, वह सिर्फ मायावती की मनमानी के कारण इस हालत में पहुंच गई है कि उत्तर प्रदेश से बाहर पार्टी के विधायकों पर उनका नियंत्रण नहीं रह गया है. दूसरे शब्दों में कहें तो बसपा का केंद्रीय ढांचा चरमरा गया है.

मायावती को यह आरोप नहीं लगाना चाहिए कि उनके विधायक पैसे लेकर दूसरी पार्टी में जा रहे हैं. हकीकत यह है कि मायावती पर पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप पहले से लगते रहे हैं. राजस्थान में एक बसपा नेता खुलेआम कह चुके हैं उनकी पार्टी प्रमुख पैसे लेकर टिकट देती है और उससे ज्यादा पैसे मिल जाएं तो वह उम्मीदवार भी बदल देती है. मायावती ने इन आरोपों का कभी खंडन नहीं किया है. अपने जन्मदिन पर करोड़ों रुपए के नोटों की माला पहने हुए मायावती की तस्वीरें अभी तक लोगों को याद है.

मौजूदा स्थिति में राजनीति पर भाजपा का वर्चस्व हो चुका है. कांग्रेस प्रमुख विपक्षी पार्टी के रूप में अपना अस्तित्व बनाए हुए है. भाजपा और कांग्रेस, दोनों में ही दलित मतदाताओं पर पकड़ बनाने की होड़ है, जो कि बड़ी संख्या में बसपा से जुड़े हुए हैं. उत्तर प्रदेश से बाहर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में बसपा टिकट पर चुनाव जीतकर जो विधायक बन गए हैं, उन पर उनकी पार्टी के हाईकमान का नियंत्रण नहीं है. बसपा में मायावती एकमात्र हाईकमान है. उन्होंने पार्टी में अपने अलावा और किसी का कद बढ़ने ही नहीं दिया. इस वजह से कई दलित नेता बसपा से किनारा कर गए हैं.

राजस्थान में जिन छह विधायकों ने बसपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली है, उनमें से पांच करोड़पति हैं और एक की संपत्ति एक करोड़ से पांच लाख रुपए कम है. मतलब सभी अच्छे-खासे संपन्न हैं. ज्यादातर विधायक ऐसे हैं, जो कांग्रेस से या भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े हैं. ऐसे विधायकों को अब पार्टी के हित से ज्यादा अपना निजी राजनीतिक भविष्य ज्यादा महत्वपूर्ण लगने लगा है. देश में ऐसे कई नेता हैं, जो किसी विचारधारा से बंधे हुए नहीं हैं और राजनीति उनके लिए व्यवसाय है. वे एक पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर दूसरी पार्टी का टिकट लेने का प्रयास करते हैं. बसपा ऐसे लोगों को टिकट दे देती है, जो प्लेटफार्म की तरह बसपा का इस्तेमाल कर लेते हैं. पार्टी को इस स्थिति में पहुंचाने के लिए मायावती के अलावा और कौन जिम्मेदार है?

बहरहाल मायावती का विलाप चलता रहेगा और बसपा के टिकट जीतने वाले संपन्न विधायक मौका परस्त बने रहेंगे. बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी है. मायावती समझती होंगी कि हाथी पर काबू करना बहुत मुश्किल है और उनका हाथी पूरे देश में मंथर गति से आगे बढ़ भी रहा था, लेकिन राजस्थान में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने हाथी पर काबू करने की जादूगरी दिखा दी है. दस साल पहले भी बसपा के छह विधायक गहलोत सरकार के साथ जुड़ गए थे और कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इस बार भी बसपा के छह विधायक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. मायावती का विलाप फिजूल है. विधायकों के बसपा छोड़ने के लिए पैसे के लालच के अलावा अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं. मायावती को कोई भी आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी का सांगठनिक ढांचा दुरुस्त करना चाहिए.

गहलोत के राजनीतिक कौशल के पीछे सरकार के इस मंत्री की भूमिका

राजस्थान (Rajasthan) में बसपा (BSP) के छह विधायकों को कांग्रेस (Congress) में लाने के पीछे सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है, जो कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास हैं और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के विधायक के रूप में गहलोत सरकार को समर्थन देते हुए मंत्री भी बने हुए हैं. इन खबरों के बीच कई कांग्रेस नेता सवाल उठाने लगे हैं कि सुभाष गर्ग अगर दूसरी पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में ला सकते हैं तो खुद कांग्रेस में शामिल क्यों नहीं हो जाते? विधानसभा चुनावों से पहले सुभाष गर्ग भरतपुर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. यह ब्राह्मण बहुल क्षेत्र है, इसलिए पार्टी में … Read more

पायलट निवास पर बढ़ी हलचल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायकों का जमावडा

बसपा (BSP) के सभी 6 विधायकों के कांग्रेस (Congress) में विलय के बाद राजस्थान (Rajasthan) में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. बुधवार को पूरे दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan Congress) और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के निवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व विधायकों कि हलचल देखी गई. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता पायलट से मिलने उनके निवास पहुंचे, जहां कई नेताओं के साथ तो पायलट की काफी लंबी मंत्रणा चली.

पायलट के निवास पहुंचने वालों में वरिष्ठ नेता रघुवीर मीना, मांगीलाल गरसिया, डाॅ. चयनिका उनियाल, भगवाना राम, रिछपाल मिर्धा, करण सिंह राठौड, गोपाल सिंह शेखावत, नागराज मीना, नाना लाल नीनामा, भानुप्रताप सिंह, चुन्नीलाल राजपुरोहित, विधायक संयम लोढा, वीरेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह शक्तावत, महेंद्र मालवीय, दीपेंद्र सिंह शेखावत, गणेश घोगरा, रामलाल मीना, गोविंद राम मेंघवाल, पं. भॅवर लाल शर्मा, इंद्र राज गुर्जर, वेद प्रकाश सोलंकी सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल थे.

यह भी पढ़ें:- बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत और पायलट में बढ़ेगी रार

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के स्तर पर बिना किसी प्रलोभन और लालच के स्वेच्छा से बसपा छोड़ कांग्रेस में आये सभी विधायकों को सम्मान स्वरूप ईनाम देने की तैयारियां जोरों पर है. इसके लिए आने वाले दिनों में प्रदेश में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही मन्त्रिमण्डल विस्तार-फेरबदल देखने को मिलेगा. ऐसे में वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं. उनका डर ये है कि बसपा से आये विधायकों को एडजस्ट करने में उनका नम्बर कट सकता है दूसरी और उनके कैम्प को भी देखा जायेगा, मतलब की अमुख नेता-विधायक गहलोत कैम्प से आता है या पायलट कैम्प से.

गौरतलब है कि राजस्थान में जब एक व्यक्ति एक पद की मांग ने जोर नहीं पकड़ा और सोनिया गांधी ने भी संगठन में किसी तरह के बदलाव की सहमति नहीं दी तो पायलट का उत्साह बढ़ गया था. लेकिन इसके एक हफ्ते बाद ही गहलोत ने राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवाने की जादूगरी दिखा पार्टी में अपना रुतबा बढ़ा लिया है. इस कारण पायलट कैम्प के नेता-विधायकों को चिंता सताने लगी है, की पालयट और गहलोत की आपसी खींचतान का खामियाजा उन्हें नहीं उठाना पड़ जाये.

वहीं राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में सचिन पायलट ने साफ तौर पर कहा है कि खून-पसीना बहाकर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार लाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा. पार्टी की अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) भी कह चुकी हैं कि सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल होना चाहिए. इसका मतलब यह भी निकलता है कि कांग्रेस सरकार में पार्टी बदलने वाले बसपा विधायकों (BSP MLAs) को राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

कांग्रेस में शामिल होने वाले बसपा विधायकों का पार्टी बदलने का इतिहास

राजस्थान (Rajasthan) में BSP के जो छह विधायक कांग्रेस (Congress) में शामिल हुए हैं, उनमें से पांच करोड़पति हैं पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं. ये अपने क्षेत्र के ऐसे दबंग नेता हैं, जिन्हें जो पार्टी महत्व देती है, उसका दामन थाम लेते हैं. पार्टियां भी क्षेत्र के मतदाताओं में इनकी पकड़ को देखते हुए इन्हें अपने साथ जोड़ने का जैसे इंतजार ही करती रहती हैं. इन दबंग नेताओं ने बड़ी मेहनत करके राजनीति में अपना मुकाम बनाया है. ये सभी अत्यंत संपन्न नेता हैं. हालांकि विधायक वाजिब अली (Wajib Ali) ने पहली बार पार्टी बदली है.

नदबई विधानसभा क्षेत्र से बसपा विधायक चुने गए जोगेन्द्र सिंह अवाना उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वहीं कांग्रेस में शामिल हुए थे. 2017 के विधानसभा चुनाव में नोएडा से टिकट चाहते थे, नहीं मिला. वह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए और राजस्थान के नदबई विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए. 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा ने टिकट दे दिया. उप्र में असफल होने के बाद वह राजस्थान में चुनाव जीत गए और उनका विधानसभा में जाने का सपना पूरा हुआ. वह स्वभाव से कांग्रेसी रहे हैं और कांग्रेस में ही उनकी जड़ें हैं. बसपा का टिकट मिलने के चुनाव जीतते ही वह कांग्रेस में प्रवेश कर गए. जोगेन्द्र सिंह अवाना करीब 22 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं.

उदयपुरवाटी क्षेत्र के विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा पहली बार 2008 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे. उसके बाद वह बसपा छोड़कर मामूली अल्पमत वाली गहलोत सरकार को समर्थन देने के लिए कांग्रेस में चले गए थे और मंत्री बन गए थे. 2018 में वह फिर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब 95 लाख रुपए बताई जाती है.

यह भी पढ़ें: बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत और पायलट में बढ़ेगी रार

किशनगढ़ बास क्षेत्र के विधायक दीपचंद भी मूलतः कांग्रेसी हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस का टिकट मिला था और वह चुनाव हार गए थे. 2018 के चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए. 2018 में वह बसपा में शामिल हो गए. उन्हें किशगढ़ बास क्षेत्र से टिकट मिला. वह बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद अब फिर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब तीन करोड़ रुपए है.

तिजारा क्षेत्र के विधायक संदीप कुमार ने भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीति शुरू की. 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह बसपा में शामिल हो गए. वह बसपा का टिकट मिलने के बाद चुनाव जीत गए हैं. करीब 3.50 करोड़ के मालिक संदीप कुमार अब कांग्रेस में रहकर अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

करौली क्षेत्र के विधायक लाखन सिंह 2013 में किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी राजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए. किरोड़ी लाल मीणा के भाजपा में चले गए तो राजपा का भी भाजपा में विलय हो गया. तब लाखन सिंह ने बसपा का दामन थामा. 2018 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब सात करोड़ रुपए है.

भरतपुर संभाग में नगर क्षेत्र के विधायक वाजिब अली आस्ट्रेलिया में शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारत लौटे और बसपा के सदस्य बने. बसपा के टिकट पर 2013 में चुनाव लड़ा, जीत हासिल नहीं हुई, लेकिन वह क्षेत्र में सक्रिय रहे. 2018 में उन्हें बसपा ने फिर से टिकट दिए. इस बार उन्होंने विधानसभा चुनाव जीत लिया. अब वह कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.