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निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, 26 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

29 सितंबर 2021
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निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, 26 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

Politalks.News/Rajasthan. ग्रेटर नगर निगम जयपुर की निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को मंगलवार भी सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चल रही न्यायिक जांच को पूरा होने की बात कहते हुए सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की अगली तारीख दी है. इससे पहले 25 अगस्त को इस मामले में सुनवाई हुई थी, तब सुप्रीम कोर्ट में सौम्या गुर्जर की तरफ से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से मना कर दिया. उस समय कोर्ट ने मामले में लम्बे समय तक बहस भी हुई थी. मंगलवार को इस मामले में राज्य सरकार की … Read more

Politalks.News/Rajasthan. ग्रेटर नगर निगम जयपुर की निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को मंगलवार भी सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चल रही न्यायिक जांच को पूरा होने की बात कहते हुए सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की अगली तारीख दी है. इससे पहले 25 अगस्त को इस मामले में सुनवाई हुई थी, तब सुप्रीम कोर्ट में सौम्या गुर्जर की तरफ से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से मना कर दिया. उस समय कोर्ट ने मामले में लम्बे समय तक बहस भी हुई थी.

मंगलवार को इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी पैरवी करने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. दोपहर लांच बाद जब सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट में सरकार की ओर से मामले की ज्यूडिशरी इन्क्वायरी चलने की बात कही. इस पर कोर्ट ने जांच को जारी रखने और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को करने की तारीख देते हुए सुनवाई को टाल दिया.

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आपको बता दें, सौम्या गुर्जर ने राज्य सरकार की ओर से जारी निलंबन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने गुर्जर की याचिका को खारिज कर दिया था. साथ ही सरकार को 6 माह के अंदर मामले की न्यायिक जांच पूरी करके रिपोर्ट देने के लिए कहा है. सौम्या की तरफ से उनके वकील ने हाईकोर्ट में सेक्शन 39 (1 D) के तहत किए गए सस्पेंशन को चुनौती दी थी। इस सेक्शन में सरकार ने मिसकंडक्ट (दुराचार) और डिस ग्रेसफुल एक्ट (शर्मनाक बर्ताव) को आधार मानते हुए सौम्या गुर्जर को मेयर और पार्षद के पद से निलंबित किया था. इसी सेक्शन को चुनौती देते हुए कहा था कि इसमें ये कहीं उल्लेख नहीं है कि मिसकंडक्ट (दुराचार) और डिस ग्रेसफुल एक्ट (शर्मनाक बर्ताव) की परिभाषा क्या है ? लेकिन हाईकोर्ट ने इस सेक्शन और सस्पेंशन ऑर्डर दोनों में दखल देने से मना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया.

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