केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होनी है. अटक्लें हैं कि जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है, उन राज्यों के बड़े नेताओं को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है, ताकि पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में फायदा हो. इसके साथ साथ विभिन्न क्षेत्रीय दलों से बगावत कर भारतीय जनता पार्टी में आने वाले या समर्थन करने वाले सांसदों को भी बगावत करने का ईनाम मिलने की पूरी संभावना है. माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP), बंगाल की तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी से आए सांसदों को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिलेगी.
कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी से NCPI में आए दो सांसद सुदीप बंदोपाध्याय एवं शर्मिला सरकार और को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल एवं पंजाब की भगवंत मान सरकार से बगावत करने का इनाम मिलना करीब-करीब मिलना तय है. राघव चड्ढा के नेतृत्व में ही आप के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए थे.
इसके अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए है, जबकि टीएमसी के 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया है और सदन में एनडीए को समर्थन देने की बात कही है.
दूसरी ओर, मोदी कैबिनेट से कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और कई के विभाग भी बदले जा सकते है. बीजेपी 'एक आदमी और एक पद' के सिद्धांत पर भी गौर फरमा सकती है, जिसके चलते जिन नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी दी है, उनकी कैबिनेट से छुट्टी तय है.
गौरतलब है कि मोदी सरकार संसद में परिसीमन बिल को दोबारा लाना चाहती है. लोकसभा चुनाव 2029 के चुनाव से पहले बीजेपी का परिसीमन बिल मुख्य एजेंडा है. इसके लिए सदन में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है. ऐसे में नए सहयोगियों और सांसदों को बीजेपी साथ रखना चाहती है.
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिवस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बागियों को मोदी की टीम में शामिल किया जाना तय है. अब देखना है कि मंत्री पद की लालसा लिए जो भी सांसद बगावत कर खुद की पार्टियों का हाथ छोड़कर 'कमल' में समा गए हैं, उनकी यह इच्छा पूरी हो भी पाती है या फिर नहीं.












