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‘यह किसी व्यक्ति का नहीं, पार्टी का कार्यक्रम है’: नारेबाजी पर कार्यकर्ताओं से नाराज हुए खड़गे

21 जून 2026
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‘यह किसी व्यक्ति का नहीं, पार्टी का कार्यक्रम है’: नारेबाजी पर कार्यकर्ताओं से नाराज हुए खड़गे

'डीके-डीके' के नारों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष ने दिया अनुशासन का संदेश, पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, बोले - गुटबाजी नहीं, संगठन सर्वोपरि

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को बेंगलुरु में आयोजित ‘संकल्प समावेश कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से अनुशासन का संदेश दिया. कार्यक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए नारों पर उन्होंने नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि पार्टी मंच किसी व्यक्ति विशेष के प्रचार का माध्यम नहीं होना चाहिए.

 

कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया जब सभा के दौरान कुछ कार्यकर्ता लगातार ‘डीके-डीके के नारे लगाने लगे. इसके बाद खड़गे ने मंच से हस्तक्षेप करते हुए कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और कहा कि यह किसी व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम है.

 

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि व्यक्तिगत समर्थन और संगठनात्मक कार्यक्रमों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है. खड़गे ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की राजनीति व्यक्तिवाद नहीं बल्कि सामूहिक नेतृत्व और संगठनात्मक संस्कृति पर आधारित रही है.

 

अपने संबोधन में उन्होंने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे सार्वजनिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और पार्टी ने अनेक नेताओं को अवसर दिए हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की प्राथमिकताओं को समझने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की.

 

खड़गे ने कार्यक्रम के दौरान यह भी संकेत दिया कि यदि पार्टी मंचों पर अनुशासनहीनता की घटनाएं सामने आती हैं तो संगठनात्मक स्तर पर उनकी समीक्षा की जा सकती है. उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा गया.

 

दरअसल 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम का आयोजन कांग्रेस की कर्नाटक इकाई द्वारा किया गया था. इसका उद्देश्य संगठनात्मक एकजुटता, राजनीतिक रणनीति और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा करना बताया गया. हालांकि कार्यक्रम के दौरान हुई नारेबाजी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे का संदेश केवल तत्काल नारेबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व संरचना को लेकर भी संकेत माना जा रहा है.

 

कार्यक्रम में मौजूद अन्य नेताओं ने भी संगठनात्मक एकता और अनुशासन के महत्व पर जोर दिया. वहीं राजनीतिक चर्चाओं में इसे कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की लोकप्रियता और संगठनात्मक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

 

फिलहाल खड़गे का संदेश साफ दिखाई देता है - कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों का केंद्र संगठन और उसकी सामूहिक दिशा रहे, न कि किसी एक चेहरे के समर्थन का प्रदर्शन.

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