PoliTalks News
बड़ी खबर

कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी तल्खी: मोदी की तारीफ पर थरूर–खेड़ा आमने-सामने

21 जून 2026
साझा करें:
कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी तल्खी: मोदी की तारीफ पर थरूर–खेड़ा आमने-सामने

G7 बैठक से शुरू हुआ विवाद, विदेश नीति, राजनीतिक संदेश और पार्टी अनुशासन पर छिड़ी नई बहस


कांग्रेस पार्टी के भीतर वैचारिक और राजनीतिक असहमति का एक नया अध्याय उस समय खुलकर सामने आ गया, जब पार्टी सांसद शशि थरूर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर की गई सार्वजनिक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठने लगे. मामला इतना बढ़ा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से थरूर पर तंज कस दिया और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अप्रत्यक्ष बयानबाजी तेज हो गई.

 

विवाद की शुरुआत उस टिप्पणी से जुड़ी बताई जा रही है जिसमें शशि थरूर ने G7 शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारतीय नागरिकों और समुद्री क्षेत्र में कार्यरत आम नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाने को सकारात्मक रूप में देखा. थरूर की इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में प्रधानमंत्री की विदेश नीति की प्रशंसा के तौर पर भी देखा गया.

 

इसके बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बिना नाम लिए और बाद में स्पष्ट राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं इतनी बढ़ गई हैं कि वे ऐसी बातें भी सुन लेते हैं जो आधिकारिक तौर पर कभी कही ही नहीं गईं. उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बाकी लोग अभी भी सामान्य तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर ही भरोसा करते हैं.

 

खेड़ा की टिप्पणी के बाद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्होंने जो कहा, वह उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं और रिपोर्टों के आधार पर कहा. उन्होंने संबंधित रिपोर्टों और उपलब्ध डिजिटल स्रोतों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी तथ्यों पर आधारित थी और उन पर कभी जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप नहीं लगा.

 

थरूर ने आगे यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करना नहीं बल्कि विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखना था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वास्तविक मानवीय चिंता से ध्यान हटाकर इस मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल दिया गया.

 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है. यह कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही उस बहस को भी सामने लाता है जिसमें राष्ट्रीय मुद्दों, विदेश नीति और सरकार की सकारात्मक पहलों पर विपक्ष के रुख को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई देते हैं.

 

शशि थरूर लंबे समय से अपनी स्वतंत्र और अपेक्षाकृत उदार सार्वजनिक छवि के लिए जाने जाते रहे हैं. कई बार उनके बयान पार्टी लाइन से अलग माने गए हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक एकरूपता पर जोर देता रहा है.

 

फिलहाल यह विवाद कांग्रेस के भीतर विचारों की विविधता बनाम राजनीतिक अनुशासन की बहस को फिर चर्चा में ले आया है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या पार्टी के भीतर व्यापक राजनीतिक संकेत छोड़ता है.

संबंधित समाचार

महत्वपूर्ण खबरें

PoliTalks News - Authoritative News Portal