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PK की भविष्यवाणी- मोदी युग के अंत के बाद भी दशकों तक कहीं नहीं जा रही BJP, वहम में जी रहे राहुल

28 अक्टूबर 2021
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PK की भविष्यवाणी- मोदी युग के अंत के बाद भी दशकों तक कहीं नहीं जा रही BJP, वहम में जी रहे राहुल

Politalks.News/Delhi. ‘भारतीय राजनीति में अगले कई दशकों तक बीजेपी का दबदबा रहने वाला है और मोदी युग के अंत का इंतजार करना कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गलती है’ यह कहना है चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का. प्रशांति किशोर हाल ही में गोवा दौरे पर थे, जहां उन्होंने साफ कहा कि, ‘उनका मानना है कि अगले कई दशकों तक बीजेपी से लड़ना होगा’. प्रशांत किशोर फिलहाल बंगाल सीएम ममता बनर्जी के लिए पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अपने बयानों के जरिए जीत दिलाने में कामयाबी हासिल करने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस समय गोवा में हैं. उन्होंने आने वाले कई … Read more

Politalks.News/Delhi. ‘भारतीय राजनीति में अगले कई दशकों तक बीजेपी का दबदबा रहने वाला है और मोदी युग के अंत का इंतजार करना कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गलती है’ यह कहना है चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का. प्रशांति किशोर हाल ही में गोवा दौरे पर थे, जहां उन्होंने साफ कहा कि, ‘उनका मानना है कि अगले कई दशकों तक बीजेपी से लड़ना होगा’. प्रशांत किशोर फिलहाल बंगाल सीएम ममता बनर्जी के लिए पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अपने बयानों के जरिए जीत दिलाने में कामयाबी हासिल करने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस समय गोवा में हैं. उन्होंने आने वाले कई दशकों तक भारतीय राजनीति में भाजपा की सशक्त उपस्थिति की भविष्यवाणी की है. इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है. आपको याद दिला दें कि पीके ने बंगाल चुनाव में पहले ही कह दिया था कि भाजपा 100 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी और हुआ भी ऐसा ही था. पीके ने एक बार फिर से भविष्यवाणी कर कांग्रेस के जख्मों को कुरेदा तो नहीं है.

‘किसी वहम में ना रहें राहुल….’
दशकों तक बीजेपी के दबदबे की भविष्यवाणी करने के साथ ही प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि, ‘वह संभवतः किसी वहम में हैं कि बीजेपी सिर्फ मोदी लहर तक ही सत्ता मे रहने वाली है’. प्रशांत किशोर ने गोवा के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, ‘बीजेपी चाहे जीते या हारे, लेकिन वह भारतीय राजनीति के केंद्र में रहेगी. ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेस के 40 साल थे. बीजेपी कहीं नहीं जा रही. एक बार आप भारत में 30 फीसदी वोट पा लेते हैं तो आप इतनी जल्दी कहीं नहीं जा रहे. इसलिए इस चक्रव्यूह में कभी न फंसे कि लोग गुस्सा हो रहे हैं और वे मोदी को उखाड़ फेकेंगे. हो सकता है लोग मोदी को हटा दें, लेकिन बीजेपी फिर भी कहीं नहीं जा रही. आपके अगले कई दशकों तक बीजेपी का सामना करना पड़ेगा’.

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‘पीएम मोदी की ताकत समझ नहीं रहे राहुल’
प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके, पीके ने आगे कहा, ‘राहुल गांधी के साथ यही समस्या है. संभवतः, वह सोचते हैं कि यह कुछ समय की बात है, जब तक लोग मोदी को सत्ता से बेदखल न कर दें, यह नहीं होने वाला.’ प्रशांत किशोर ने कहा कि, ‘जब तक आप मोदी की ताकत समझ नहीं लेते और उनकी मजबूती को मान नहीं लेते, तब तक आप उनका सामना नहीं कर पाएंगे. मुझे जो समस्या दिखती है वह यह है कि लोग मोदी की ताकतों को समझने में ज्यादा समय नहीं दे रहे, वे ये नहीं समझ रहे कि मोदी इतने पॉप्युलर कैसे हो रहे हैं. अगर आपको यह पता होगा, तब ही आप उनका सामना कर सकेंगे.’

फिलहाल क्या कर रहे हैं पीके
चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की किसी गतिविधि की सूचना नहीं है. हालांकि उनका संगठन आई-पैक काम कर रहा है. गोवा और त्रिपुरा में आई-पैक के प्रोफेशनल्स तृणमूल कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं. जानकार सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिला होने का मामला अनिश्चितकाल के लिए टला हुआ है. पहले तो वे खुद ही अभी तुरंत कांग्रेस में नहीं शामिल होना चाहते थे क्योंकि उनको लग रहा है कि अगले साल जिन पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं वहां कांग्रेस को कुछ भी नहीं हासिल होने वाला है. लेकिन अब कहा जा रहा है कि दोनों तरफ से मामला ठंडे बस्ते में चला गया है. उधर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के साथ मिल कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ फैसले किए हैं, जिससे कांग्रेस में नाराजगी भी है.

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तृणमूल ने दिया पीके को सीक्रैट टास्क !
वहीं कुछ सूत्र कह रहे हैं कि पीके देश भर में ऐसे मजबूत नेताओं की तलाश कर रहे हैं, जिनको तृणमूल कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ाया जाए. अपने दम पर चुनाव जीतने में सक्षम ऐसे नेताओं को सारे साधन मुहैया करा कर उनको तृणमूल की टिकट पर चुनाव लड़ाने की योजना है. ऐसे लोगों में कांग्रेस के भी कई नेता शामिल हैं. इसका मकसद बांग्ला भाषी इलाकों से बाहर तृणमूल को कुछ सीटें दिलाने का है.

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