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तुगलकी फरमान नही लिया वापस तो होगा आंदोलन, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरी- बेनीवाल की चेतावनी

05 जनवरी 2023
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तुगलकी फरमान नही लिया वापस तो होगा आंदोलन, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरी- बेनीवाल की चेतावनी

Hanuman Beniwal on Gehlot Govt. राजस्थान में जारी कड़ाके की ठंड के बीच प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. दरअसल बीते रोज बुधवार को एडीजी एसीबी ने एक आदेश जारी कर कहा कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में आश्वस्त नहीं हो जाते तब तक फंसे हुए सरकारी कर्मचारी का नाम और उसकी किसी भी तरह की पहचान को उजागर नहीं किया जाना चाहिए. वही ACB के इस आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है और एजेंसी पर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं. विपक्ष तो गहलोत सरकार के इस आदेश पर निशाना साध ही रहा है लेकिन … Read more

Hanuman Beniwal on Gehlot Govt. राजस्थान में जारी कड़ाके की ठंड के बीच प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. दरअसल बीते रोज बुधवार को एडीजी एसीबी ने एक आदेश जारी कर कहा कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में आश्वस्त नहीं हो जाते तब तक फंसे हुए सरकारी कर्मचारी का नाम और उसकी किसी भी तरह की पहचान को उजागर नहीं किया जाना चाहिए. वही ACB के इस आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है और एजेंसी पर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं. विपक्ष तो गहलोत सरकार के इस आदेश पर निशाना साध ही रहा है लेकिन गहलोत सरकार के मंत्री भी ACB के इस आदेश से खुश नहीं हैं. मंत्री खाचरियावास ने इसे 4 साल के कामों पर पानी फेरने वाला ऑर्डर बताया है. तो वहीं आरएलपी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने एसीबी के इस आदेश को बेतुका और गैर जिम्मेदाराना बताते हुए CM गहलोत पर जोरदार निशाना साधा है. सांसद बेनीवाल ने कहा कि, ‘सीएम गहलोत अपराध के साथ-साथ अब राजस्थान को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने पर क्यों तुले हैं.

आपको बता दें कि एसीबी की ओर से बुधवार को जारी एक आदेश में साफ साफ लिखा गया कि ब्यूरो के अधिकारियों को रिश्वतखोरी के मामलों में आरोपियों और संदिग्धों के नाम और फोटो तब तक उजागर नहीं करने हैं, जब तक उन्हें अदालत द्वारा दोषी नहीं करार दिया जाता हो. एसीबी का यह आदेश आने के बाद प्रदेश में जोरदार सियासी हंगामा शुरू हो गया और विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आड़े हाथ लिया है.

नागौर से लोकसभा सांसद और RLP मुखिया हनुमान बेनीवाल ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए अपने बयान में कहा कि, ‘एक तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की बात करते हैं दूसरी तरफ राजस्थान में एसीबी के कार्यवाहक डीजी ने कार्यभार संभालते ही भ्रष्टाचार में लिप्त चेहरों को बचाने के लिए जिस तरह का आदेश निकाला वो आदेश बेतुका और गैर जिम्मेदाराना है और ऐसे आदेशों से जाहिर हो रहा है की सरकार प्रदेश में घूसखोरो के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तो कृत संकल्पित है मगर घूसखोरी रोकने के लिए नही है.

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सांसद हनुमान बेनीवाल ने आगे अपने बयान में किसी का नाम लिए बिना कहा कि, राज्य सरकार के एक मंत्री ने इस संदर्भ में बयान देते हुए कहा की ऐसे आदेशों से शायद मुख्यमंत्री भी सहमत नही होंगे. इस पर बेनीवाल ने आगे कहा कि चुंकि सरकार के मंत्री का बयान सरकार की मंशा और सोच को दर्शित करता ऐसे में या तो मंत्री बैतुके बयान दे रहे है या मंत्री खुद यह बात स्वीकार कर रहे है की राजस्थान में ब्यूरोक्रेट्स और अन्य अधिकारी ही सत्ता चला रहे है और अधिकारी सरकार से ऊपर है.

RLP मुखिया हनुमान बेनीवाल ने आगे मंत्री शांति धारीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि, तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार में हुए बहुचर्चित एकल पट्‌टा जारी करने के मामले में मंत्री शांति धारीवाल पर आरोप लगे और स्वयं गहलोत ने और फिर वसुंधरा ने अपने शासन काल में जिस तरह मंत्री धारीवाल को बचाया उससे भाजपा व कांग्रेस दोनो की नियत जनता के सामने स्पष्ट हो गई. सांसद हनुमान बेनीवाल ने आगे कहा कि, मुख्यमंत्री गहलोत की कैबिनेट में एक दर्जन मंत्री और ब्यूरोक्रेट्स तथा विधायक जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है ऐसे में एसीबी डीजी इस तरह के तुगलकी फरमान बिना मुख्यमंत्री के मर्जी के कैसे निकाल सकते हैं? यह समझ से परे है.

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यही नहीं सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आड़े हाथ लेते हुए आगे कहा कि, चुंकि राजस्थान में भ्रष्टाचार पहले से ही चरम पर था लेकिन लेकिन बुधवार को नए कार्यवाहक एसीबी एडीजी ने जो आदेश निकाला है बड़ा ही शर्मनाक है, क्या अशोक गहलोत यह बताएंगे की इस अधिकारी ने नया आदेश किसके कहने पर निकाला है? विभाग का मंत्री कौन है? यह जनता अच्छी तरह जानती है. सांसद बेनीवाल ने CM गहलोत पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि, क्या मुख्यमंत्री राजस्थान को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाना चाहते हैं? लूट खसोट में कोई व्यवधान ना आए इसलिए यह नियम लाए हैं? एसीबी के वह कौन अधिकारी हैं जिन्होंने मामला रफा-दफा करने की एवज में दस लाख की मांग कर डाली? ऐसे भ्रष्टाचारियों का नाम उजागर ना हो इसलिए यह नियम लाया गया है? राजस्थान में पहले ही कानून व्यवस्था इतनी लचर है कि देश के विभिन्न राज्यों के अपराधी राजस्थान में शरण लेकर बैठे है. ऐसे में सीएम गहलोत अब अपराध के साथ-साथ राजस्थान को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने पर क्यों तुले है?

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गहलोत सरकार को चेतावनी देते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने आगे कहा कि, सरकार ने ऐसा तुगलकी फरमान अगर वापस नही लिया तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी द्वारा एक बड़ा प्रदर्शन प्रदेशभर में इस शासन के खिलाफ किया जाएगा. सांसद बेनीवाल ने आगे कहा कि, पूर्ववती राजस्थान की भाजपा सरकार भी अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार में लिप्त चेहरों को बचाने के लिए और प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने के लिए काला कानून लेकर आई थी मगर उसे भी सरकार को मीडिया और जनता के दबाव में वापिस लेना पड़ा था. ऐसे में एसीबी इस तरह के आदेश लाकर प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाम लगाना चाहती है जिसे बर्दास्त नही किया जायेगा. सत्ता के मद में शासन यह नहीं भूले की लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरी है.

बता दें कि एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) हेमंत प्रियदर्शी ने डीजी एसीबी का प्रभार संभालते ही एसीबी के सभी यूनिट इंचार्ज को बुधवार को यह आदेश जारी किए थे. हालांकि आपको बता दें कि इस आदेश पर मचे सियासी बवाल के बाद CM अशोक गहलोत ने आज मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा की एसीबी की ओर से जारी किए गए लेटर का रिव्यू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि इसमें कुछ गलत हुआ तो आदेश को फिर से वापस ले लिया जाएगा.

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