Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य में सौर ऊर्जा क्षेत्र (Solar Energy Sector) की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. टीकाराम जूली ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की सर्वाधिक संभावनाओं वाले राजस्थान से सौर पैनल उत्पादकों (Solar Panel Manufacturers) का मोहभंग होना राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा झटका है. कांग्रेस नेता ने सरकार को सख्त लहजे में सचेत करते हुए कहा कि यदि समय रहते सौर पैनल उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन और अनुकूल माहौल नहीं दिया गया, तो राजस्थान बड़े निवेश और रोजगार के बेहतरीन अवसरों से हमेशा के लिए हाथ धो बैठेगा.
नीतियों में अस्पष्टता से भ्रम का माहौल, अन्य राज्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं निवेशक
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विभिन्न मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि सोलर पैनल निर्माता अब राजस्थान के बजाय अन्य पड़ोसी राज्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं. उद्योग जगत के दिग्गजों और विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर राज्य सरकार की परिभाषा केंद्र सरकार के मानकों से मेल नहीं खाती है. परिभाषाओं और नियमों के इसी टकराव के कारण उद्योग जगत और निवेशकों के बीच असमंजस और भ्रम का माहौल पैदा हो रहा है. इसी सरकारी अस्पष्टता और ढुलमुल रवैए से तंग आकर कई बड़ी कंपनियों ने अपने नए प्रोजेक्ट्स के लिए राजस्थान को बायपास कर दिया है. जो कंपनियां पहले राजस्थान में भारी निवेश करने के लिए उत्सुक थीं, वे अब गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों का रुख कर रही हैं.
कलपुर्जों के विनिर्माण के बिना युवाओं के लिए 'जॉबलेस इंडस्ट्री' बन जाएगा सोलर सेक्टर
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने उद्योग विशेषज्ञों की चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य में केवल सोलर प्लांट लगा देना ही काफी नहीं है. जब तक राजस्थान में सौर ऊर्जा से जुड़े कलपुर्जों (Component Manufacturing) का विनिर्माण पूरे जोर-शोर से शुरू नहीं होगा, तब तक यह सेक्टर राजस्थान के युवाओं के लिए महज एक "जॉबलेस इंडस्ट्री" (रोजगार विहीन उद्योग) बनकर रह जाएगा. उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की है कि वह अपनी नीतियों को केवल बिजली उत्पादन तक ही सीमित न रखे, बल्कि इसे पूरी तरह से रोजगारोन्मुख (Employment-oriented) बनाए, ताकि हमारे स्थानीय युवाओं को नौकरियों के लिए दर-दर न भटकना पड़े.
निवेश सम्मेलन के तामझाम और इवेंटबाजी से बाहर निकले सरकार, धरातल पर सुधारे नीतियां
राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि बड़े-बड़े निवेश सम्मेलन (Investment Summits) आयोजित करना और करोड़ों के एमओयू (MoU) साइन करना एक अच्छी बात हो सकती है, लेकिन सिर्फ कागजी दावों से धरातल पर निवेश नहीं उतरता. सरकार को इस तरह की इवेंटबाजी और तामझाम से बाहर निकलकर उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं को समझना होगा और उनके व्यावहारिक सुझावों को सुनना होगा. टीकाराम जूली ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि राजस्थान के पास प्रचुर मात्रा में धूप और अनुकूल भूमि के रूप में प्रकृति का अनुपम वरदान है; सरकार को अब ऐसी मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए जिससे "प्रकृति भी बचे और हमारे युवाओं का रोजगार भी बढ़े.












