लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजस्थान (कोटा) दौरे के बाद राज्य की राजनीति में शिक्षा, पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं. कोटा में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ हुए संवाद के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप–प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है.
राहुल गांधी ने अपने संवाद में परीक्षा प्रणाली, युवाओं के भविष्य, रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का असर सीधे उन लाखों विद्यार्थियों पर पड़ता है जो वर्षों तक तैयारी करते हैं. अब राहुल गांधी के कार्यक्रम के तुरंत बाद भाजपा ने राजनीतिक जवाबी हमला शुरू कर दिया है. राज्य के कई वरिष्ठ एवं दिग्गज बीजेपी नेताओं ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय पर हुए 19 पेपर लीक पर जवाब मांगा है.
दौरा राजनीतिक स्टंट और दिखावा - डिप्टी सीएम
राहुल गांधी के कोटा दौरे और छात्रों के साथ उनकी मुलाकात पर राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बेहद तल्ख लहजे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. डिप्टी सीएम ने कोटा में NEET छात्रों के साथ राहुल गांधी की बातचीत को केवल एक राजनीतिक स्टंट और दिखावा करार दिया है.
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सीधे सवाल दागते हुए कहा, 'पिछली अशोक गहलोत सरकार के दौरान रिक्रूटमेंट एग्जाम पेपर लीक का एक नया और शर्मनाक रिकॉर्ड बना था, तो उस पूरे कार्यकाल के दौरान राहुल गांधी चुप क्यों थे? उन्होंने तब राजस्थान के पीड़ित युवाओं के हक में एक शब्द भी क्यों नहीं बोला?'
दिया ने आगे कहा कि राहुल गांधी इन मुद्दों पर सिर्फ इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि वह वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों जगह विपक्ष में बैठे हैं. हमारी सरकार के रहते री-एग्जाम पूरी तरह से सही और पारदर्शी तरीके से आयोजित होगा.
कांग्रेस राज में युवाओं के सपने टूटे - राजेंद्र राठौड़
बीजेपी के कद्दावर नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को बेहद आक्रामक तरीके से घेरा. राठौड़ ने अपने बयान में कहा, 'राजस्थान में कांग्रेस के पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान कुल 19 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए. इसके कारण मरुधरा के लाखों होनहार युवाओं के सरकारी नौकरी पाने के सपने पूरी तरह से टूट गए और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया.'
उन्होंने कहा, 'जब यह इतनी बड़ी धांधली लगातार हो रही थी, तब न तो दोषियों पर कोई प्रभावी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई और न ही राहुल गांधी ने इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर अपनी ही सरकार से कोई सवाल पूछा. तब राहुल गांधी को राजस्थान के इन रोते हुए युवाओं के भविष्य की चिंता क्यों नहीं सताई?'
सोची समझी राजनीतिक साजिश - चतुर्वेदी
राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अरुण चतुर्वेदी ने राहुल गांधी के कोटा दौरे को देश को पीछे धकेलने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के संवेदनशील युवाओं के भविष्य के साथ केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए खेल रहे हैं और इस प्रकार के बयानों से वे देश की तरक्की को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं. चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के तमाम बड़े नेताओं और स्वयं राहुल गांधी ने कोटा के इस छात्र कार्यक्रम में अपने बयानों के जरिए पूरे देश के भीतर भ्रम और अशांति का एक कृत्रिम वातावरण खड़ा करने का अनुचित प्रयास किया है.
एक ओर बीजेपी ने राहुल गांधी के दौरे को अवसरवादिता से जोड़ा है, वहीं कांग्रेस इसे छात्रों एवं अभिभावकों की आवाज बता रही है. फिलहाल इतना तय है कि शिक्षा, परीक्षा और रोजगार अब केवल प्रशासनिक मुद्दे नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में आ चुके हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी संघर्ष छात्रों के भरोसे और चुनावी विमर्श पर कितना असर डालता है.












