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गहलोत 'जादूगरी' से बने रहे राजनीति की धुरी, अब हाशिये पर जाने का सता रहा डर: गज्जू बना

08 जून 2026
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गहलोत 'जादूगरी' से बने रहे राजनीति की धुरी, अब हाशिये पर जाने का सता रहा डर: गज्जू बना
  • शेखावत का तंज: राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए बयानबाजी कर रहे अशोक गहलोत
  • केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में बदलते राजनीतिक समीकरणों और सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाओं से गहलोत असहज हैं, इसलिए वे लगातार अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं. सोमवार को राजस्थान प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शेखावत ने कहा कि चार दशकों तक राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस की धुरी बने रहने वाले गहलोत को अब उस स्थिति से हटने का भय सताने लगा है. शेखावत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए गहलोत समय-समय पर ऐसे बयान देते रहते हैं.

    मंत्री शेखावत ने कहा कि गहलोत स्वयं को गांधीवादी नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनका राजनीतिक व्यवहार सभी के सामने है.  गहलोत ने उन्हें राजनीतिक रूप से अपनी “लाइन लंबी करने” की सलाह दी है, जबकि राजस्थान और कांग्रेस का इतिहास इस बात का साक्षी है कि पार्टी में जिस किसी नेता या कार्यकर्ता ने अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का प्रयास किया, उसे हाशिये पर धकेलने की कोशिश की गई.

    वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा का वाहक हूं 

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा से प्रेरणा लेते हैं और उनकी ही तरह एक सामान्य परिवार से आते हैं. वीर दुर्गादास ने अपनी विचारधारा और स्वामीभक्ति के प्रति जिस निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया, उसी भावना के साथ वे भी सार्वजनिक जीवन में कार्य कर रहे हैं. शेखावत ने कहा कि डर मेरे चरित्र और व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं है. मैं अपने संकल्प और विचारों के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करता हूं.

    सत्ता, संसाधनों और प्रभाव का उपयोग कर गहलोत ने खुद को रखा प्रासंगिक 

    पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा प्रहार करते हुए शेखावत ने कहा कि वे इतने वरिष्ठ नेता हैं कि उनकी हर टिप्पणी का जवाब देना आवश्यक नहीं है, लेकिन यह कहना जरूरी है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए कभी सत्ता, कभी आर्थिक संसाधनों और कभी मीडिया प्रभाव का उपयोग किया है. मंत्री शेखावत कहा कि राजनीतिक प्रबंधन की इसी कला के कारण राजस्थान के अनेक मीडिया कर्मी उन्हें ‘जादूगर’ कहकर संबोधित करते हैं. शेखावत ने कहा कि गहलोत की इस क्षमता से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सीख लेने की आवश्यकता है.

    सतीश पूनिया और अलका गुर्जर के चयन से राज्यसभा में मजबूत होगी पार्टी की आवाज 

    राज्यसभा के लिए सतीश पूनिया और अलका गुर्जर के चयन का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इससे राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और राजस्थान का पक्ष और अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा. भाजपा और उसके व्यापक वैचारिक परिवार में कौन कार्यकर्ता किस भूमिका में कार्य करेगा, इसका निर्णय नेतृत्व करता है. कार्यकर्ताओं की योग्यता, अनुभव और क्षमता के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं. सतीश पूनिया और अलका गुर्जर का चयन भी इसी प्रक्रिया का परिणाम है. मंत्री शेखावत ने आगे कहा कि पार्टी जहां भी जो जिम्मेदारी देगी, सभी कार्यकर्ता उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए भाजपा का पक्ष मजबूती से रखेंगे.

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