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'अचानक ये तमाशा हो गया और मैं बदनाम हो गया': मानेसर कांड पर खुलकर बोले गहलोत

08 जून 2026
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'अचानक ये तमाशा हो गया और मैं बदनाम हो गया': मानेसर कांड पर खुलकर बोले गहलोत

चार साल पुरानी मानेसर घटना पर पूर्व सीएम गहलोत का बड़ा बयान, बोले- कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में था, लेकिन राजनीति ने खेल बिगाड़ दिया


Ashok Gehlot vs Sachin Pilot: राजस्थान की राजनीति में चार साल पहले हुए चर्चित 'मानेसर कांड' की गूंज एक बार फिर सुनाई देने लगी है. राज्यसभा चुनावों के बीच सितंबर 2022 में हुए घटनाक्रम को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनका नाम लगभग तय हो चुका था, लेकिन अचानक हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरी तस्वीर बदल दी और बदनामी उनके हिस्से आ गई.

गहलोत ने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी नेतृत्व की इच्छा का सम्मान करते हुए इस जिम्मेदारी के लिए तैयार भी थे. उन्होंने कहा, 'मैं तो कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था, लेकिन अचानक ऐसा तमाशा हो गया कि मैं ही बदनाम हो गया.'

सोनिया गांधी का प्रस्ताव ठुकराने का सवाल ही नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पार्टी की तत्कालीन अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी किसी नेता को कोई जिम्मेदारी सौंपती हैं तो उसे मना करने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा, 'जब सोनिया गांधी ने मुझे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया तो मेरे लिए उसे स्वीकार करना स्वाभाविक था. मैंने कभी इस पद से पीछे हटने की बात नहीं की.'

गहलोत ने संकेत दिए कि उस समय उनके खिलाफ एक सुनियोजित राजनीतिक माहौल तैयार किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम में उन्हें अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि वास्तविक परिस्थितियां कुछ और थीं.

पायलट बच्चे की तरह लेकिन..

पूर्व सीएम गहलोत ने एक निजी बात भी कही. उन्होंने बताया कि जब सचिन पायलट छोटे थे, तब वो उनके परिवार में आते-जाते थे. पायलट को वो बचपन से जानते हैं और आज भी उन्हें बच्चे की तरह मानते हैं. दोनों में आज भी मिलना-जुलना होता है, हंसी-मजाक होती है लेकिन एक बात उन्हें अखरती है. 

जब पायलट को केंद्रीय मंत्री बनवाना था, तो उन्होंने खुद गहलोत को फोन करके मदद मांगी थी. गहलोत ने हाईकमान से बात करके उनके लिए मंत्री पद दिलवाया. लेकिन पायलट ने कभी किसी के सामने, यहां तक कि अपने दोस्तों में भी यह नहीं कहा कि गहलोत ने उनकी मदद की थी. यह बात गहलोत को दुख देती है.

गहलोत ने कहा कि जब जैसलमेर से विधायक वापस आ रहे थे, तब उन्होंने खुद कहा था जो हो गया उसे भूलो और माफ करो. उनका मानना है कि इसमें किसी एक की गलती नहीं नहीं थी, दोनों तरफ से कुछ न कुछ हुआ. लेकिन पायलट ने उस भावना को नहीं समझा.

क्या था मानेसर कांड?

सितंबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया के दौरान राजस्थान में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था. उस समय अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की चर्चा तेज थी और माना जा रहा था कि उनके दिल्ली जाने की स्थिति में सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.

इसी बीच गहलोत समर्थक विधायकों ने बगावती तेवर अपनाते हुए अलग बैठकें कीं और नेतृत्व परिवर्तन का विरोध किया. राजनीतिक संकट इतना बढ़ गया कि कई विधायक हरियाणा के मानेसर में ठहराए गए, जिसके चलते पूरे घटनाक्रम को 'मानेसर कांड' के नाम से जाना गया. इस विवाद के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से अशोक गहलोत लगभग बाहर हो गए और अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी अध्यक्ष चुने गए.

फिर क्यों चर्चा में आया मामला?

गहलोत के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं जब कांग्रेस आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक पुनर्गठन में जुटी हुई है. उनके बयान को राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और 2022 के सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानेसर प्रकरण पर गहलोत की यह खुली टिप्पणी पुराने घावों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला सकती है.

दिल्ली से जयपुर तक बढ़ी हलचल

गहलोत के बयान के बाद राजस्थान से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. पार्टी के कई नेता इस बयान को अतीत की घटनाओं पर सफाई के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं. ऐसे में 'मानेसर बम' के एक बार फिर फूटने से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और आने वाले दिनों में इस पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला और तेज हो सकता है.

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