Rajasthan: पश्चिम बंगाल में भाजपा 206 विधानसभा सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है. भाजपा को मिली इस जीत में राजस्थान भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का भी अहम योगदान है, जिनकी मेहनत की बदौलत भी बंगाल में भाजपा ममता बनर्जी का किला ढहाने में सफल रही. जोधपुर से सांसद और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का भी उत्तरी बंगाल में भाजपा की जीत की पटकथा लिखने में अहम योगदान रहा. मंत्री शेखावत ने उत्तरी बंगाल में लगातार 15 दिन कैंप कर 28 सीटों पर सघन प्रचार की कमान संभाली और पार्टी को 26 सीटों पर विजय दिलाई. इस चुनाव में उनका स्ट्राइक रेट 93 प्रतिशत रहा. खास बात यह है मंत्री शेखावत ने जिन सीटों पर कमान संभाली वहां पार्टी प्रत्याशी बड़े अंतर से जीते, जो पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन का निर्णायक आधार बना.
केंद्रीय मंत्री शेखावत को पार्टी नेतृत्व ने उत्तरी बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी जैसे रणनीतिक जिले का जिम्मा सौंपा था. ये जिले सीमावर्ती होने के कारण राजनीतिक और सुरक्षा, दोनों लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं. चुनाव के दौरान लगातार जमीनी स्तर पर डेरा डालकर मंत्री शेखावत ने स्थानीय समीकरणों को साधा और मतदाताओं के मुद्दों को सीधे चुनावी नैरेटिव में बदला. शेखावत ने डोर टू डोर कैंपेनिंग के अलावा रोड शो, नुक्कड़ सभाएं, कार्यकर्ताओं के साथ रणनीतिक बैठकें कीं. बूथ मैनेजमेंट को मजबूत किया।. इसके साथ ही बंगाल में मारवाड़ी समुदाय सहित प्रभावशाली सामाजिक समूहों को साधकर एक व्यापक समर्थन आधार पार्टी के पक्ष में खड़ा किया.
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बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में मंत्री शेखावत के आक्रामक और परिणामोन्मुखी अभियान को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी थी. इस बार उन्होंने इसे नतीजों में तब्दील कर दिया. 26 सीटों पर जीत का अंतर सामान्य नहीं, बल्कि रिकॉर्ड स्तर का रहा. उत्तरी बंगाल के माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी में 1,04,265 वोटों की बढ़त, डाबग्राम-फुलबाड़ी में 97,715, सिलीगुड़ी में 73,192, अलीपुरद्वार में 70,420 और कूचबिहार उत्तर में 70,384 वोटों से जीत के आंकड़े बताते हैं कि मुकाबला एकतरफा रहा.
इसके साथ ही जलपाईगुड़ी (68,805), माथाभांगा (57,090), मयनागुड़ी (56,503) और कुमारग्राम (52,877) जैसी सीटों पर भी भाजपा प्रत्याशियों ने 50 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. मदारीहाट, फांसीदेवा और फालाकाटा में भी जीत का अंतर 40 हजार से ऊपर रहा, जो संगठनात्मक पकड़ और वोट ट्रांसफर की सटीकता को दिखाता है. केंद्रीय मंत्री शेखावत की रणनीति सिर्फ रैलियों तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने सीमावर्ती इलाकों की समस्याओं, जैसे सुरक्षा, घुसपैठ, विकास और पहचान को सीधे मतदाताओं के बीच उठाया. जिसकी बदौलत मंत्री शेखावत अपने प्रभार की 28 सीटों में से 26 पर पार्टी प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफल रहे.












