बी एल संतोष की जीवनी (BL Santhosh Biography in Hindi)
BL Santhosh Latest News बी. एल. संतोष मूल रूप से दक्षिण भारत के एक प्रमुख संघ प्रचारक रहे है, जिन्हे भाजपा की चुनावी जीत सुनिश्चित करने वाला कुशल संचालक माना जाता है. वे मुख्य रूप से पर्दे के पीछ रहकर रणनीति तैयार करने के लिए प्रसिद्ध है. उनके द्वारा बनायीं गई रणनीति पर ही पार्टी के बड़े से लेकर छोटे स्तर के नेता चलते है. संघ में लंबे समय तक अपनी सेवा देने के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी में भेज दिया गया और फिर तब से लेकर अब तक वे भाजपा में ही है. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने दक्षिण भारत में पार्टी के लिए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली. वे कर्णाटक प्रदेश संघठन महामंत्री रहे और फिर बाद में पुरे दक्षिण भारत के लिए पार्टी का राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संघठन) की जिम्मेदारी संभाली. उनके कुशल नेतृत्व की क्षमता को देखते हुए उन्हें 15 जुलाई, 2019 को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया. भाजपा में यह पद पार्टी अध्यक्ष के बाद सबसे बड़ा माना जाता है. इस लेख में हम आपको बी एल संतोष की जीवनी (BL Santhosh Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
बी एल संतोष का जन्म और परिवार (BL Santhosh Birth & Family)
बोम्माराबेट्टू लक्ष्मीजनार्दन संतोष, जिन्हे बीएल संतोष के नाम से जाना जाता है, का जन्म 1 फरवरी, 1967 को कर्नाटक के उडुपी जिले के एक छोटे से गाँव हिरियडाका में हुआ था.
उनके पिता का नाम हकरप्पा राय है. संतोष के दो भाई-बहन हैं, उन्हें एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई है. बी. एल. संतोष ने विवाह नहीं किया है, वे अविवाहित है. बी. एल. संतोष हिन्दू है और जाति से वे ब्राह्मण है.
बी एल संतोष की शिक्षा (BL Santhosh Education)
बी. एल. संतोष ने कर्नाटक के दावनगेरे स्थित बीडीटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से केमिकल इंजीनियरिंग और इंस्ट्रूमेंटेशन टेक्नोलॉजी में बीई की डिग्री प्राप्त की.
बी एल संतोष का राजनीतिक करियर (BL Santhosh Political Career)
बी. एल. संतोष कर्णाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता है और वर्तमान में, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) है. भारतीय जनता पार्टी में, पार्टी अध्यक्ष के बाद राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) का पद सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है. पार्टी में यह एक ही पद होता है और इसकी नियुक्ति भाजपा नहीं करती है बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा होती है. इनका काम संघ और भारतीय जनता पार्टी के बीच तालमेल बैठाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण होता है. इस पद पर संघ से जुड़े पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता को नियुक्त किया जाता रहा है. पार्टी के यह सर्वोच्च पदाधिकारी जनता के बीच का व्यक्ति भले ही न हो, पर पार्टी के दिशानिर्देश और महत्वपूर्ण निर्णय में इनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है. इसलिए भाजपा में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन), पार्टी के सर्वोच्च पदों में से एक है.
बी. एल. संतोष की राजनीतिक यात्रा की अगर बात करें तो, राजनीति में आने से पहले संतोष इंजीनियरिंग की पढाई करके लगभग तीन वर्षो तक एक दूरसंचार कंपनी में डिजाइनिंग इंजिनियर के पद पर आसीन थे. लेकिन संघ से जुड़ने के बाद उनपर समाज सेवा और हिन्दू हित का ऐसा रंग चढ़ा कि संतोष ने नौकरी छोड़कर संघ में पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता बन गए. इसके साथ ही उन्होंने गृहस्थ जीवन से दूर रहकर जीवन बिताने का भी संकल्प ले लिया. इस संकल्प के साथ ही उन्होंने वर्ष 1993 में आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता यानि आरएसएस प्रचारक बन गए. इसी के बाद, संतोष के जीवन की दिशा बदल गई. उन्होंने परिवार का भी त्याग कर दिया और संघ के साथ जीवन बिताने का निर्णय ले लिया. यही से, उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हो गई. बाद के वर्षो में संतोष दक्षिण भारत में संघ के प्रचार में पूरी तरह से जुट गए.
संतोष का भाजपा कर्नाटक के निर्णय पर बहुत ज्यादा प्रभाव रहा है. वर्ष 2006 में वे कर्णाटक राज्य इकाई में भाजपा महासचिव के पद पर आसीन हुए. इस पद पर उन्होंने लगातार आठ वर्षो तक अपनी सेवा दी. इसी के बाद 2014 में उन्हें दक्षिण भारत के राज्यों के प्रभारी, यानि राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव बनाया गया. पांच वर्षो के बाद संघ ने उन्हें भाजपा (संघठन) का सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया. संतोष को 15 जुलाई, 2019 को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) नियुक्त किया. इससे पहले इस पद पर रामलाल थे. 13 वर्षो तक अपनी सेवा देने के बाद रामलाल को संघ ने फिर से आरएसएस में वापस बुला लिया. वर्तमान में, बी. एल. संतोष भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) है.
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